नई दिल्ली. जजों के उल्लेख करने से नाराज सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश अरुण मिश्रा ने वरिष्ठ कांग्रेसी नेता और अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंधवी को नसीहत दी. उन्होंने कहा कि जजों को विवादों न घसीटा जाए.
दरअसल, दो जजों की बेंच, जस्टिस मिश्रा की अध्यक्षता में एक स्कूल को लेकर सुनवाई कर रही थी. दिल्ली के खान मार्केट में एक प्ले स्कूल को सील करने के मुद्दे पर स्कूल प्रबंधन की ओर से सिंघवी दलीलें दे रहे थे. लेकिन कोर्ट इससे सहमत नहीं हुआ और सीलिंग के आदेश पर रोक लगाने की याचिका को खारिज कर दिया.
सुनवाई के दौरान सिंघवी ने कहा कि प्ले स्कूल लुटियंस जोन में खान मार्केट के दूसरी तरफ है. जो तीन साल से चल रहा है. यहां रहने वाले कई नौकरीपेशा लोगों के बच्चे इसमें पढ़ते हैं. यहां कई समृद्ध लोग रहते हैं. मैंने कई जजों को इसी मार्केट में शॉपिंग करते देखा है. इसलिए इसे सील करने का कोई तुक नहीं बनता है. सिंधवी की इसी दलील पर जस्टिस मिश्रा ने कहा, ‘‘जजों को विवादों में न घसीटा जाए. मैं आपके (सिंघवी) लिए भी कुछ अच्छे शब्द बोल सकता हूं. लेकिन दूसरों को परेशानी होने लगेगी और वे आरोप लगाना शुरू कर देंगे. किसी की तारीफ करने को सद्भाव के तौर पर लिया जाना चाहिए.’
क्यों है विवाद
दरअसल, विवाद की वजह 22 फ़रवरी को दिया गया जस्टिस मिश्रा का वह व्यक्तव्य है जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी दूरदर्शी व्यक्ति बताया था.
“अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने नेतृत्व के लिए तारीफ हासिल करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दूरदर्शी व्यक्ति हैं. उनकी अगुआई में भारत दुनिया में एक जिम्मेदार और दोस्ताना रुख रखने वाला देश बनकर उभरा है. न्यायिक प्रक्रिया को मजबूत करना समय की मांग है, क्योंकि यह लोकतंत्र की रीढ़ है. विधायिका इसका दिल है और कार्यपालिका दिमाग है. इन सभी अंगों को स्वतंत्र रूप से काम करना होता है. लेकिन, इनके आपसी तालमेल से ही लोकतंत्र कामयाब होता है.”
-जस्टिस अरूण मिश्रा, सर्वोच्च न्यायालय
इसके बाद विपक्ष ने जस्टिस अरुण मिश्रा पर आरोप लगाए थे.

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