COVID-19 Live Update

Global Total
Last update on:
Cases

Deaths

Recovered

Active

Cases Today

Deaths Today

Critical

Affected Countries

Total in India
Last update on:
Cases

Deaths

Recovered

Active

Cases Today

Deaths Today

Critical

Cases Per Million

एक्सक्लूसिव टॉप न्यूज़

Delhi violence: रतनलाल को न बचा पाने का जीवन भर अफसोस रहेगा, दिल्ली हिंसा की कहानी एसीपी अनुज की जुबानी

नयी दिल्लीः फ़र्ज़ को जाबांजी के साथ निभाने वाले दिल्ली पुलिस के आईपीएस अधिकारी अनुज कुमार ने होश में आने के बाद हिंसा से जुड़ी जो बातें बताई वह किसी को भी झकझोर देने के लिए काफी हैं. घायल होने पर कई दिन हॉस्पिटल में बिताने वाले गोकलपुरी के एसीपी अनुज कुमार को डिस्चार्ज कर दिया गया है और अब वह घर पर बेड रेस्ट पर हैं.
अनुज कुमार से समाचार एजेंसी एएनआई ने जब उस समय के हालात के बारे में पूछा तो उनका दर्द छलक पड़ा. उन्होंने हेड कांस्टेबल रतनलाल की जांबाज़ी की तारीफ करते हुए कहा कि रतनलाल ने अपने जान पर खेलकर डीसीपी अमित कुमार को बचा लिया लेकिन उन्हें (रतनलाल) को न बचा पाने का अफसोस सारी जिंदगी रहेगा.
आईपीएस अधिकारी अनुज कुमार ने आज शनिवार को मीडिया से उस खौफनाक मंज़र को साझा किया और बताया कि उनके उपर भीड़ ने हमला किया था. उन्होंने बताया कि

“24 तारीख की सुबह मैं डीसीपी सर (शाहदरा) और मेरा पूरा ऑफिस स्टाफ और दो कंपनी फ़ोर्स के साथ चांदबाग मज़ार के पास थी. हमें निर्देश ये थे कि सड़क पर कोई न बैठे. वहां पास में ही एक धरना चल रहा था. वहां 35-40 दिनों से धरना हो रहा था. हमारा उद्देश्य यही था कि ट्रैफिक का आवागमन बना रहे क्योंकि वज़ीराबाद रोड आगे गाज़ियाबाद रोड को जोड़ती है.अचानक उस सड़क पर भीड़ बढने लगी. हम उनको धीरे-धीरे समझा रहे थे. मुझे बाद में पता चला कि शायद वहां इस तरह की अफवाह फैली की पुलिस ने फायरिंग कर दी है जिसमें कुछ महिलाएं और बच्चे मारे गए हैं. शायद वहां इस तरह की बातें होने लगीं और भीड़ बढ़ती गयी. ये पूरा वाकया मुश्किल से 20-25 मिनट का था तभी भीड़ बहुत ज्यादा हो गई.और अचानक पत्थरबाजी शुरू हो गई. भीड़ में से कई के हाथ में ईंट-पत्थर, कुदाल ,बेलचा और फावड़े थे.जब पत्थरबाजी शुरू हुई तो पहले तो हमने उन्हें तीतर-बितर करने की कोशिश की.लेकिन लोग इतने ज्यादा थे कि हमारी फ़ोर्स थोड़ा बिखर गई. हम आंसू गैस भी नहीं छोड़ पाए. उसी अफरातफरी में डीसीपी को देखा तो सड़क पर गिरे थे. उनके मुंह से खून निकल रहा था. उन्हें देखकर हम भी होश खो बैठे. फिर हम डीसीपी सर को लेकर यमुना विहार की तरफ भागे. भीड़ पथराव करती रही. पत्थर मुझे और हेड कॉस्टेबल रतनलाल को भी लगे. रतन को जब चोट लगी तो दूसरे सिपाही उसे अपने कब्जे में लिया. भीड़ को देखते हुए एक बार मन में आया कि गोली चला दूं लेकिन नहीं चलाया कि इससे भीड़ और उग्र हो जाती. भीड़ और हमारे बीच दूरी काफी कम थी. ऐसे में अगर हम डीसीपी सर को लेकर अगर सीधा रोड पर जाते तो भीड़ हमें मार देती. फिर मैं डीसीपी सर को लेकर एक गली के घर में घुसा जहां एक परिवार से हमने मदद मांगी तो उन्होंने बताया कि यहां थोड़ी दूरी पर एक नर्सिंग होम है. फिर हम वहां गए वहां वो लोग रतन को लेकर पहले ही आ गए थे. तब तक ये पता नहीं था कि रतनलाल को गोली लगी है.”

अनुज कुमार ने आगे कहा

“हम अपनी गाड़ी तक नहीं पहुंच पा रहे थे क्योंकि भीड़ काफी ज्यादा था फिर हमने एक प्राइवेट गाड़ी वाले से मदद मांगी और सर्विस रोड से निकले. पहले सोचा था कि कि सीधे मैक्स अस्पताल चलते हैं. मगर रास्तें मोहन नर्सिंग होम मिला तो हम वहीं रूक गए. थोड़ी ही देर में वहां पर भी भीड़ बढ़ने लगी.फिर हम जीटीबी अस्पताल भागे तबतक रतनलाल की हालत खराब हो गयी थी. हमने उसे वहीं भर्ती किया फिर हम डीसीपी सर को लेकर मैक्स अस्पताल गए. मेरे सिर गर्दन में चोटें हैं,लेकिन वहां जो हालात थे उसे देखते हुए मेरी कंडीशन अब ठीक ही है.

रतनलाल को याद करते हुए भावुक हुए एसीपी अनुज ने बताया कि

“वो एक कर्तव्यनिष्ठ जाबांज था जो पिछले 4-5 सालों से एसीपी गोकुलपुरी में तैनात था और उसने कभी भी किसी को शिकायत का मौका नहीं दिया था. अफसोस है कि उसे बचा नहीं पाया.”

About the author

Prakash Pandey

Add Comment

Click here to post a comment

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.