सहारनपुर में बनेगा उ.प्र. का पहला गौ-अंत्येष्टि स्थल
सहारनपुर/उत्तर प्रदेश. मृत गौवंश की विधिवत् और सम्मान पूर्वक अंत्येष्टि के लिए गौ-अंत्येष्टि स्थल सहारनपुर के दिल्ली रोड पर मवीखुर्द के निकट बनाया जायेगा. संभवतः यह उत्तर प्रदेश का पहला गौ-अंत्येष्टि स्थल होगा. यह जानकारी आज यहां नगर निगम स्थित अपने कार्यालय में नगरायुक्त ज्ञानेन्द्र सिंह ने पत्रकारों से वार्ता करते हुए दी.
उन्होंने बताया कि गौ वंश की मृत्यु पर लोगों व सामाजिक संस्थाओं को इधर उधर भटकना पड़ता था, लेकिन अब मवी खुर्द में गौ-अंत्येष्टि स्थल के लिए स्थान चिन्हित कर लिया गया है. वहां वैज्ञानिक ढंग से सम्मानपूर्वक मृत गौवंश की अंत्येष्टि की जा सकेगी. उन्होंने बताया कि निगम की कान्हा गौशाला में गोबर से कंडे और गमले बनाये जा रहे हैं तथा कुछ संस्थाओं से पंचगव्य व गोबर से अगरबत्ती बनाने की भी बात की जा रही है. सहारनपुर की गौशाला एक आदर्श गौशाला के रुप में जानी जायेगी.
नगरायुक्त ने कहा कि शहर का हर आदमी कह सके कि ‘मेरा सहारनपुर मेरा अभिमान’ है, इसके लिए नगर निगम द्वारा अनेक ठोस कदम उठाये जा रहे है. निगम द्वारा अपने शिकायत प्रकोष्ठ में आने वाली शिकायतों के निस्तारण में और तेजी लायी गयी है. गत 15 नवंबर से 24 फरवरी तक सफाई, पानी, सीवर व बिजली संबंधी कुल 3550 शिकायतें दर्ज की गयी, इनमें से 3470 शिकायतों का निस्तारण कर दिया गया है केवल 80 शिकायतों का निस्तारण बाकि है.
उन्होंने बताया कि स्मार्ट सिटी सहारनपुर को ईज़ ऑफ लिविंग में सिटीजन फीडबैक का लक्ष्य 7862 दिया गया था. इसके विपरीत जनता के सहयोग से स्मार्ट सिटी सहारनपुर ने 10,175 का आंकड़ा छूते हुए 130 प्रतिशत का लक्ष्य हासिल कर लिया है और अभी ये फीडबैक जारी है. उन्होंने कहा सहारनपुर आज पूरी तरह लोगों के रहने के लिए एक बेहतरीन शहर है. यहां शुद्ध पेयजल, बिजली आपूर्ति, वायु गुणवत्ता, पर्यावरण, सड़कें और सुरक्षा विशेषकर महिला सुरक्षा की स्थिति अन्य शहरों के मुकाबले बहुत बेहतर है. शहर के रायवाला, नेहरु मार्किट, चौक फव्वारा, भगतसिंह चौक सहित अनेक चौराहों व तिराहों और सार्वजनिक स्थानों पर एक हज़ार कैमरे लगवाये जा रहे है ताकि किसी के साथ कोई भी छेड़छाड़ की घटना होने पर संबंधित व्यक्ति को चिन्हित कर उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सके.
नगरायुक्त ने बताया कि भू- जलस्तर को ऊंचा उठाने के लिए निगम क्षेत्र के सभी 143 तालाबों की खुदाई करायी जायेगी. करीब दो दर्जन तालाबों की खुदाई कराकर उन्हें तैयार कर दिया गया है. जिन तालाबों पर अवैध कब्जे या अतिक्रमण थे उन्हें हटवाया जा रहा है. इसके अलावा वाटर हार्वेस्ंटिंग के लिए सभी सरकारी स्कूलों में वाटर सिस्टम बनवाया जा रहा है.
एक सवाल के जवाब में नगरायुक्त ने बताया कि निगम परिसर में आईसीसीसी ( इंटेग्रेेटेड कमांड कंट्रोल सेंटर ) का भवन बनकर लगभग तैयार हो गया है. इससे यहीं से बैठकर ये देखा जा सकेगा कि कहां कूड़ा जमा है, कहां से उठान नहीं हुआ है, शहर में कहां जाम की स्थिति है, उसका विकल्प क्या करना है, कहां ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन हो रहा है, इस सबका पता यहीं बैठकर लग सकेगा. इससे चोरी की घटनाओं पर भी अंकुश लग सकेगा. उन्होंने बताया कि कैमरों के लिए टेंडर हो गया है, भवन भी तैयार है, करीब तीन महीने में यह चालू हो जायेगा.
एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि स्मार्ट सिटी के अंतर्गत दाल मंडी, सब्जी मंडी व पुल जोगियान के चौड़ीकरण का प्रस्ताव है. दिल्ली रोड की तरह 26 किमी. सड़क स्मार्ट रोड के रुप में विकसित की जा रही है. इसमें सड़कों का चौड़ीकरण भी होगा, बीच में जो भी अतिक्रमण होगा उसे हटाया जायेगा. इसके लिए एक सात सदस्य कमेटी गठित कर दी गयी है जिसमें सहायक नगरायुक्त, प्रवर्तनदल प्रभारी सहित अन्य अधिकारी शामिल हैं. उन्होंने बताया कि पार्किंग के लिए जहां रायवाला, जुबली पार्क व अंबाला रोड पर मल्टीलेवल पार्किंंग बनवाये जाने का प्रस्ताव है वहीं जिला अस्पताल के पीछे तथा जनमंच के निकट वैंडिंग जोन बनाये जा रहे हैं.
डेयरियों को जाना होगा बाहर-
नगरायुक्त ज्ञानेन्द्र सिंह ने कहा कि सभी डेरियों को शहर से बाहर जाना ही पड़ेगा. ग्रीन ट्रिब्यूल, हाईकोर्ट के आदेश के अलावा सर्वसम्मति से निगम बोर्ड भी यह प्रस्ताव पारित कर चुका है. उन्होंने एक वीडियो दिखाते हुए बताया कि डेरियों का गोबर नालियो में बह रहा है. इलाहीपुरा व ढमोला में गोबर नालियों में बहता हुआ देखा जा सकता है जिससे शहर में बीमारियां फैलने का खतरा हर समय बना रहता है. उन्होंने बताया कि हमने डेरी संचालकों से कहा है कि वे स्थान चिन्हित कर लें, वहां बिजली, पानी आदि मूलभूत सुविधाएं नगर निगम व प्राधिकरण उपलब्ध करायेगा. नगरायुक्त ने एक सवाल के जवाब में बताया कि कल डेरी हटाने गयी निगम की टीम के कार्य में हस्तक्षेप करने वाले दो डेरी मालिकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया गया है. अभी तक सात लोगों के खिलाफ मुकदमें दर्ज कराये जा चुके हैं.
बीच बहस में-नगरायुक्त महोदय से एक सवाल
नगर निगम ने स्मार्ट सिटी बनाने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए डेरियो को शहर से बाहर करने का मन बना लिया है और इसके लिए वह काम भी कर रहा है. नगर आयुक्त ने यह माना है कि डेयरियों से नाली में बहने वाले गोबर के कारण बीमारियां जन्म लेती हैं लेकिन स्मार्ट सिटी को स्मार्ट पलीता लगाते हुए सूअर सड़कों पर देखे जा सकते हैं जो ना केवल भयंकर बीमारियों को दावत देते हैं बल्कि एक्सीडेंट के भी बहुत बड़े कारक है. सूअरों को मच्छर काटने के बाद जब इंसान को काटते हैं तो वह भयानक बीमारी के रूप में तब्दील हो जाते हैं. इसके ऊपर सरकार हजारों करोड रुपए खर्च भी करती है. लेकिन वह सिर्फ और सिर्फ प्रचार में करती है. ऐसे में सवाल यह है कि क्या डेरी के साथ साथ सूअर पालन के उद्योग को और आवारा सड़कों पर घूम रहे सूअरों को बेड़े में शामिल करने के लिए कोई कोशिश की जाएगी.

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