बहुत खराब से हमरो बेटी के साथ करलको. बड़ी खराब मारलको. इकरा फांसी दे दो.
दुमका/झारखंड.बहुत खराब से हमरो बेटी के साथ करलको. बड़ी खराब मारलको. इकरा फांसी दे दो. यह करूण पुकार थी एक मां की जिसकी 6 साल की बच्ची अपने ही चाचा और उसके दोस्तों की हवस का शिकार हो गयी. इतना ही नहीं दरिंदों ने दरिंदगी की सीमाओं को पार कर उस नन्हीं सी जान को मौत के घाट उतार दिया.
झारखंड के दुमका में 6 साल की नन्ही बच्ची के बलात्कारी हत्यारों को अदालत ने नज़ीर लिखते हुए महज़ 3 दिन के अंदर फांसी का फरमान सुना दिया.कोर्ट ने मिठू राय, पंकज मोहली और अशोक राय को अपहरण गैंगरेप और हत्या का दोषी पाया और आईपीसी की धारा 366,376 ए,376 डी, 302, 201/34 के तहत 3दिन में सुनवाई पूरी कर फैसला सुनाया.
उपरोक्त तीनो नाम वो हैं जिन्होंने दरिंदगी की हदों को पार कर 6 साल की बच्ची से गैंगरेप के बाद उसकी हत्या कर शव को छिपा दिया था. पोक्सो एक्ट के विशेष न्यायाधीश तौफीक उल हसन ने महज 3 दिन में सुनवाई पूरी की और चौथे दिन ऐतिहासिक पर फैसला सुना दिया.
सरस्वती पूजा पर अपने चाचा और उसके दो साथियों के साथ मेला देखने गयी नन्ही सी बच्ची को नही मालूम था कि वो अपने जीवन के आखिरी सफर पर जा रही थी. तीनों दरिंदों ने उसके साथ सामुहिक दुष्कर्म और यौनाचार के बाद उसकी हत्या कर दी. फिर हत्या को साक्ष्य छिपाते हुए शव को खेत की मेड़ पर दबा दिया. 5 फ़रवरी को हुई इस घटना के बाद 7 फ़रवरी 2020 यानी दूसरे दिन बच्ची की बॉडी बरामद हुई थी.
पिता ने बयान दिया फिर मिठू राय, पंकज मोहली और अशोक राय को पुलिस ने उठा लिया. पुलिस की सख्ती को तीनों झेल नही पाए और अपना गुनाह कुबूल लिया.
न्यायाधीश तौफ़ीक़ उल हसन ने मामले को रेयरेस्ट ऑफ रेयर माना और तीनों को समाज और परिवार के लिए घातक मानते हुए फांसी पर लटकाने का आदेश दिया.
कोर्ट ने तय की सज़ा
महज़ 3 दिन में सुनवाई पूरी कर चौथे दिन सजा का ऐलान करने वाली कोर्ट ने तीनों आरोपियों की सज़ा का ऐलान किया. फैसले के अनुसार
- धारा 366 में 10 साल सश्रम का कारावास और ₹15000 जुर्माना, जुर्माना ना देने की स्थिति में 2 साल का अतिरिक्त कारावास
- आईपीसी की धारा 376 डीबी में भी सजा-ए-मौत 50- 50 हजार रुपए का जुर्माना,जुर्माना न देने की दशा में 5 साल की अतिरिक्त सजा
- आईपीसी की धारा 302 में टू बी हैंग टिल डेथ यानी सजा-ए-मौत और पचास पचास हजार रुपए जुर्माना, जुर्माना न देने पर 5 साल की अतिरिक्त सजा,
- आईपीसी की धारा 201/ 34 में नन्ही बच्ची की हत्या के बाद साक्ष्य छुपाने के अपराध में 7-7 साल की कैद तथा
- पोक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत तीनों को आजीवन कारावास की सजा यानी मृत्यु होने तक एवं पच्चीस पच्चीस हजार जुर्माना, जुर्माना की राशि न भरने की स्थिति में 5 साल तक अतिरिक्त सजा.
पूरे मामले पर फैसला देने से पहले जज मोहम्मद तौफीक उल हसन ने बच्ची के परिवार वालों से मुलाकात की. उन्होंने बच्ची के परिवार वालों से दोषियों के लिए सजा के बारे में जानना चाहा, इस पर परिवार के सभी सदस्यों ने एक साथ तीनों के लिए फांसी की मांग की. न्यायालय का यह आदेश आने वाले समय में देश के लिए नजीर बनेगा और उम्मीद है कि इस तरह के अपराधियों में अदालत का खौफ भी होगा.

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