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LAW: जानें,कब और कैसे बना निर्भया के दोषियों की फांसी को टालने वाला कानून

Prakash k pandey

नई दिल्ली. निर्भया केस के चारों दोषियों को कुछ दिन का अभयदान पटियाला हाउस कोर्ट से फिर से मिल गया. पटियाला हाउस कोर्ट में दोषी पवन की दया याचिका के चलते फांसी पर रोक लगाने का निर्णय दिया और चारों दोषी तीसरी बार भी फांसी से बच गए.

वह कानून जिसके चलते टल गई फांसी

दरअसल, दोषियों के वकील ने पटियाला हाउस कोर्ट को दया याचिका पेंडिंग होने की जानकारी देते हुए कहा कि ऐसी स्थिति में फांसी संभव नहीं है. वकील ने तर्क दिया कि नियम के तहत अगर राष्ट्रपति दया याचिका को खारिज कर दें, तब भी दोषी को 14 दिन का वक्त दिया जाता है. दया याचिका के खारिज होने के बाद 14 दिन का वक्त मिलने के पीछे सुप्रीम कोर्ट का 2014 का निर्देश है जिसमें शत्रुघन चौहान बनाम यूनियन ऑफ इंडिया के मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने मौत की सजा पाने वाले कैदी को मानसिक रूप से तैयार रहने के लिए कम से कम 14 दिन का समय देने की बात कही थी. यही वह आधार है जिसके चलते राष्ट्रपति द्वारा दया याचिका खारिज होने के बाद भी 14 दिन का वक्त दोषी को दिया जाता है.

तो ऐसे गिने जाते हैं 14 दिन

राष्ट्रपति दया याचिका खारिज करने के बाद अगर 14 दिन की गिनती की बात की जाए तो यहां यह जान लेना जरूरी है कि पवन की दया याचिका खारिज हो चुकी है. ऐसे में 2 मार्च को आधार माना जाएगा और 2 मार्च से ही 14 दिन का वक्त गिना जाएगा, जब इनको फांसी दी जाएगी.

कानून का खूब फायदा उठा रहे हैं निर्भया के वकील

निर्भया की मां ने दोषियों को मिल रहे कानूनी लाभ के लिए उनके वकील पर टिप्पणी की. निर्भया की मां ने कहा कि दोषी कानून का पूरा फायदा उठा रहे हैं. गौरतलब है कि इस मामले में तीन बार दोषियों के लिए डेथ वारंट जारी हो चुका है.

  • पहली बार डेथ वारंट 7 जनवरी को जारी हुआ था जिसके मुताबिक 22 जनवरी की सुबह 7:00 बजे फांसी दे देनी तय हुई थी लेकिन ऐसा ना हो सका.
  • दूसरा डेथ वारंट 17 जनवरी को जारी हुआ जिसके अनुसार 1 फरवरी की सुबह 6:00 बजे फांसी देने का आदेश कोर्ट ने दिया था लेकिन 31 जनवरी को कोर्ट में अनिश्चित काल के लिए फांसी को टाल दिया.
  • फिर तीसरा डेथ वारंट 17 फरवरी को जारी हुआ जिसके अनुसार 3 मार्च की सुबह 6:00 बजे फांसी का आदेश दिया गया था लेकिन दोषी पवन की दया याचिका पेंडिंग होने के चलते फिर से चारों दोषियों को कुछ समय के लिए अभयदान मिल गया है. न्यायालय ने अग्रिम आदेश तक फांसी पर रोक लगा दी है.

क्या थी घटना

16-17 दिसंबर 2012 की रात को दिल्ली की मुनिरका बस स्टैंड पर पैरा मेडिकल की छात्रा अपने दोस्त के साथ चढ़ी थी जिसमें पहले से ही 6 लोग सवार थे. किसी बात को लेकर छात्रा के दोस्त और बस स्टाफ के बीच में विवाद हो गया जिसके चलते छात्रा से गैंगरेप किया गया है.ना केवल छात्रा के दोस्त के साथ मारपीट की गई बल्कि छात्रा निर्भया के साथ दरिंदगी की सारी सीमाएं पार कर दी गई थी. जिसके 13 दिन बाद निर्भया ने सिंगापुर में दम तोड़ दिया था.

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