लखनऊ. उत्तर प्रदेश सरकार ने कोरोना वायरस के संक्रमण के समय में उद्योग धंधे को बचाने के मकसद से कई कदम उठाए हैं. सरकार ने एमएसएमई के तहत 2000 करोड़ की लोन राशि भी छोटे व्यापारियों को बांटी थी. इसी कड़ी में एक कदम आगे बढ़ते हुए प्रदेश सरकार ने अब स्टार्टअप फंड का शुभारंभ कर दिया है जिसके तहत आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सीडबी को पन्द्रह करोड़ रुपये की पहली किस्त भी सौंप दी है.
उत्तर प्रदेश सरकार और भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) के बीच स्टार्टअप फंड को लेकर समझौता हुआ है. केंद्र सरकार ने जिस नए पैकेज की घोषणा की है उसके आधार पर कार्रवाई को आगे बढ़ा दिया गया है.
प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज स्टार्टअप फंड का शुभारंभ किया. उन्होंने 15 करोड की पहली किस्त सिडबी को सौंपते हुए कहा कि
“इस समय बड़ी संख्या में प्रवासी कामगारों श्रमिक उत्तर प्रदेश में वापस आए हैं, ऐसे में हमें उनकी स्किल के अनुसार उन को रोजगार उपलब्ध कराना है. इससे ना सिर्फ उनकी समस्याओं का समाधान होगा बल्कि उनकी ऊर्जा और प्रतिभा का लाभ यू पी के माध्यम से पूरे देश को मिलेगा.
सुबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने कालिदास मार्ग पर आयोजित कार्यक्रम में कहा कि
” कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा व अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए एक नई स्टार्टअप नीति प्रदेश में बने ताकि युवा जुड़ सकें और जॉब की संभावनाओं को बल मिल सके. एमएसएमई के लिए केंद्र सरकार ने जिस नए फंड की घोषणा की है उसके आधार पर कार्रवाई को आगे बढ़ा दिया गया है. एक बड़ा ऑनलाइन मेला आयोजित कर उद्यमियों को लोन दिया जा चुका है.”
मुख्यमंत्री ने युवाओं को नए स्टार्टअप लगाने की सलाह देते हुए कहा कि
“किसी भी अच्छे काम को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए समय पर फैसला लेना जरूरी होता है वरना एक बड़ा वर्ग योजनाओं के लाभ से वंचित रह जाता है. समय पर यदि सही निर्णय लेकर काम शुरू कर दिया जाए तो बहुत सारे लोगों के जीवन को एक नई दिशा दी जा सकती है. हमारी नई स्टार्टअप नीति आ रही है और इससे युवाओं को अपना स्टार्टअप लगाने के लिए प्रेरित कर सकते हैं.”
मुख्यमंत्री के स्टार्टअप फंड का शुभारंभ करने के बाद से अब योग्यता के आधार पर रोजगार मिलने की संभावनाएं बढ़ गई है.








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