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सरकार ने 12 करोड़ लोगों की नौकरी बचाने के लिए किया फैसला, कर दिया यह बड़ा काम, जानिए

नई दिल्ली. कोरोनावायरस महामारी के चलते करोड़ों नौकरियों पर संकट के बादल छाए हुए हैं. सरकार ने इन नौकरियों को बचाने के लिए एमएसएमई के 3 लाख करोड़ वाले ऋण पैकेज पर मोहर लगा दी है.
कोरोना वायरस के चलते सबसे ज्यादा प्रभावित सूक्ष्म लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) में काम करने वाले तकरीबन 12 करोड लोगों की नौकरी पर संकट के बादल थे. अब सरकार ने बुधवार को 9.25 फ़ीसदी की रियायत दर पर तीन लाख करोड रुपए का अतिरिक्त ऋण उपलब्ध कराने की योजना को अपनी मंजूरी दे दी है.

क्या है योजना

एमएसएमई क्षेत्र को यह कर्ज आपात ऋण सुविधा गारंटी योजना (ईसीएलजीएस) के तहत दिया जाएगा. एमएसएमई को तीन लाख करोड़ की यह आपात ऋण सुविधा केंद्र सरकार द्वारा घोषित 21 लाख करोड़ रुपए के पैकेज में शामिल दूसरी सबसे बड़ी घोषणा है.
यह लोन पात्र एमएसएमई और मुद्रा योजना के तहत कर्ज लेने वालों को दिया जाएगा और कर्ज गारंटी शुदा आपात ऋण सुविधा के तहत उपलब्ध कराया जाएगा जिसकी नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी 100 फ़ीसदी गारंटी कवर देगी. भारत सरकार इसके लिए 41600 करोड रुपए का कोष उपलब्ध कराएगी. यह कोष चालू वित्त वर्ष के साथ अगले 3 वर्षों के लिए उपलब्ध होगा.

कब तक मिलेगा योजना का फायदा

पीएम की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में योजना को मंजूरी देते हुए कहा गया कि (जीईसीएल) के तहत मंजूर सभी कार्यों पर यह योजना लागू होगी. इसकी अवधि को लेकर कहा गया की घोषणा के दिन से लेकर 31 अक्टूबर तक या फिर जब तक योजना के तहत तीन लाख करोड रुपए तक के कर्ज मंजूर होते हैं तब तक लागू रहेगी. अहम बात यह है इनमें से जो भी पहले होगा या योजना तब तक रहेगी. यहां यह जान लेना जरूरी है कि यह वित्त पोषण पूरी तरह से गारंटी शुदा आपात ऋण सुविधा के रूप में उपलब्ध कराया जाएगा.

कौन होंगे पात्र

एमएसएमई की पात्रता के संबंध में कहा गया है कि 100 करोड रुपए तक के सालाना कारोबारी वाली कंपनियां जिन पर 29 फरवरी को 25 करोड रुपए तक बकाया है, जो वित्तीय दबाव की दृष्टि से विशेष उल्लेख (एसएमए) तक दायरे में है यानी जिन के विरुद्ध खाता एनपीए नहीं घोषित किया गया था वही जीईसीएल वित्त पोषण के तहत योजना का लाभ उठाने के पात्र होंगे.

कितना मिलेगा ऋण

पात्र एमएसएमई को उनके 29 फरवरी 2020 को 25 करोड़ तक के बकाया के 20 फ़ीसदी तक ऋण दिया जा सकता है. इसके लिए एनपीसीजीटीसी द्वारा ऋण देने वाले संस्थान से कोई गारंटी शुल्क नहीं लिया जाएगा. इसके लिए 9.25 फीसदी ब्याज दर तय किया गया है. एनबीएफसी के लिए यह 14 फ़ीसदी होगा.
सरकार के इस ऐलान का एमएसएमई के कारोबारियों ने स्वागत किया है. आर्थिक मामलों के जानकारों ने इसे रोजगार बचाने का सबसे बड़ा जरिया मना है और नौकरी को लेकर आशंकित लोगों को विश्वास प्रदान करने वाला बताया है.

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Prakash Pandey

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