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जिस दवाई के लिए अमेरिका भारत पर दबाव डाल रहा था उसके बारे में एम्स के डायरेक्टर ने कही बड़ी बात, जानिए क्या है खास

नई दिल्ली.कोरोना के इलाज के लिए पूरी दुनिया के वैज्ञानिक और डॉक्टर कोशिश कर रहे हैं लेकिन अभी तक इसका कोई स्थाई इलाज मिल नहीं पाया. कुछ शोध से यह बात सामने आई कि मलेरिया रोधी दवाई हाइड्रोक्सीक्लोरोक्विन कोरोना के इलाज में इस्तेमाल की जाती है जिसके बाद आश्चर्यजनक रूप से इस दवाई की मांग पूरी दुनिया में बढ़ गई है. इसी को लेकर अमेरिका ने भारत पर दवाई देने का दबाव भी डाला था जिसके बाद भारत ने अपने पड़ोसी देशों समेत अमेरिका को भी दवाई सप्लाई करने के लिए हामी भर दी है.
लेकिन दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स के निदेशक डॉ रणदीप गुलेरिया मानते हैं कि इस दवाई से हर किसी का इलाज नहीं किया जा सकता. इसका कारण उन्होंने दवाई के द्वारा होने वाले नुकसान को भी माना है.
डॉ गुलेरिया ने एएनआई से बात करते हुए बताया कि कुछ लैब के आंकड़े बताते हैं हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन का कोरोनावायरस में कुछ प्रभाव हो सकता है लेकिन आंकड़े इतने मजबूत नहीं है. आईसीएमआर के विशेषज्ञों ने महसूस किया कि कोविड-19 रोगियों के संपर्क में आने वाले और मरीजों की देखभाल करने वाले स्वास्थ्य कर्मियों के लिए सहायक हो सकती है.
डॉ गुलेरिया कहते हैं हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन हर किसी के लिए एक इलाज नहीं है. इससे दिल की बीमारी हो सकती है और दिल की धड़कन भी बढ़ सकती है.अन्य दवाओं की तरह इस दवाई का भी दुष्प्रभाव है. यह आम जनता को फायदा पहुंचाने की वजह नुकसान पहुंचा सकती है.


उन्होंने जानकारी दी और कहा कि चीन और फ्रांस के अध्ययनों में हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन और एजिथ्रोमाईसिन का संयोजन गंभीर से मॉडरेट कोविड-19 मरीजों के लिए लाभकारी हो सकता है. लेकिन इस अध्ययन का डाटा इतना पक्का नहीं है क्योंकि कोई अन्य उपचार उपलब्ध नहीं है. इसलिए महसूस किया गया कि इसका उपयोग किया जाना चाहिए.

उन्होंने यह भी जानकारी दी और कहा कि हमें यह बात पता लगाने की आवश्यकता है कि एचसीक्यू और एजिथ्रोमाईसिन के संयोजन का उपयोग करने वाला इलाज कोविड-19 मामलों में प्रभावी है या नहीं. वहीं उन्होंने कहा कि कोरोनावायरस के मामलों में अधिक डेटा एकत्र किया जा रहा है.
फिर से यह सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर जब तक कोरोना का कोई प्रॉपर दवाई नहीं बन जाती तब तक इसको रोकने के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं. भारत सरकार ने सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क समेत सैनिटाइजेशन को अभी तक प्रयोग किया है.

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Prakash Pandey

1 Comment

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  • Homeopathy can help but our government n homeopathic council is not. Interested in this miracleous science.. And it’s very disappointed

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