मुख्य मार्गो से अप्रवासी श्रमिक पैदल यात्रा या फिर वाहनों के जरिए अपने घर जा रहे हैं. लेकिन अनियंत्रित वाहन अनायास ही बड़ी दुर्घटना को निमंत्रण दे देते हैं. पुलिस का वाहनों की गति पर नियंत्रण नही होने से बढ़ रहा हौसला.
सहारनपुर : लॉक डाउन के बाद भी सड़क दुर्घटनाओं को रोक पाना संभव नहीं हो पाया. प्रदेश भर में अप्रवासी श्रमिकों के साथ आए दिन बड़ी दुर्घटनाएं हो जाती हैं जिसके चलते बहुत से श्रमिक अनायास ही काल के गाल में समा गए. अप्रवासी श्रमिकों की अब तक हुई दुर्घटनाओं का कारण एकमात्र वाहनों की अनियंत्रित गति रहा जिस पर लगाम लगाने में पुलिस नाकाम भी रही है. मुख्य मार्गो से लेकर शहर तक में अक्सर वाहन चालकों को तेज गति में वाहन चलाते हुए देखा जा सकता है जो बड़ी दुर्घटनाओं को निमंत्रण देते हैं.
बावजूद इसके पुलिस व आरटीओ विभाग इस पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है.खासतौर से देखने में आया है यह प्रवासी श्रमिकों के सबसे ज्यादा आवागमन वाले मार्गों जिसमें देहरादून मुजफ्फरनगर हाईवे के अलावा सहारनपुर अंबाला हाईवे सबसे प्रमुख मार्ग है. हजारों की संख्या में प्रवासी श्रमिक पैदल या विभिन्न वाहनों से सफर कर रहे हैं. इन परिस्थितियों में यदि इन मार्गों पर बड़े ट्राले और दूसरी तरह के भारी वाहन अनियंत्रित गति से सड़क पर सड़कों पर दौड़े तो इस संभावना से इंकार कर नहीं किया जा सकता कि किसी ना किसी दिन कोई बड़ा हादसा हो सकता है. इसमें प्रशासन की जवाबदेही बन जाएगी. अंबाला सहारनपुर मुजफ्फरनगर हाईवे पर किसी भी वक्त इन भारी वाहनों को तेज गति से दौड़ते देखा जा सकता है. अभी कुछ ही दिन बीते मुजफ्फरनगर में 6 प्रवासी श्रमिकों को अपने जीवन से हाथ धोना पड़ा . एक अनियंत्रित बस ने श्रमिकों को रौंद दिया जिसमें 6 की तत्काल मृत्यु हो गई और चार गंभीर रूप से घायल हो गए.
इतना ही नहीं शहर में प्रवेश करने के बावजूद भी इनकी गति में कोई कमी नहीं आती. हाईवे की तो बात ही अलग है. प्रशासन ने यदि ऐसे वाहन चालकों पर सख्ती के साथ रोक नहीं लगाई तो इसका खामियाजा न जाने अपने घरों की और पहुंचने की आस में किन श्रमिकों या अन्य को भुगतना पड़े इसका अनुमान नहीं लगाया जा सकता. पिछले तीन-चार दिनों में यूपी व अन्य राज्यों में अप्रवासी श्रमिकों के साथ हो रही बड़ी बड़ी दुखद घटनाएं इसका सबसे बड़ा उदाहरण है.
औरैया में हुआ सड़क हादसा अभी अधिक पुराना नहीं हुआ है. हालांकि प्रदेश सरकार ने दो थानाध्यक्षों पर इस विषय में कार्रवाई की और उन्हें तत्काल सस्पेंड कर दिया. भारी वाहनों को छूट देने का मतलब यह नहीं कि उनके चालक इन्हें दूसरों की जान की परवाह न करते हुए मनमानी गति से दौड़ाए. आबादी वाले क्षेत्रों में में भी चालकों की मनमानी प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहीहै ?
(Story idea: senior journalist ram bhagat walia)









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