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बोल वचन खास

Special for tex payers@ अपनी इनकम के हिसाब से खुद ही अपना टेक्स लगाइये, जानिए कितने इनकम पर कितना देना होगा टेक्स

नयी दिल्ली : आम बजट 2020, 1 फ़रवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जब संसद के पटल पर रखा तो देश को बहुत उम्मीदें थी, खास तौर पर टैक्सपेयर्स को. नए इनकम टैक्स को लेकर लोग उत्साहित भी थे लेकिन जैसे जैसे अब बजट समझ मे आ रहा है उत्साह भी मंद पड़ रहा है. टैक्स के दो स्लैब ने पेयर्स की चिंता को बढ़ा दिया है. दोनों का अंतर समझ पाना कठिन है. एक्सपर्ट भी इसके प्रयोग को लेकर एक राय नही हैं. कुछ इसे टैक्स का बोझ बढ़ाने वाला जबकि कुछ इसे टैक्स का बोझ घटने वाला बता रहे है. एक बात राहत देने वाली है कि दोनों टैक्स सिस्टम में पांच लाख तक की आय पर टैक्स नहीं लगेगा. अगर इससे एक रुपये भी ज्यादा होता है, तो 2.5 लाख से पांच लाख की आय पर पांच फीसदी टैक्स की गणना होगी. यहां दो बातें बेहद महत्वपूर्ण हैं. पुराने सिस्टम में टैक्स रेट ज्यादा है, लेकिन छूट की सुविधा है. लेकिन नए सिस्टम में छूट को समाप्त कर दिया गया है.

छूट का पुराना सिस्टम: सेक्शन 80सी के तहत 1.5 लाख तक, अगर होम लोन लिया है तो इंट्रेस्ट पर 2 लाख तक, होम लोन के प्रिंसिपल अमाउंट पर 1.5 लाख तक (जो सेक्शन 80सी में आता है), मेडिकल इंश्योरेंस पर सेक्शन 80डी के तहत 50 हजार रुपये की छूट मिलती है. इसके अलावा 5 लाख तक आय पर 12500 रुपये रिबेट मिलती है. इसके अलावा और भी कई छूट हैं.जो फायदे मंद है.
अब इसको कमाई के हिसाब से लेकर तुलना करते हैं, जिससे आपको तय करने में आसानी रहेगी कि कौन सा सिस्टम आपके लिए बेहतर है.

यदि आप प्रतिवर्ष 6 लाख तक कमाई करते हैं तब

पुराना सिस्टम : अगर किसी की आय 6 लाख है, तो 5 लाख से ऊपर की आय यानी एक लाख पर आयकर अधिनियम के अनुसार उपलब्ध छूट का क्लेम लेने पर उसे कोई भी टैक्स नहीं देना होगा, क्योंकि एक लाख की छूट लेने के बाद उसकी करयोग्य आय पांच लाख रह जाती है और टैक्स स्लैब के अनुसार पांच लाख तक की करयोग्य आय पर कोई कर नहीं लगता है. करदाता 80सी के तहत डेढ़ लाख रुपये तक की छूट का क्लेम कर सकता है.

नया सिस्टम : इसके तहत करदाता को 2.5 लाख से 5 लाख पर 5 पर्सेंट के हिसाब से 12500 रुपये, बाकी एक लाख पर 10 पर्सेंट के हिसाब से दस हजार रुपये और सेस चुकाने होंगे.

टैक्स की कुल राशि 12500+10000= 22500 रुपये और 4 पर्सेंट सेस (900) के साथ कुल टैक्स 23400 रुपये बनता है. नये सिस्टम में टैक्स की देनदारी 23400 रुपये बनती है.

यदि आप 9 लाख रुपये सालाना कमाते है तब

पुराना सिस्टम : यदि आपकी कमाई 9 लाख सालाना है और अगर आप आयकर अधिनियम के तहत उपलब्ध विभिन्न प्रकार की छूट जैसे स्टैंडर्ड डिडक्सन 50 हजार, 80सी के तहत 1.5 लाख, होम लोन के ब्याज पर 2.0 लाख, एनपीएस पर 50 हजार, हेल्थ इंश्योरेंस पर 50 हजार यानी कुल 5 लाख की छूट लेते हैं, तो उसके करयोग्य आय 4 लाख पर कोई कर आपको नही देना होगा.

नया सिस्टम : 2.5 लाख रुपये टैक्स फ्री है.
2.5-5 के 2.5 लाख पर 5% की दर से 12,500 रुपये टैक्स.
5 से 7.5 लाख तक के 2.5 लाख पर 10% की दर से 25,000 रुपये टैक्स.
7.5 से 9 लाख तक के 1.5 लाख पर 15% की दर से 22,250 रुपये टैक्स.
कुल टैक्स 12,500 + 25,000 + 22,250 =60,000 रुपये. चार फीसदी सेस (2400 रुपये) के बाद कुल टैक्स 62400 रुपये होगा.

अगर आपकी कमाई 11 लाख रुपये सालाना है तब

पुराना सिस्टम : अगर आपकी कमाई 11 लाख रुपया सालाना है और अगर आप आयकर अधिनियम के तहत उपलब्ध विभिन्न प्रकार के छूट जैसे स्टैंडर्ड डिडक्सन 50 हजार, 80सी के तहत 1.5 लाख रुपये, होम लोन के ब्याज पर 2.0 लाख और एफोर्डेबल हाउसिंग के तहत 1.5 लाख, एनपीएस पर 50 हजार, हेल्थ इंश्योरेंस पर 50 हजार यानी कुल 6.5 लाख तक की छूट क्लेम कर लेते हैं, तो आपकी करयोग्य आय 4.5 लाख रुपये होगी. चूंकि यह आय पांच लाख से नीचे है, इसलिए आपको कोई कर नहीं देना होगा.

नया सिस्टम

2.5 लाख तक कोई टैक्स नहीं देना होगा
2.5 लाख से 5 लाख तक 5 पर्सेंट के हिसाब 12500 रुपये.
5-7.5 लाख तक 2.5 लाख पर 10 पर्सेंट के हिसाब से 25000 रुपये.
7.5-10 लाख तक 2.5 लाख पर 15 पर्सेंट के हिसाब से 37500 रुपये.
10-11 लाख तक 1 लाख पर 20 पर्सेंट के हिसाब से 20000 रुपये.
कुल टैक्स का बोझ
12500+25000+ 37500
+20000=95000 रुपये. चार पर्सेंट सेस (3800 रुपये) के बाद कुल टैक्स की राशि 98800 रुपये बनती है.

अगर आपकी सालाना कमाई 13 लाख तक है तब

पुराना सिस्टम

पिछले उदाहरण को आधार मानते हुए अगर आप 6.5 लाख तक की छूट का क्लेम कर लेते है, तो आपकी कर योग्य आय 6.5 लाख होगी. अब यहां आपको 2.5 लाख पर कोई कर नहीं देनी होगी, लेकिन 2.5 से 5 लाख तक की करयोग्य आय पर 5 प्रतिशत की दर से टैक्स लगेगा, जो 12500 रुपये होगा. इसके बाद बचे 50 हजार पर 20 प्रतिशत के हिसाब से 4000 रुपये टैक्स लगेगा यानी कुल टैक्स 16500 और साथ में 4 प्रतिशत सेस यानी 660 रुपया जोड़ कर 17160 रुपया टैक्स की देनदारी बनेगी.

नया सिस्टम

2.5 लाख तक कोई टैक्स नहीं देना होगा. 2.5 लाख से 5 लाख तक 5 पर्सेंट के हिसाब 12500 रुपये. 5-7.5 लाख तक 2.5 लाख पर 10 पर्सेंट के हिसाब से 25000 रुपये. 7.5-10 लाख तक 2.5 लाख पर 15 पर्सेंट के हिसाब से 37500 रुपये. 10-12.5 लाख तक 2.5 लाख पर 20 पर्सेंट के हिसाब से 50000 रुपये. 12.5-13 लाख तक 50 हजार पर 25 पर्सेंट के हिसाब से 12500 रुपये.
कुल टैक्स का बोझ 12500+25000+37500+50000+12500=137500 रुपये. चार पर्सेंट सेस (5500 रुपये) के बाद कुल टैक्स की राशि 143000 रुपये बनती है.

अगर आप 16 लाख रुपये सालाना कमा लेते हैं तब

पुराना सिस्टम

पिछले उदाहरण को आधार मानते हुए अगर आप आयकर अधिनियमों के तहत मिलने वाले विभिन्न छूट के विकल्पों से 6.5 लाख रुपये तक की छूट प्राप्त कर लेते हैं, तो आपकी करयोग्य आय 9.5 लाख होगी. अब इसमें 2.5 लाख की छूट के बाद 2.5 लाख से 5 लाख की आय पर 5% यानी 12500 रुपया और फिर शेष बचे 4.5 लाख पर 20 प्रतिशत के हिसाब से 90 हजार रुपये टैक्स लगेगा. यानी कुल टैक्स 1,02,500 रुपये के साथ 4% सेस 4100 रुपये जोड़ कर 1,06,600 रुपये की टैक्स देनदारी होगी.

नया सिस्टम

2.5 लाख तक कोई टैक्स नहीं देना होगा. 2.5 लाख से 5 लाख तक 5 पर्सेंट के हिसाब 12500 रुपये. 5-7.5 लाख तक 2.5 लाख पर 10 पर्सेंट के हिसाब से 25000 रुपये. 7.5-10 लाख तक 2.5 लाख पर 15 पर्सेंट के हिसाब से 37500 रुपये. 10-12.5 लाख तक 2.5 लाख पर 20 पर्सेंट के हिसाब से 50000 रुपये. 12.5-15 लाख तक 2.5 लाख पर हजार पर 25 पर्सेंट के हिसाब से 62500 रुपये. 15-16 लाख तक 1 लाख पर 30 पर्सेंट के हिसाब से 30000 रुपये. कुल टैक्स का बोझ 12500+25000+37500+50000+62500+30000=217500 रुपये. चार पर्सेंट सेस (8700 रुपये) के बाद कुल टैक्स की राशि 226200 रुपये बनती है.

टैक्स देने से पहले यह जान लेना आपके लिए जरूरी है

पुराने सिस्टम में छूट और इन्वेस्टमेंट पर आप लाभ ले सकते हैं जबकि
नये सिस्टम में करदाताओं को किसी तरह की छूट का लाभ नही मिलने वाला है.
एक बात दोनो स्लैब में एक जैसी है कि दोनों टैक्स सिस्टम में पांच लाख तक इनकम पर किसी तरह का टैक्स आपको नही देना होगा.

क्या कहते हैं टैक्स एक्सपर्ट्स

बजट को लेकर टेक्स एक्सपर्ट्स इन्वेस्टमेंट करने वालों के लिये पुराने टैक्स सिस्टम को ही बेहतर बताते हैं.

दबाव से बचाने के लिए नई व्यवस्था वैकल्पिक है- निर्मला सीतारमण


इस संबंध में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि करदाता ‘अचानक किसी दबाव में न पड़े’ इसलिए नयी व्यवस्था को वैकल्पिक रखा गया है. सरकार ने कर ढांचे को सरल बनाने का कदम उठाया है, लेकिन अचानक होने वाले बदलाव से करदाता दबाव में नहीं आयें और उन्हें नयी प्रणाली को समझने का समय मिले, इसलिए नयी और पुरानी दोनों व्यवस्थाओं का विकल्प रखा है.

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Prakash Pandey

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