- लॉकडाउन के दौरान हाईवे पर हो रहे हैं दर्दनाक हादसे
- प्रतिदिन तेज रफ्तार से चल रहे अनियंत्रित वाहन लील रहे हैं इंसानों की जिंदगी
- देशभर में कोरोना वायरस से 3720 लोगों की मौत हुई।
- सड़क हादसों में लगभग 440 लोगों की मौत हुई और 850 लोग घायल हुए
- सहारनपुर के पुलिस विभाग में तैनात आरक्षी ड्राइवर की गाड़ी को अज्ञात वाहन ने मारी टक्कर, उपचार के दौरान हुई दुखद मृत्यु
सुरेंद्र चौहान
सहारनपुर, पुलिस उपाधीक्षक सदर की सरकारी गाड़ी के आरक्षी चालक की सड़क हादसे में दुखद मौत ने असमय ही एक होनहार पुलिस कर्मी को हम से दूर कर दिया। बागपत जनपद के रहने वाले आरक्षी ड्राइवर श्री प्रविंद्र कुमार को गत दिवस सरकारी कार्य हेतु थाना फतेहपुर से वापिस लौटते समय अज्ञात वाहन ने उनकी गाड़ी में टक्कर मार दी।जिससे उपचार के दौरान उनकी मृत्यु होने से पुलिस विभाग मे शोक की लहर दौड़ गई थी। लाकडाउन के दौरान ही रामपुर मनिहारान कोतवाली मे तैनात हैड मोहर्रिर की भी सडक हादसे मे मौत हो गई थी ।सडक हादसों के दौरान देश मे प्रति दिन अनेक निर्दोष व्यक्ति काल के गाल मे समा रहे हैं जो एक गम्भीर विषय बनता जा रहा है। कोरोनावायरस के चलते लॉकडाउन के दौरान यह एक या दो घटनाएं नहीं है। इससे पहले भी देश के अलग-अलग हिस्सों से तेज गति से चल रहे वाहनों के अनियंत्रित होने से कई दुर्घटनाएं हो चुकी है और अलग-अलग जगहों पर कई प्रवासी मजदूर भी इन दुर्घटनाओं का शिकार हुए हैं। भूख की मार झेल रहे मजदूरों ने कभी सोचा भी नहीं था, कि अपने घरों को लौटते समय तेज गति से चल रहे वाहनों की चपेट में आकर अपनी जान गंवा बैठेंगे। प्रतिदिन वाहनों की तेज रफ्तार इंसानों जिंदगी लील रही है। हाईवे पर रोजाना दर्दनाक हादसे हो रहे हैं । कोरोना वायरस के चलते पूरे देश में लॉक डाउन हो गया। आवागमन के तमाम साधन बंद हो गए और देश की सड़कों पर सन्नाटा पसर गया। कुछ समय उपरांत जब जरूरत की वस्तुओं को लाने लेजाने हेतु मालवाहक वाहनों को अनुमति मिली। तो सुनसान बड़ी सड़कों पर वाहन चालकों ने तेज रफ्तार के साथ सफर तय करना शुरू कर दिया। और रफ्तार भी इतनी कि अचानक यदि कोई सामने आ गया तो चालक वाहन की गति पर नियंत्रण ही नहीं कर पाता। परिणाम स्वरूप सड़कों पर दर्दनाक हादसे होने लगे। सड़कों पर पैदल चल रहे कई प्रवासी मजदूर ऐसे वाहनों की चपेट में आकर काल का ग्रास बन चुके हैं। घर पहुंचने की आस लिए कई प्रवासी कामगार पैदल या अन्य साधनों से वापिस लौट रहे हैं। रास्ते में ही दुर्घटना का शिकार हुए मजदूरों की लाशें उनके घरों पर पहुंची। इसी दौरान एक शर्मनाक तस्वीर भी सामने आई, जिसमें दुर्घटना के शिकार हुए कुछ मजदूरों की लाशें बंद ट्रक में रख दी गई और दुर्घटना में घायल उनके साथियों को उसी बंद ट्रक में उनके घरों के लिए रवाना कर दिया। ट्रक में बैठे घायल मजदूरों की मनोस्थिति क्या रही होगी। यह सोच कर भी रूह कांप उठती है। इलाहाबाद में श्रमिकों को ले जा रही एक बस अनियंत्रित होकर पलट गई। जिसमें तीन श्रमिकों की मौके पर मौत हो गई और कई श्रमिक घायल हो गए। जिन्हें अस्पताल भेजा गया।
अयोध्या में भी एक सड़क हादसे में दो लोगों की मौत हो गई। सड़क पर खड़ी एक बस को पीछे से आ रही अनियंत्रित बस ने टक्कर मार दी।
गुजरात के सूरत से अपने घर लौट रहे बिजनौर जिले के 22 प्रवासी मजदूरों से भरी गाड़ी शुक्रवार को बुलंदशहर में अनियंत्रित होकर पलट गई। हादसे में दो मजदूरों की मौत हो गई और 20 मजदूर घायल हो गए। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में मुंबई से बिहार जा रहे 3 मजदूरों की डंपर से कुचलकर मौत हो गई। प्रतिदिन दिल को झझकोर देने वाली घटनाओं की खबर देश के कोने कोने से आ रही है।
हाईवे पर हो रहे दर्दनाक हादसों पर केंद्र व राज्य सरकारों को गंभीरता से लेना होगा और प्रतिदिन हो रही दुर्घटनाओं को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने होंगे।









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