New Delhi. 18 वर्षों से भी अधिक समय तक कांग्रेस के साथ रहने वाले माधवराव सिंधिया के पुत्र ज्योतिरादित्य सिंधिया ने आखिरकार अपने परिवार की परंपरागत पार्टी को ज्वाइन कर लिया. लगातार उपेक्षा का शिकार होने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस छोड़ने का मन बनाया और कल यानी 9 मार्च को पार्टी की सुप्रीमो सोनिया गांधी को अपना त्यागपत्र भेज दिया. इसके बाद से ही लगातार त्यागपत्र का दौर जारी है. अब तक तकरीबन 21 विधायकों ने सिंधिया के समर्थन में कांग्रेस के प्राथमिक सदस्यता से भी त्यागपत्र दे दिया है. इस्तीफा देने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सोनिया गांधी को पत्र लिखा और उसमें कहा है कि 18 वर्षों से कांग्रेस के प्राथमिक सदस्य रहे हैं, लेकिन अब राह अलग करने का वक्त आ गया है. यह पत्र कल यानी 9 मार्च का ही है. उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को अपना इस्तीफ सौंपा है.
पिछले कुछ दिनों से लगातार चर्चा में रही मध्य प्रदेश की राजनीति ने आखिरकार अपना रूप ले लिया है.कमलनाथ सरकार पर ग्रहण लग चुका है और सरकार गिरना तय माना जा रहा है. ऐसे में भाजपा शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में फिर से सरकार बना सकती है. ज्योतिरादित्य सिंधिया को पार्टी राज्यसभा भेजकर कैबिनेट में मंत्री बना सकती है.
मंगलवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की और इसके बाद कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने अपने इस्तीफे में लिखा कि मैं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे रहा हूं और जैसा कि आपको अच्छी तरह पता है कि पिछले एक साल से यह मार्ग प्रशस्त किया गया है. आज भी मैं अपने राज्य और देश के लोगों की रक्षा करने के अपने लक्ष्य और उद्देश्य पर अडिग हूं.
सिंधिया खानदान का भाजपा से है गहरा रिश्ता
ज्योतिरादित्य सिंधिया परिवार का भाजपा से गहरा रिश्ता है. ज्योतिरादित्य सिंधिया की दादी राजमाता विजयाराजे सिंधिया जंन संघ के समय से ही भाजपा से जुड़ी रही. ज्योतिरादित्य सिंधिया कि बुआ वसुंधरा राजे सिंधिया राजस्थान से मुख्यमंत्री रही. पिता माधवराव सिंधिया भी राजनीति के प्रथम चरण में भाजपा में ही रहे बाद में उन्होंने कांग्रेसी ज्वाइन कर ली थी. पिता के मृत्यु के पश्चात सन 2001 में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने गुना सीट से चुनाव लड़कर कांग्रेस की तरफ से लोकसभा में क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया था. तब से ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस के कर्मठ और वरिष्ठ नेताओं में शुमार किए जाते रहे
किरकिरी से परेशान कांग्रेस ने ज्योतिरादित्य पर चौतरफा हमला बोला
1 साल से चल रही इस उठापटक के बाद वरिष्ठ कांग्रेसी नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के पार्टी छोड़ने से कांग्रेस जहां असहज हो गई है. वही कांग्रेस में ज्योतिरादित्य पर जोरदार हमला बोला है. कांग्रेस महासचिव वेणुगोपाल ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को पार्टी से निकालने की बात कही है जबकि ज्योतिरादित्य ने खुद पार्टी से रिजाइन किया है. वही कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव ने सिंधिया की तुलना जयचंद और मीर जाफर से की है. उन्होंने ट्वीट किया कि आने वाला वक़्त अपने स्वार्थों के लिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं के 15 वर्षों तक किये गये ईमानदारी पूर्ण जमीनी संघर्ष के बाद पायी सत्ता को अपने निजी स्वार्थों के लिए झोंक देने वाले जयचंदों - मीर जाफरों को कड़ा सबक सिखाएगा.
लोकसभा में कांग्रेस के विपक्ष के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि पार्टी को बड़ा नुकसान हुआ है. पार्टी की हालत हमेशा एक जैसी नहीं होती…उतार-चढ़ाव तो लगा रहता है. बुरे वक्त में पार्टी का साथ छोड़ना ठीक नहीं है. मध्य प्रदेश में शायद अब हमारी सरकार नहीं रहेगी. उन्होंने आगे कहा कि ज्योतिरादित्य सिंधिया को पार्टी से निकाल दिया गया है. हमारे पास कोई दूसरा रास्ता नहीं था, पार्टी से गद्दारी करने वाले के साथ तो ऐसा ही करना पड़ेगा. कमलनाथ के मंत्री जीतू पटवारी का इशारों-इशारों में सिंधिया पर हमला किया है. उन्होंने ट्वीट किया-एक इतिहास बना था 1857 में झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई की मौत से, फिर एक इतिहास बना था 1967 में संविद सरकार से और आज फिर एक इतिहास बन रहा है…- तीनों में यह कहा गया है कि हां हम है….
भाजपा की बल्ले बल्ले
सिंधिया खानदान के चिराग ज्योतिरादित्य सिंधिया के बाद अब कांग्रेस से सिंधिया परिवार का कोई नाता नहीं रह गया है. ज्योतिरादित्य सिंधिया देर शाम भाजपा ज्वाइन कर लेंगे. उनके इस निर्णय से भाजपा के दोनों हाथ घी में हैं यानी कि खोई हुई जमीन वापस मिलने की तैयारी में है. कोई शक नहीं है कि कुछ दिनों में मध्यप्रदेश में फिर से भगवा ध्वज लहराएगा और भाजपा के अधिपत्य में मध्य प्रदेश फिर से शामिल हो जाएगा.



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