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लॉक डाउन में सिख युवक ने कर दिया ऐसा काम, एसएसपी से लेकर बड़े अधिकारियों ने की तारीफ़ और पब्लिक ने किया सलाम

-देवबंद के सिख युवक हरविंदर बेदी ने लॉक डाउन के दौरान जहरखुरानी गिरोह के शिकार हुए तमिलनाडु निवासी युवक को 45 दिनो तक अपने घर पर शरण देकर मानवता की मिसाल पेश की

-अधिकारियों के सहयोग से डेढ माह बाद युवक अब अपने घर लौटा

-ऐसे समय में जब लोग सम्बंधी को भी घर रखने में कतरा रहे है, एक अजनबी को सहारा देना बहुत बड़ी बात है, उनका यह कार्य दूसरों के लिए प्रेरणा देने वाला है : एसएसपी दिनेश कुमार पी

-हरविंदर लॉक डाउन के शुरू से ही जरूरतमंदों तक राशन पंहुचाकर सेवा कर रहे है, तमिलनाडु निवासी श्रवण को अपने घर शरण देकर उन्होंने सच्ची मानवता व सेवा भाव की मिसाल कायम की है, वे बधाई के पात्र है : एसडीएम देवबंद देवेंद्र कुमार पांडे

GAURAV SINGHAL

देवबंद/ सहारनपुर. देवबंद नगर के सिख युवक हरविंदर बेदी ने जहर खुरानी गिरोह का शिकार हुए तमिलनाडु के एक युवक श्रवण कुमार को लॉक डाउन के दौरान 45 दिनों तक अपने घर में शरण देकर मानवता की मिसाल पेश की है। अधिकारियों के सहयोग से डेढ माह बाद अब श्रवण अपने घर लौट पाया है। एसएसपी सहारनपुर दिनेश कुमार प्रभु ने यह मानवतापूर्ण कार्य करने के लिए सिख युवक हरविंदर बेदी की तारीफ की है।जानकारी के अनुसार कोरोना वायरस के प्रकोप के चलते देश में लॉक डाउन लगने से दो दिन पूर्व गुजरात के वाटर प्लांट में नौकरी करने वाला तमिलनाड़ु के जिला विरुधिनगर निवासी युवक श्रवण कुमार पुत्र कैलाश्वरी ट्रेन द्वारा अपने घर लौट रहा था कि जहरखुरानी गिरोह ने उसे अपना शिकार बनाते हुए नशीला पदार्थ सुंघाकर उसका सामान लूट लिया। बेसुध श्रवण को किसी ने देवबंद रेलवे स्टेशन पर उतार दिया। 26 मार्च को एसडीएम देवेंद्र कुमार पांडेय को युवक नगर के रेलवे रोड़ पर घूमता हुआ मिला था। नशे व बीमारी की हालत में लग रहे युवक ने एसडीएम को अपनी आपबीती सुनाई तो उन्होंने कर्मचारियों को रैन बसेरे में युवक की ठहरने की व्यवस्था कराने को कहा लेकिन तभी उधर से गुजर रहे हरविंदर बेदी ने जब युवक की बाते सुनी तो उन्हें युवक पर तरस आ गया। बेदी ने एस.डी.एम. से युवक को अपने घर पर शरण देने की इच्छा जताई तो एस.डी.एम. ने हामी भर दी। हरविंदर सिंह बेदी ने बताया कि जहरखुरानी गिरोह का शिकार होने के चलते श्रवण बेसुध हो गया था। वे पहले उसे सरकारी अस्पताल लेकर गए और चैकअप कराने के बाद उसे 14 दिनों तक घर के एक कमरे में अलग से क्वारंटाइन किया। युवक द्वारा दिए गये फोन नम्बर पर परिजनों से सम्पर्क किया तो उनके तमिल भाषा में बोलने के कारण उन्हें कुछ समझ नही आया। दो दिन बाद बीएसएफ दिल्ली में कार्यरत श्रवण के रिश्तेदार समय कुमार का फोन आया और उन्होंने श्रवण के बारे में बातचीत की लेकिन उसके वापिस लौटने की कोई व्यवस्था नही बन पाई। श्रवण की क्वारंटाइन अवधि पूरी होने के बाद बेदी ने अपने ड्राइंग रूम में श्रवण के ठहरने की व्यवस्था कर दी। बेदी के माता,पिता व पत्नी ने भी हरविंदर बेदी के इस काम में उनकी सहायता की और श्रवण को पारिवारिक सदस्य की तरह सम्मान दिया। एक मई को दोबारा लाकडाउन बढने की खबर सुनकर श्रवण अपसेट हो गया और उसकी तबीयत खराब हो गई। तब भी बेदी ने हिम्मत नही हारी और उसकी सेवा की। उन्होंने श्रवण को उसके माता पिता के पास भिजवाने के लिए नेट से नम्बर निकालकर चेन्नई में अव्वाई तमिल संगम ट्रस्ट के पूर्व महासचिव कृष्ण कुमार से श्रवण के बारे में बात की। बेदी ने बताया कि कृष्ण कुमार के प्रयासों से मामला एसएसपी सहारनपुर दिनेश कुमार पी की जानकारी में आया तो बड़प्पन दिखाते हुए एसएसपी श्रवण से मिलने खुद उनके घर आये और श्रवण को जल्द से जल्द घर भिजवाने का आश्वासन देते हुए उनका हौंसला बढाया। कार द्वारा दो हजार आठ सौ किलोमीटर का सफर तय करने के बाद श्रवण के परिजन 9 मई की रात को देवबंद पंहुचे और उसे बेदी ने श्रवण को उन्हें सौंप दिया। इस दौरान श्रवण को लेने आये उसके भाई व मामा की आंखे भर आई। हिंदी न जानने के कारण वे बेदी को कुछ कह तो नही पाये लेकिन भावनाओं से उन्हें धन्यवाद व दुआएं देकर लौट गये। इस दौरान एस.एस.पी. दिनेश कुमार पी भी बेदी से लगातार युवक की हालत के बारे में जानकारी लेते रहे। बेदी ने बताया कि परिजनों से मिलवाने के बाद उन्हें जीवन का सबसे बड़ा सुकुन व खुशी मिली है।सहारनपुर जनपद के एसएसपी दिनेश कुमार प्रभु का कहना है कि देवबंद के सिख युवक हरविंद्र बेदी ने लॉक डाउन के दौरान जहरखुरानी गिरोह का शिकार हुए तमिलनाडु निवासी युवक श्रवण को अपने घर पर शरण देकर मानवता की मिसाल कायम की है। ऐसे समय में जब लोग सम्बंधी को भी घर रखने में कतरा रहे है, एक अजनबी को सहारा देना बहुत बड़ी बात है। उनका यह कार्य दूसरों के लिए प्रेरणा देने वाला है। एसडीएम देवबंद देवेंद्र कुमार पांडे का कहना है कि हरविंदर लॉक डाउन के शुरू से ही जरूरतमंदों तक राशन पंहुचाकर सेवा कर रहे है। तमिलनाडु निवासी श्रवण को अपने घर शरण देकर उन्होंने सच्ची मानवता व सेवा भाव की मिसाल कायम की है। वे बधाई के पात्र है।

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Prakash Pandey

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