जोगी जोग करें मन मांही,
उनकी कृपा कुछ नाही,
और जुग-जुग जाऊं शरण तिहारे,
सबकी लगाओ नइया किनारे ।।
लखनऊ. साहित्य से ओतप्रोत या पंक्तियां प्रदेश की राजधानी लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेशन पर गूंज रही थी और इसको गा रहे थे 80 साल के एक बुजुर्ग कुली मुजीबुल्ला. लॉक डाउन में बिना पैसे लिए लोगों का समान उठाने वाले मुजीबुल्ला इसके पीछे अपना सेवा भाव और दूसरों की मजबूरी समझने का तर्क देते हैं.
मुजीबुल्ला के बेबाक अंदाज़ के वीडियो को वरिष्ठ फ़ोटो जर्नलिस्ट आशुतोष त्रिपाठी ने अपने ट्विटर हैंडल से शेयर किया.
आठवीं पास मुजीबुल्ला के शब्द उन लोगों के कानों में पत्थर की तरह लगेंगे जो धर्म के आधार पर दूरियां पैदा करते हैं. 80 साल के बुजुर्ग में 18 साल का जवां दिल अगर देखना हो तो मुजीबुल्ला मिसाल हैं. मुमुजीबुल्ला जब सेवा करते हैं तो केवल सेवा भाव रखते हैं धर्म और संप्रदाय तो बहुत पीछे छूट जाता है.



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