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कलंक कथा: राशन कार्ड बनवाने के नाम पर एक विधवा के साथ प्रधान समेत 13 लोगों ने किया गंदा काम, कुदरत ने दी सज़ा, बोले माफी दे दो,घटना पुरानी जरूर लेकिन शर्मनाक

भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के कई किस्से आपने सुने होंगे लेकिन आज जो कलंक कथा जो हम आपको सुनाने वाले हैं शायद ही आपने कभी सुना या पढ़ा होगा. यह अपने आप में एक अनोखा मामला भी है जो सत्य घटना पर आधारित है. जहां रिश्वत के रूप में शारीरिक शोषण किया गया और शोषण कर्ताओं को ऐसी सजा मिली जिसकी वह कल्पना भी नहीं कर सकते थे. हिंदुस्तान के इतिहास में इसको सबसे बड़ी कलंक कथा के नाम से जाना जाएगा.हालांकि की घटना पुरानी जरूर है लेकिन शर्मनाक है और भ्रष्टाचार में लिप्त लोगों के लिए एक सबक भी है.

गोरखपुर में भटहट ब्लाक के 13 लोग रिश्वत लेने के चक्कर में एड्स के शिकार हो गए. जैसे ही मामला क्षेत्र में के लोगों को पता चला पूरा क्षेत्र सकते में आ गया. भटहट ब्लॉक के सटे हुए गांव में भ्रष्टाचार की ये कथा भ्रष्टाचार की जड़ों की न केवल पोल खोलती है बल्कि संवेदनहीनता व लालच की पराकाष्ठा को बयान करती है.

भटहट ब्लॉक के सटे हुए गांव कि एक बेवा औरत की यह कहानी आपको झकझोर कर रख देगी. कम उम्र में पति को खोने का दुख और उसके ऊपर शारीरिक शोषण की प्रताड़ना कुल मिलाकर कहें तो शब्द कम पड़ जाएंगे. इस महिला को अपना राशन कार्ड और विधवा पेंशन का कागज बनवाने की ऐसी रिश्वत देनी पड़ी जो रिश्वत कांड की सबसे बड़ी कलंक कथा होगी. मामले का खुलासा हालांकि 30 जनवरी 2018 को हुआ.
एक महिला की शादी करीब 8 साल पहले 24 वर्ष की उम्र में हुई थी. उसका पति मुंबई के भिवंडी की धागा फैक्ट्री में नौकरी करता था. शादी के 3 साल बाद बीमारी के चलते पति की मृत्यु हो गई. संतान ना होने के कारण महिला के ससुराल वालों ने उसे अपने साथ नहीं रखा ना ही मायके के लोगों ने मदद के लिए हाथ बढ़ाए.
3 साल पहले बेवा हुई महिला ने अपना राशन कार्ड और पेंशन बंधवाने के लिये ग्राम रोजगार सेवक की सहायता ली. ग्राम रोजगार सेवक महिला को लेकर प्रधान के पास पहुंचा और उनसे महिला का राशन कार्ड और पेंशन बनवाने की गुजारिश की. महिला ने प्रधान को बताया कि वह अकेली है और उसके आगे पीछे कोई नहीं है.बस फिर क्या था प्रधान जी उनके पीछे हो लिए. प्रधान ने कड़ी को आगे बढ़ाते हुए सेक्रेटरी से महिला की मुलाकात करा दी. इसके अलावा करीब 9 बिजोलिया रहेे जो प्रधान से लेकर रोजगार सेवक तक को जानते थे. वह भी महिला से मिले और उसको राशन कार्ड और पेंशन दिलाने का आश्वासन दिया. सभी ने महिला की मजबूरी का खूब फायदा उठाया.

दरअसल,घटना के खुलासे की तिथि 30 जनवरी 2018 से 3 महीने पहले लगभग नवंबर 2017 को महिला की अचानक तबीयत खराब हो गई.जिसको दिखाने के लिए प्रधान ने अपने परिचित एक झोलाछाप डॉक्टर को दिखाया, इलाज भी हुआ, लेकिन परिणाम न मिलने की स्थिति में महिला की खून की जांच कराई गई. जांच के बाद जो रिपोर्ट आई उससे प्रधान के होश उड़ गए, महिला एचआईवी संक्रमित थी.

जैसे ही प्रधान से लेकर बिचौलियों तक यह बात पहुंची तो सबने अपना माथा पकड़ लिया. मामले पर पूरा विश्वास बनाने के लिए महिला का दोबारा बीआरडी मेडिकल कॉलेज में जांच करवाया गया. कॉलेज के ए आर टी सेंटर ने जांच में एड्स की पुष्टि कर दी. बस फिर क्या था महिला का शोषण करने वाले प्रधान, सेक्रेटरी,ग्राम रोजगार सेवक समेत 13 लोगों ने मेडिकल कॉलेज के एआरटी सेंटर में अपनी जांच कराई जिसकी रिपोर्ट आने के बाद सभी अपने कर्मों को कोसने लगे. सभी एड्स से ग्रसित निकले. हालांकि सभी का इलाज चल रहा है.
एक समाचार पत्र के मुताबिक महिला को पति से ही एचआईवी संक्रमण हुआ था जिसकी जानकारी महिला को नहीं थी.

भरस्टाचार की कलंक कहानी

  • गोरखपुर के भटहट ब्लॉक में एक गांव के 13 लोगों को कुदरत ने दी सज़ा, कांप उठी रूह
  • विधवा महिला से राशनकार्ड और विधवा पेंशन के कागजात बनवाने के नाम पर जमकर हुआ शरीरिक शोषण
  • प्रधान, रोजगार सेवक सेक्रेटरी समेत13 लोगों ने किया यौन उत्पीड़न
  • रहस्यमय बीमारी से पति की हुई थी मृत्यु, महिला संक्रमण से थी अनजान
  • संबंध बनाने वाले सभी एचआईवी पॉजिटिव, अब तक 13 कि पुष्टि
  • सभी का इलाज बीआरडी मेडिकल कॉलेज में जारी