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Politics: गिरिराज सिंह के ब्यान पर बवाल, सहारनपुर सांसद, विधायक ने की निंदा, जानिए क्या कहा?

सहारनपुर . भाजपा के फायर ब्रांड नेता और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के देवबंद के संबंध में दिए गए बयान पर जिले में राजनीति गरमा गई है. नेताओं ने गिरिराज सिंह के बयान को आड़े हाथों लिया और अपनी प्रतिक्रिया दी है. गिरिराज सिंह के बयान पर बसपा सांसद ने जहां तीखा हमला बोला है वही नगर विधायक ने कड़ी आलोचना की है.

बसपा सांसद हाजी फज़लुर्रहमान ने केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के विवादास्पद बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह का देवबंद में दिया बयान शर्मनाक, निंदनीय और विद्वेष को बढाने वाला है. देवबन्द वह स्थान है जिसने देश की आज़ादी के लिए लड़ाई लड़ी. अब देवबन्द के बुजुर्गों और उलमा पर आतंकवाद का इल्ज़ाम वह लोग लगा रहे हैं जिनके नेताओं ने स्वतंत्रता की लड़ाई में अंग्रेजों की मदद की और स्वाधीनता के आंदोनकारियो के विरुद्ध भी काम किया और अंग्रेज़ो से माफी मांगने पर वे जेल से बाहर आये. गिरिराज सिंह की पार्टी भाजपा ने तो आतंकवाद के आरोप में सज़ा काट चुकी साध्वी प्रज्ञा को संसद में पहुंचाने का काम किया जिनपर आज भी आतंकवाद के आरोप में केस चल रहा है. गिरिराज सिंह बताए कि संघ परिवार के मुख्यालय नागपुर में स्वतंत्रता दिवस व गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रीय ध्वज क्यों नहीं फहराया जाता जबकि इन दोनों रष्ट्रीय पर्व पर दारुल उलूम में बड़ी शान से तिरंगा झण्डा लहराया जाता है. गिरिराज सिंह को हिन्दू समाज से माफी मांगनी चाहिए क्योंकि उन्होंने गंगा नदी के उद्गम स्थान गंगोत्री का नाम आतंकवाद से जोड़ा है. शाहीन बाग़ उस इंक़लाब का नाम है जो संविधान को बचाने के लिए शुरू किया गया है. शाहीन बाग़ ने भाजपा को करंट का ऐसा झटका दिया है जिससे दिल्ली चुनाव में भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा है. दिल्ली हार के कारण ही गिरिराज सिंह बौखला गए है और उनके इन शर्मनाक बयानों पर प्रधानमंत्री को नोटिस लेना चाहिये.

वहीं नगर विधायक संजय गर्ग ने भी गिरिराज सिंह के बयान की निंदा की है उन्होंने कहा कि


केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह का देवबंद के बारे में दिया गया बयान बहुत शर्मनाक, निंदनीय और नफ़रत को बढाने वाला है. उन्हें दिल्ली के चुनाव परिणामों से सबक़ लेना चाहिये और स्वतंत्रता आंदोलन का इतिहास पढ़ना चाहिये. अंग्रेजो के द्वारा १८५७ की क्रांति को कुचलने के बाद मौलाना महमूदउल हसन के रेशमी रूमाल तहरीक से आज़ादी के आंदोलन को नई ऊर्जा मिली थी. माल्टा की जेल से मौलाना हुसैन अहमद मदनी के बयान कि “मज़हब क़ौम की बुनियाद नही हो सकता “, ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों में एक नया जोश भरने का काम किया था. देवबन्द वह स्थान है जिसने देश की आज़ादी के लिए लड़ाई लड़ी. अब देवबन्द के बुजुर्गों और उलमा पर आतंकवाद का इल्ज़ाम लगाना,तथ्यों से परे और बचकाना हरकत है. जिन्होंने स्वतंत्रता की लड़ाई में अंग्रेजों की मदद की हो उनके मुँह से यह शोभा नही देता. १५ अगस्त १९४७ और २६ जनवरी १९५० को जब पूरा हिंदुस्तान तिरंगा फहरा कर जश्न मना रहा था तब संघ परिवार के मुख्यालय नागपुर में स्वतंत्रता दिवस व गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रीय ध्वज नहीं फहराया गया था. अतः केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह का बयान विवादास्पद, गैर जिम्मेदाराना एवं राजनीति से प्रेरित है, जिसकी हम कड़े शब्दों में निंदा करते है.

गौरतलब है कि कल केंद्रिय मंत्री गिरिराज सिंह ने देवबंद को आतंकवाद की गंगोत्री कहा था जिसके बाद से राजनीति में बवाल मचा हुआ है.

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Prakash Pandey

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