COVID-19 Live Update

Global Total
Last update on:
Cases

Deaths

Recovered

Active

Cases Today

Deaths Today

Critical

Affected Countries

Total in India
Last update on:
Cases

Deaths

Recovered

Active

Cases Today

Deaths Today

Critical

Cases Per Million

Uncategorized पॉलिटिकल खास बोल वचन खास

क्या लिखूं @ स्तब्ध हूं, निःशब्द हूं: शलभमणि

अगर माटी के पुतले देह में ईमान जिंदा है
तभी इस मुल्क की समृद्धि का अरमान जिंदा है
ना भाषण से है उम्मीदें, ना वादों पर भरोसा है
इन्हीं सैनिकों की बदौलत हमारा हिंदुस्तान जिंदा है

कुशीनगर. मैं स्तब्ध हूं, निःशब्द हूं, क्या लिखूं? ये तमाम भावात्मक की पराकाष्ठा को छूते हुए शब्द जिनको बोलते हुए आंखे भर आयीं, जिनको सुनकर रूह से आह निकलने लगी, जिनको सुनकर दर्द का अहसास होने लगा, ये केवल शब्द नही थे भाव थे जो दर्द से निकलकर जुबां पर आ गए थे.

ये उदगार थे भाजपा उत्तर प्रदेश के प्रवक्ता और मुख्यमंत्री के सलाहकार शलभमणि त्रिपाठी के. दुःखद समय था, स्थान था कुशीनगर जनपद के सेवरही विधानसभा क्षेत्र के गांव दुमही का. घटना भी अपने आप मे हिला देने वाली थी. दुमही का एक होनहार युवा लाल सीमा पर शहीद हो गया था.परिवार पर दुःख का पहाड़ टूट पड़ा था. विलाप की चित्कार मन को व्यथित कर देने वाली थी.पूरा गांव शोक में डूब गया था, जब खबर आई कि जिनको प्यार से पाला, बड़ा किया, जिनके साथ खेला, जिनके साथ जीवन बिताने की कसम खायी, जिनको अपना नाम देकर पालने की जिम्मेदारी उठाई, और बुढापे में जिनको सहारा देने का वादा किया था, उनसभी का विश्वास दुमही का लाल चंद्रभान चौरसिया अब दुनिया मे नही रहा. चंद्रभान अब शहीद होकर मां भारती की गोद मे हमेशा के लिए आराम करने चले गए.

दरअसल, दुमही के चंद्रभान चौरसिया 2015 में सेना में भर्ती हुए थे. 2016 में विवाह के बाद उनके दो छोटे बच्चे हैं. चंद्रभान 14 जनवरी को जम्मु के कुपवाड़ा में शहीद हो गए. शहादत की खबर मिलते ही पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ पड़ी.

शोकसंतृप्त परिवार को ढांढस बांधते हुए मूलरूप से दुमही के ही निवासी भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता और मुख्यमंत्री के सलाहकार शलभमणि त्रिपाठी ने गहरा शोक जताया. अपनी फेसबुक वॉल पर दर्द को बयां करते हुए लिखा…

शब्द नहीं मिल रहे, पीड़ा के इस क्षण में कुछ कहने के लिए, बेहद छोटी सी उम्र में देश सेवा करते हुए कश्मीर में शहीद हुए चंद्रभान चौरसिया हम सबको, पूरे गाँव और इलाक़े को रुला गए, वे हमारे गाँव दुमही के गौरव थे, आज ग़म भी है, गर्व भी है, ग़म उनकी शहादत का, गर्व उनके साहस पर, माँ भारती की सेवा में अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले चंद्रभान जैसे रणबाँकुरे कभी मर नहीं सकते, वे हमारे दिलों में सदैव ज़िंदा रहेंगे, देशभक्ति और बहादुरी की लौ बन कर …. शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले ….. शत शत नमन ????

About the author

Prakash Pandey

Add Comment

Click here to post a comment

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.