सहारनपुर/ उत्तर प्रदेश. प्रसिद्ध इस्लामिक शिक्षण संस्थान दारुल उलूम देवबंद ने निजामुद्दीन मरकज़ से लौटे जमातियों से खुद सामने आकर पुलिस का सहयोग करने की अपील की है. दारुल उलूम की ओर से जारी अपील में समाज़ में घृणा पैदा करने वाले लोगों से सख्ती बरतने और देश विदेश के कोरोना से घिरे लोगों पर कानूनी कार्रवाई न करने की सिफारिश भी की है.
दारुल उलूम देवबंद के मोहतमिम(कुलपति) मुफ्ती अबुल क़ासिम नोमानी की अपीलीय चिट्ठी को सहारनपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दिनेश कुमार प्रभु ने मीडिया के सहयोग के लिए बनाए गए ” सहारनपुर पुलिस मीडिया” के व्हाट्सएप ग्रुप में साझा किया है.
अपीलीय चिट्ठी में दारुल उलूम देवबंद के मोहतमिम अबुल क़ासिम नोमानी ने मरकज़ से लौटे लोगों से अपील करते हुए कहा है
” कोरोना वायरस (कोविड-19) इस वक्त एक वैश्विक समस्या बना हुआ है, दुनिया के कई देश इस इससे पीड़ित हैं. भारत में भी
यह महामारी विदेशों से आ गई है, इसलिए अपनी और अपने समाज की सुरक्षा के लिए सावधानी बरतना हर तरीके से आवश्यक है. लेहाजा भारत के लोगों से अपील है कि वह मेडिकल जांच कराने में शासन प्रशासन के साथ प्रतिरोध के बजाय उनका सहयोग करें.और तालिबानी जमात से जुड़े लोगों से भी अपील की जाती है की जो लोग 1 मार्च के बाद मरकज निजामुद्दीन जा कर आए हो, अब वह कहीं भी हो, खुद आगे आएं और कोरोनावायरस के बारे में स्थानीय प्रशासन से संपर्क करके अपनी मेडिकल जांच कराएं, और जिम्मेदारी से काम लेते हुए हर हालात का सामना करें, इस तरह कई प्रकार के खतरों व आशंकाओं को समाप्त खत्म किया जा सकता है.
नोमानी ने मीडिया पर भी सवाल उठाया और भारत सरकार से कार्रवाई की मांग की. उन्होंने कहा
“तबलीगी जमात के मरकज निजामुद्दीन के जो हालात अभी तक सामने आए हैं वह हर ऐतबार से चिंताजनक हैं और ऐसी सख़्त और आजमाइश की घड़ी में जबकि पूरी दुनिया कोरोनावायरस से फैल रही बीमारी का सामना कर रही है, हमारे देश के कुछ प्रदूषित मानसिकता के लोग इसमें भी धार्मिक घृणा का जहर घोल रहे हैं. हम ऐसे तत्वों की कड़ी निंदा करते हैं और भारत सरकार से यह मांग करते हैं कि इस संबंध में वास्तविक स्थिति के अनुसार ऐसे तत्वों (विशेषकर मीडिया) जो देश के सौहार्द को नष्ट करने में लगे हैं उन पर रोक लगाई जाए.
उन्होंने आगे लिखा

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