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Delhi state election 2020: …तो इन कारणों से जीत गए केजरीवाल, जीत के एक एक पहलू का सटीक विश्लेषण

Delhi Assembly Elections Results 2020. दिल्ली विधानसभा के सभी 70 सीटों पर वोटों की गिनती जारी है. तकरीबन तकरीबन परिणाम भी स्पष्ट है. बढ़त और जीत के मौजूदा स्थिति पर नज़र डालें तो आप का ताप 2020 में भी जारी रहा और पार्टी तकरीबन 63 सीटों के प्रदेश में बम्फ़र जीत दर्ज कर रही है और आप मुखिया अरविंद केजरीवाल तीसरी बार दिल्ली का नेतृत्व करेंगे.
दोपहर 3.30 पर जब केजरीवाल मीडिया से मुखातिब हुए तो उनके चेहरे पर तेज़ था, आत्मविश्वास था और जीत की खुशी थी. बेहद शांत स्वभाव से जनता को धन्यवाद किया और जीत का श्रेय हनुमान जी को दिया. केजरीवाल को बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है. पार्टी मुख्यालय पर जश्न मनाया जा रहा है. यह मानना पड़ेगा कि दिल्ली की जनता ने हर मुद्दे पर गौर करने के बाद अरविंद केजरीवाल पर भरोसा जताया है. ऐसे में सवाल यह भी है कि दिल्ली चुनाव में आम आदमी पार्टी ने कौन सा जादुई दाव खेला जिससे भाजपा पार न पा सकी और कांग्रेस चारों खाने चीत हो गयी. बोलवचन टीम ने आप के ताप के पीछे छीपे हुए कारण को जानने की कोशिश की और जो परिणाम आया उससे आपको साझा कर रहे हैं…..

केजरीवाल की सरल और साफ़गोई छवि

केजरीवाल अपने पहनावे, अपनी साफ छवि और साफगोई जवाब के लिए जाने जाते हैं. इस चुनाव में भी उनका यही स्वभाव उनके लिए अचूक अस्त्र साबित हुआ जिसके चलते भाजपा की एक न चली. हालांकि भाजपा ने दिल्ली चुनाव के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी थी बावजूद इसके केजरीवाल की निजी छवि और सीधा संवाद विश्व की सबसे बड़ी पार्टी पर भारी पड़ा.

‘मुफ्त’ के मार्फ़त धराशायी हो गया विपक्ष

दिल्ली चुनाव में मुफ्त भी एक ऐसा शब्द था जिसने पूरे चुनाव को प्रभावित किया. इसके पीछे का कारण यह भी माना जा रहा है कि अगर जनता सरकार को टैक्स देती है तो सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह उसकी दैनिक जरूरतों का ख्याल रखे. दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने बीते 5 साल बिजली, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया और इस चुनाव में भी बिजली, पानी और सफर जैसे पहलुओं को सबसे अधिक अहमियत दी. अरविंद केजरीवाल की सरकार दिल्ली की ज्यादातर आबादी को बिजली और पानी मुफ्त देती है. हाल ही में केजरीवाल सरकार ने, महिलाओं के लिए डीटीसी बसों सफर मुफ्त कर दिया. यही कारण है कि केजरीवाल ने इन बड़े फैसलों से एक बड़े तबके को अपने पक्ष में कर लिया जो आम आदमी पार्टी की जीत का आधार बनी. आप ने महिलाओं के लिए मेट्रो में भी मुफ्त सफर का प्रस्ताव बनाया है.

चेहरा बना मुद्दा

दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020 के परिणाम से एक बात स्पष्ट है कि दिल्ली के दिल में केजरीवाल बसते हैं. दिल्ली दिल्ली के लोगों ने केजरीवाल की सियासत और नेतृत्व पर भरोसा किया जबकि भाजपा सीएम के लिए एक चेहरा भी नहीं दे पाई. यही कारण रहा कि केजरीवाल लगातार भाजपा से चेहरे को लेकर सवाल करते रहे जिसका जवाब भाजपा नहीं दे पाई. दिल्ली विधानसभा चुनाव में दलों को यह भी सीख मिलेगी कि यदि चेहरा नहीं दिखाएंगे तो वोट भी नहीं पाएंगे.

शाहीन बाग, 370 समेत तमाम मुद्दों पर स्थानीय मुद्दे-बिजली, पानी, स्कूल रहे भारी

पूरे चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी ने धारा 370 शाहीन बाग सी ए ए और एनआरसी जैसे विषयों को मुद्दा बनाया जबकि केजरीवाल ने स्थानीय मुद्दों बिजली पानी स्वास्थ्य शिक्षा को मुद्दा बनाया
चुनाव के दौरान लोगों का यह भी कहना था जब चुनाव स्थानीय है तो राष्ट्रीय मुद्दे का क्या करना? आम आदमी पार्टी ने पिछले 1 साल से केजरीवाल के पक्ष में माहौल बनाना शुरू कर दिया था आपने हमेशा बिजली पानी को ही महत्व दिया. पार्टी ने दिल्ली वासियों की नब्ज को जान लिया था. पार्टी शुरू से जानती थी कि बिजली और पानी जैसे मुद्दे दिल्ली के हर आदमी को प्रभावित करते हैं. ऐसे में इसका असर वोट पर भी दिख रहा है.

कांग्रेस ने केजरीवाल को दिया वॉकओवर

दिल्ली चुनाव में तीन बड़ी पार्टियां थीं- आम आदमी पार्टी, बीजेपी और कांग्रेस. लेकिन चुनाव की तारीख की घोषणा होने से लेकर वोटों की गिनती होने तक कांग्रेस को देखकर यह साफ हो गया कि चुनाव बीजेपी और आप के बीच है. कांग्रेस रेस में कहीं भी नहीं है.पार्टी ने न तो प्रचार पर ध्यान दिया और न ही मज़बूती से चुनाव लड़ा. कांग्रेस ने अपनी हार को पहले ही स्वीकार कर लिया था जिसका सीधा फायदा आम आदमी पार्टी को हुआ. कांग्रेस के मतों का बंटवारा हुआ जो आप पर शिफ्ट कर गया.

मोदी की राष्ट्रवादी छवि पर नरम रही पार्टी जबकि बाकी को घेरे रखा

आम आदमी पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर इस बार मौन साधना में ही अपनी भलाई समझी. दरअसल केजरीवाल ने पिछले चुनाव के अनुभव से सीखा कि पीएम मोदी पर हमला उनके पक्ष में नहीं रहता. यदि उन पर हमला किया जाता है तो यह पार्टी के खिलाफ जा सकता है यही कारण है कि केजरीवाल और उनकी पूरी टीम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर चुप्पी साधे रखी जबकि गृह मंत्री अमित शाह और प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी पर हमले जारी रखे. केजरीवाल की यह रणनीति काम आई और नतीजा सभी के सामने है.
दिल्ली चुनाव प्रचार के दौरान दिल्ली चुनाव के लिए पाकिस्तान पर आई प्रतिक्रिया पर केजरीवाल का यह कहना है कि मोदी इस देश के प्रधानमंत्री हैं और पड़ोसी मुल्क को इस पर बोलने का कोई हक नहीं है.

इन मुद्दों से बनाई दूरी, और जीत ली बाज़ी

चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा शाहीन बाग को मुद्दा बनाने के लिए मन बना चुकी थी. भाजपा का मकसद इसका सियासी फायदा उठाने का था.
प्रचार के दौरान भाजपा नेता बार-बार केजरीवाल को इस मुद्दे पर अपनी राय रखने की चुनौती देते रहे. लेकिन केजरीवाल ने चतुराई से इस मुद्दे पर दूरी बनाए रखी. साथ ही खुद को हनुमान भक्त बताकर भाजपा के सांप्रदायिक कार्ड को फेल करने की भी कोशिश की. चुनाव प्रचार के अंतिम दिनों में केजरीवाल मंदिर में दर्शन करने भी पहुंचे थे. जिसका लाभ अरविंद केजरीवाल को बखूबी मिला और परिणाम के बाद केजरीवाल ने जीत के लिए हनुमान जी का धन्यवाद भी किया.

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Prakash Pandey

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