रायपुर/छत्तीसगढ़. कोरोना के संकट को मात देने के लिए भारत सरकार ने 21 दिन का लॉक डाउन किया है. इसका सबसे अधिक असर मजदूरों के साथ साथ बीमारी से ग्रसित लोगों पर दिखाई दे रहा है. नाकेबंदी के चलते दुखी और मजबूर लोग अपना इलाज तक नहीं कर पा रहे हैं. ऐसे में कई जगह से विद्रोही स्वर भी सुनने को मिले हैं और राजनीति भी हो रही है.
लेकिन दर्द को सहकर मुस्कराती एक पांच साल की बच्ची की तस्वीर ने संवेदना की पराकाष्ठा को छू लिया. बच्ची के साथ दो तरह का व्यवहार हुआ. पहले दृष्य ने मानवीय पहलू पर सवाल खड़े किए तो दूसरे ने मानवता की मिसाल दी.
दरअसल, छत्तीसगढ़ के रायपुर से झकझोर देने वाली तस्वीर सामने आई है. 5 साल की बच्ची अपना इलाज कराने के लिए निकली लेकिन इलाज के नाम पर बॉर्डर पर फंस गई. 5 साल की संधवी अपनी मां मोनाली मेश्राम के साथ महाराष्ट्र के भंडारा शहर से रायपुर इलाज कराने जा रही थी. संधवी के दिल में छेद है लेकिन बॉर्डर पर पुलिस ने रोक लिया. बच्ची दर्द से कराह रही थी. उसका मन बहलाने के लिए उसकी मां ने उसे अपना मोबाइल दे दिया जिसके बाद बच्ची मोबाइल पर गेम खेलने लगी और बॉर्डर पर दूसरे मजदूरों को देख कर मुस्कुराती रही. बच्ची की मां के काफी मिन्नतें करने और बच्ची की हालत देखने के बाद अंत में पुलिस ने उसे जाने दिया.
हालांकि पुलिस के कुछ लोग बच्ची के साहस पर भावुक भी हुए.
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