नई दिल्ली. राजनीति में अनिश्चितता बनी रहती है. कब क्या हो जाए इसका अंदाजा लगाना बड़ा मुश्किल होता है.ऐसा ही कुछ हुआ है दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार बन जाने के बाद.
दिल्ली में 62 सीटें जीतने के बाद आप मुखिया अरविंद केजरीवाल ने 16 फरवरी को मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली थी. पूरे दमखम के साथ सत्ता में वापसी करने वाले केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अपने भाषण में जिक्र करते हुए कहा था कि मैं पीएम मोदी से आशीर्वाद चाहता हूं. सियासी गलियारों में इसके अलग मायने निकाले गए. माना गया कि केजरीवाल के मन में कहीं ना कहीं भाजपा के लिए सॉफ्ट कॉर्नर चल रहा है.आज केजरीवाल ने दो कदम आगे बढ़ते हुए देश के गृहमंत्री अमित शाह से उनके आवास पर मुलाकात की. मुलाकात के बाद केजरीवाल ने ट्वीट किया. उन्होंने कहा कि गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात हुई है. यह काफी अच्छी और फलदाई बैठक थी. दिल्ली से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा की. हम दोनों सहमत हैं कि हम दिल्ली के विकास के लिए मिलकर काम करेंगे.
गृहमंत्री अमित शाह के आवास पर दोनों नेताओं ने गर्मजोशी से एक दूसरे का अभिवादन किया दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने गृहमंत्री को बुके भेंट किया.
बता दें कि दिल्ली केंद्र शासित प्रदेश है. दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा प्राप्त नहीं है जिसके चलते कानून व्यवस्था समेत कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां केंद्र सरकार के अधीन है. केजरीवाल के पहले और दूसरे कार्यकाल में केंद्र सरकार और राज्य सरकार में टकराव लगातार देखा गया. लेकिन केजरीवाल ने पीएम मोदी के आशीर्वाद के बाद अमित शाह से मुलाकात कर इस बात की संभावना को जन्म दे दिया कि केजरीवाल केंद्र सरकार के साथ मिलकर जनता के लिए काम करना चाहते हैं. यहां यह भी जान लेना जरूरी है कि अपने शपथ ग्रहण के दौरान भी केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली के सातों सांसदों हर्ष वर्धन, मनोज तिवारी, हंसराज हंस, प्रवेश वर्मा, रमेश बिधूड़ी, गौतम गंभीर और मीनाक्षी लेखी को निमंत्रण भेजा था. यह अलग बात है की रोहिणी के भाजपा विधायक विजेंद्र गुप्ता के अलावा कोई भी शपथ ग्रहण में शामिल नहीं हुआ.

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