राजस्थान/ सीकर. यदि आप भावुक हैं और कोई भी बड़ी या छोटी घटना आपकी भावनाओं के ज्वार को उठा देती है तो यह खबर निश्चित ही आपको हिला देगी. राजस्थान के सीकर में ऐसा ही एक वाकया सामने आया है. एक युवक को सरकारी नौकरी मिल गई है. अब आप सोच रहे होंगे कि सरकारी नौकरी मिल गई तो इसमें खास क्या है? इसमें खास यह है कि राजस्थान के एक गांव में आजादी के बाद पहली बार किसी को सरकारी नौकरी मिली है.
कंपटीशन के युग में सरकारी नौकरी मिलना किसी चुनौती से कम नहीं है. यह तब और भी रोचक हो जाता है जब देश की आजादी के 73 साल बाद किसी को सरकारी नौकरी करने का मौका मिले. दरअसल, यह अनोखा मामला राजस्थान प्रदेश के सीकर जिले की पहाड़ियों की तलहटी में बसे धोकर गांव का है. पहली बार इस गांव के निवासी मुकेश गुर्जर का भारतीय सेना में चयन हुआ है. मुकेश के चयन के बाद गांव के लोगों ने न केवल उसका स्वागत किया बल्कि उत्सव मना रहे हैं.
क्यों नहीं मिली पहले किसी को नौकरी
पहली बार किसी के सरकारी नौकरी में चयन हो जाने को लेकर गांव वालों ने खुशी व्यक्त की और कहा कि अब वह भी अपने बच्चों को आगे पढ़ाएंगे. दरअसल, गांव के लोगों में एक संत के श्राप का भय था. ग्रामीण मानते थे किस संत के श्राप के चलते किसी को भी सरकारी नौकरी नहीं मिलती है. इसी कारण से ग्रामीण अपने बच्चों को सातवीं आठवीं क्लास तक पढ़ा कर किसी काम धंधे में या खेती करने में लगा देते थे जिसके चलते इस गांव के लोगों को सरकारी नौकरी से मरहूम रहना पड़ा. अब पूरे गांव की धारणा बदली है.

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