पूरे विश्व में कहर बरपा चुके कोरोना के इलाज को लेकर अभी तक कोई अच्छी ख़बर सामने नही आई है. पूरी दुनिया के वैज्ञानिक कोरोना की वैक्सीन खोजने में जुटे हैं.
लेकिन सोशल मीडिया पर यूजर्स कोरोना की दवा बना चुके हैं. यूजर्स के दावा है कि इसकी वैक्सीन बन चुकी है. पुष्टि के लिए कोविड-19 लिखी हुई किसी वैक्सीन की तस्वीर भी शेयर की जा रही है. लेकिन जान लीजिए कि यह ख़बर पूरी तरह ग़लत साबित हुई है.
कैसे बनी चर्चा
सोशल मीडिया पर एक यूजर ने एक तस्वीर पोस्ट किया है. पोस्ट में दावा किया है कि कारोना वायरस वैक्सीन तैयार हो गयी है. इंजेक्शन लेने के बाद तीन घंटे के भीतर रोगी को ठीक किया जा सकता है. अमेरिकी वैज्ञानिकों को सलाम. अभी ट्रंप ने घोषणा की कि रोशे मेडिकल कंपनी अगले रविवार को वैक्सीन लॉन्च करेगी और इसकी लाखों खुराक तैयार हैं. यह पोस्ट इंस्टाग्राम, ट्विटर पर भी शेयर किया गया है.
सामने आई हकीकत
लेकिन इस दावे की पोल तब खुल गयी जब पता चला कि कोविड-19 लिखी जिस मेडिसिन की तस्वीर वायरल हो रही है, वो वैक्सीन नहीं है, बल्कि टेस्टिंग किट है, जिसे साउथ कोरिया द्वारा विकसित किया गया है. साउथ कोरिया की फार्मा कंपनी सुगेंटेक ने पोर्टेबल डायग्नोस्टिक किट विकसित की है. इससे सिर्फ 10 मिनट में यह पता चल जाता है कि कोरोना है या नहीं. वायरल तस्वीर में कंपनी का नाम भी लिखा हुआ देखा जा सकता है.
यूजर्स किट को ही दवा मान रहे हैं और भ्रामक प्रचार कर रहे हैं. ऐसे में केवल घर रहकर ही इस लाइलाज बीमारी से बचा जा सकता है. घर पर रहिये, सुरक्षित रहिये.


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