MOHIT RAI JASWAL
सहारनपुर/उत्तर प्रदेश. देश में लॉक टाउन के चलते अर्थव्यवस्था ध्वस्त है. इंसान घरों में कैद हैं. इंसानी मदद की कोशिशें जारी हैं. लेकिन पशुओं की आस भरी निगाह इंसानों की तरफ टकटकी लगाए हुए हैं. भुखमरी के चलते पशु भी बिलबिला रहे हैं. बहुत कम लोग बेजुबान जानवरों की मदद के लिए सामने आए हैं. जिस गाय माता के लिए प्रदेश सरकार ने कई योजनाओं को शुरू किया उसी गोवंश की मदद आज सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है. गाय के लिए अब जब कोई सहारा नजर नहीं आता ऐसे समय में आलोक तुली ने बेजुबान के दर्द को समझा और मदद को बढ़ चले.
सहारनपुर से गौमाता को लेकर एक मामला प्रकाश में आया है. जहां एक कमजोर और बीमार अवस्था में भुखमरी की शिकार गौमाता की सहायता के लिए बालाजी घाट गौशाला के संचालक आलोक तुली मददगार साबित हुए.
दरअसल, आज शुक्रवार को नगर के ज्वाला नगर के गली नंबर 1 में बीमार गाय छोड़ जाने की सूचना स्थानीय लोगों को मिली. सूचना मिलते ही क्षेत्र के सागर खेड़ा, गौरव बजाज, वासु छाबड़ा, ने नगर निगम से गाड़ी मंगा कर गौमाता को बालाजी घाट गौशाला में सेवा के लिए पहुंचाया. गौशाला के संचालक ने तत्काल गौ माता के स्वास्थ्य की जांच करवाई और चारा आदि खिलाया. आलोक तुली लंबे समय से गोवंश की सेवा कर रहे हैं. साथ ही समाज सेवा के क्षेत्र में भी अग्रसर रहते हैं.
आलोक तुली कहते हैं कि वह और भी गोवंश लेने के लिए इच्छुक हैं. उन्होंने बताया कि कोई भी असहाय गोवंश किसी की नजर में है तो वह तुरंत बालाजी घाट समिति को इसकी सूचना दे सकते हैं. उन्होंने बताया कि लॉक डाउन के बावजूद निरंतर भोजन वितरण का कार्यक्रम भी उनके द्वारा चलाया जा रहा है.



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