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Fect Check : सरकारी स्कूलों के निजीकरण वाले मैसेज का सच क्या है?

सोशल मीडिया आज के समय में सबसे बड़े सूचना के प्लेटफार्म के रूप में सामने आया है. सोशल मीडिया पर जहां सही तथ्यों का अभाव है वही फर्जी खबरों का और मैसेज का अंबार रहता है.

आसानी से उपलब्ध होने वाले सोशल मीडिया को फर्जी मैसेज वाले बखूबी प्रयोग कर लेते हैं. ऐसा ही एक मामला संज्ञान में आया है जिसके बाद प्रेस इनफार्मेशन ब्यूरो ने अपना पक्ष रख कर खबर का खंडन किया है.
केंद्र सरकार द्वारा रेलवे के निजीकरण की शुरुआत, इसके अलावा देश के छह एयरपोर्ट को भी प्राइवेट कंपनियों के हाथों लीज पर देने वाले मैसेज के बाद सोशल मीडिया पर अब सरकारी स्कूलों के भी निजीकरण करने की खबरें वायरल हो रही है.

क्या है वायरल मैसेज का सच

वायरल मैसेज में दावा किया गया है कि देश में तमाम सरकारी स्कूलों का निजीकरण हो जाएगा. दावे के मुताबिक केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने पूरे देश में सरकारी स्कूलों के निजी करण की तैयारी तैयारी शुरू कर दी है. दावे में नीति आयोग का हवाला देते हुए कहा गया है कि पढ़ाई लिखाई के लिहाज से खराब स्तर वाले सरकारी स्कूलों को निजी हाथों में सौंप देना चाहिए.
पीआईबी ने वायरल मैसेज की पड़ताल के बाद सरकारी स्कूलों के निजी करण को लेकर फैलाई जा रही खबर को फर्जी माना है. प्रेस इनफार्मेशन ब्यूरो में उक्त मैसेज को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि केंद्र सरकार की ऐसी कोई भी योजना नहीं है.
प्रेस इनफार्मेशन ब्यूरो ने वायरल मैसेज पर ट्वीट किया और लोगों को ऐसे मैसेज से बचने की सलाह दी है.

वायरल मैसेज से सावधान रहने की जरूरत

पीआईबी ने आमजन को सलाह देते हुए कहा है कि कोरोनावायरस संकट के इस दौर में सोशल मीडिया पर ऐसे कई फर्जी मैसेज वायरल हो रहे हैं. ऐसे किसी भी मैसेज पर तब तक विश्वास ना करें जब तक इनकी पुष्टि ना हो जाए. मैसेज को दूसरों के पास भेजने से पहले हमें कई बार उसकी सत्यता की पड़ताल कर लेनी चाहिए.

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Prakash Pandey

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