सरकारी नौकरी में पदों की भर्ती पर किसी भी तरह की रोक नहीं लगाई गई है. 6 सितंबर को वित्त मंत्रालय ने टि्वटर हैंडल पर ट्वीट कर कहा कि एसएससी, यूपीएससी, रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड आदि के जरिए जैसे पहले भर्तियां होती थी उसी तरह की जाएंगी. उसमें सरकार ने कोई भी परिवर्तन नहीं किया है केवल गैर जरूरी खर्चों को घटाने के लिए कहा गया है.
क्या है मामला
पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर केंद्र सरकार द्वारा सरकारी भर्तियों पर रोक लगाने और 1 जुलाई तक निकली भर्तियों को रद्द करने संबंधी मैसेज वायरल हो रहा है.
मैसेज में 4 सितंबर के एक ऑर्डर की कॉपी को आधार बनाया गया है.
कॉपी पेस्ट के खेल में आदेश को किसी ने पढ़ा नहीं बल्कि जैसा जिसको मिला वैसे ही आगे सर्कुलेट कर दिया.
क्या लिखा था 4 सितंबर के सरकारी आदेश में
कोरोना महामारी के चलते बढ़ते राजकोषीय घाटे के और गहराने की आशंका के बीच सरकार ने शुक्रवार 4 सितंबर को सभी मंत्रालयों और विभागों से गैर जरूरी खर्च घटाने को कहा था. यह भी कहा गया था की परामर्शकों की नियुक्ति की समीक्षा की जाए. साथ ही आयोजनों में कटौती की जाए और छपाई के लिए आयातित कागज का इस्तेमाल बंद करने की सलाह सरकार द्वारा दी गई थी. सरकारी महकमों में नए पदों के सृजन के बारे में कहा गया था कि इन पर प्रतिबंध रहेगा.
सरकार के इस सर्कुलर के सामने आने के बाद पूरे देश में नौकरियों को लेकर आशंका हो पैदा हो गई और बवाल मच गया. लोग सोशल मीडिया पर सरकार के प्रति नाराजगी जाहिर करने लगे.
सरकार ने पूरे मामले पर क्या सफाई दी
सोशल मीडिया पर विरोधाभास को देखते हुए सरकार ने 6 सितंबर शनिवार को ट्विटर हैंडल पर वित्त मंत्रालय की ओर से बयान जारी किया जिसमें कहा गया है कि
“भारत सरकार के किसी भी पदों को भरने के लिए कोई पाबंदी नहीं है. यूपीएससी, एसएससी आरएलबी भर्ती बोर्ड जैसी सरकारी एजेंसियां पहले की तरह ही भर्तियों को जारी रखेंगी.”
इसके साथ ही वित्त मंत्रालय ने यह भी कहा है कि

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