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माटी के रंग

..उजाले मेरी ही आंखों में पाये जाते हैं, ये वो दिये हैं जो रो के जलाये जाते हैं.

  • बज्म ए जिगर नजीबाबाद की ओर से मिसरा तरहां.. किसी की राह में कांटे बिछाये जातें हैं पर महफ़िल ए मुशायरे का आयोजन..
  • मौजूद शायरों ने पेश किये दिल छू लेने वाले कलाम श्रोताओं ने खूब दाद दी.

नजीबाबाद. बज्म ए जिगर नजीबाबाद की जानिब से बीती रात एक तरहीं खूबसूरत मैय्यारी महफ़िल ए मुशायरे का आयोजन मौहल्ला सब्नीग्रान मैं डाक्टर तैय्यब जमाल के दौलतकदे पर किया गया. जिसमें शायरो ने मिसरा तरहां पर खूबसूरत कलाम पेश कर मौजूद सामईन को दाद देने पर मजबूर कर दिया.शेर सुनकर महफ़िल वाह वाह कर उठी.शेरी महफिल शायर मौसूफ अहमद वासिफ की सदारत और शादाब जफर शादाब की खूबसूरत निज़ामत में कामयाबी की मंजिलें चढ़ती रही.
महफ़िल ए मुशायरे का आगाज़ शायर अकरम जलालाबादी ने खूबसूरत नात ए पाक से कुछ यू किया..दर ए रसूल की अज़मत का क्या ठिकाना है,मलक भी आ के यहां सर झुकाये जातें हैं.
नौजवान शायर नौशाद अहमद शाद ने कहां.. तमाम आंधियां आती है सामने लेकिन,चराग़ दीन के फिर भी जलाये जाते हैं.
एक और नौजवान शायर अब्दुल रज्जाक सलमानी ने मिसरा तरहां पर खूबसूरत ग़ज़ल पेश करते हुए कहा.. सफ़र ए इश्क के बुतन और बुत ए ज़ेबा के, बहुत तवील है रस्ते बताये जाते हैं.
.खूबसूरत शेर कहने वाले उबैद अहमद उबैद ने कहा.. हमारी प्यास की चौखट पे रख के दरिया को, हमारे हौसले भी आजमाये जाते हैं.
शायर सय्यद साद अली ने ‌कहा..जो मेरे दर्द मैं आते हैं मसीहा बन कर, कमर उदू की भी थपथपाये जाते हैं.
बुजुर्गो शायर शकील अहमद वफ़ा जलालाबादी ने कहा..हमीं पे आज तलक ज़ुल्म ढाये जाते हैं, फरेब देने को आसूं बहाये जाते हैं.
खूबसूरत तरन्नुम के मालिक नौजवान शायर सुहेल शहाब शम्सी ने कहा..तुम अपनी आंख के दरिया में डूब जाने दो,सुना है हीरे समन्दर में पाये जाते हैं.
कल्हेडी से तशरीफ़ लाए बहुत उम्दा शेर कहने वाले शायर नदीम साहिल ने कहा..ये बारिशें तो हमें क्या भिगोयेगीं साहिल,
हमारी छत प समन्दर सुखाये जाते हैं.
महफ़िल ए मुशायरे का बाबरकत आग़ाज़ करने वाले मुतरन्निम शायर अकरम जलालाबादी ने कहा..मेरे अज़ीज़ ये बज़्मे जिगर की महफिल है. यहां पे प्यार के नगमें सुनाये जाते हैं.
मेज़बान शायर डॉ तैय्यब जमाल साहब ने मेहमान शायरों का शुक्रिया अदा करते हुए कहा..अजीब बात है जितना भुलाये जाते हैं,
वो याद और भी शिद्दत से आये जाते हैं.


मुशायरे की एक नये और खूबसूरत अंदाज में निज़ामत कर रहे मशहूर शायर शादाब जफर शादाब ने कहा.. तड़प बढ़ाने को दिल की सताये जाते हैं,वो आये जाते हैं ए दिल वो आये जाते हैं.
बज़्म ए जिगर के सरपरस्त और मुशायरे की सदारत कर रहे हिन्दुस्तान के मशहूर व मारुफ़ शायर मौसूफ अहमद वासिफ ने कहा..उजाले मेरी ही आंखों में पाये जाते हैं, ये वो दिये हैं जो रो के जलाये जाते हैं.
इन के अलावा साजिद सलमानी,शाद अली ‌देहलवी,तसलीम अहमद एडवोकेट,अल्ताफ रज़ा खां ने देर रात तक चले मुशायरे में कलाम पेश कर समां बांध दिया.मुशायरे की खूबसूरत निज़ामत शायर शादाब जफर शादाब ने वो सदारत शायर मौसूफ अहमद वासिफ ने की.

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Prakash Pandey

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