बोल वचन खास

कितना सुरक्षित है ऑनलाइन शिक्षा, आपके बच्चे के लिए डॉक्टरों की राय के बाद अभिभावकों में शिक्षा पद्धति को लेकर रोष, जानिए क्या है मामला

Saharanpur/ uttar pradesh. देश में लॉक डाउन के चलते शिक्षा प्रणाली पूरी तरह से रुकी हुई है. इसी बीच स्कूल संचालकों ने शिक्षा पद्धति को जारी रखने के लिए ऑनलाइन क्लास शुरू करने का निर्णय लिया जिससे स्कूलों में कोर्स पूरा हो सके लेकिन स्कूलों कि यह जबरजस्ती अब बच्चों पर भारी पड़ने लगी है. ऑनलाइन पढ़ाई के नाम पर बच्चों को मोबाइल के छोटे से स्क्रीन को ही क्लास मानना पड़ रहा है जिसके चलते बच्चों की आंखों से लेकर सेहत पर इसके गंभीर परिणाम पढ़ रहे हैं. रीड की हड्डी और गर्दन के हिस्से में दर्द की शिकायतें विद्यार्थियों में अब उभर कर आने लगी हैं. गार्जियंस स्कूल संचालकों की इस पद्धति को केवल फीस लेने का माध्यम बता रहे हैं.

ऑनलाइन शिक्षा केवल पैसे लेने का जरिया: संकल्प

ऑनलाइन शिक्षा के खिलाफ गार्जियंस राइट लगातार सवाल उठा रहे हैं. गार्जियन राइट ने इस मामले के खिलाफ इलाहाबाद हाई कोर्ट में अपील करने की बात भी कही है.


गार्जियन राइट के संरक्षक संकल्प नेब ने ऑनलाइन शिक्षा प्रणाली पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि यह केवल धन कमाने का स्कूलों का प्रोपेगंडा है. इससे ना केवल बच्चों की सेहत पर बल्कि उनकी आंखों पर भी गहरा प्रभाव पड़ रहा है. संकल्प ने सरकार से अपील की है कि तत्काल प्रभाव से ऑनलाइन शिक्षा को बंद किया जाए और स्कूलों की गर्मी की छुट्टी घोषित की जाए. इतना ही नहीं ऑनलाइन शिक्षा के बाद स्कूल संचालकों द्वारा मांगी जा रही फीस अवैध बताकर फीस माफ करने की गुजारिश भी गार्जियन राइट द्वारा सरकार से की गई है.

राइट्स के सरंक्षक संकल्प ने कहा कि ऐसे समय में जब आदमी की आय का स्रोत बंद हो गया है, स्कूल संचालक ऑनलाइन शिक्षा के नाम पर अभिभावकों को मेंटली टॉर्चर कर रहे हैं, उनसे पैसे मांगे जा रहे हैं जो बेहद निंदनीय है.

उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि इतने समय से अभिभावक और स्कूल संचालकों का आपसी संबंध में होने के बाद भी संकटकाल में फीस मांगना और ऑनलाइन शिक्षा के जरिए विद्यार्थियों के शारीरिक और मानसिक क्षति को बढ़ावा देना स्कूलों की निरंकुशता को साबित करता है.
ऑनलाइन शिक्षा को लेकर स्कूल, शिक्षा विभाग की कोई गाइडलाइन का नहीं होने से मनमानी कर रहे हैं. जनपद सहारनपुर में सैकड़ों स्कूल ऐसे हैं जो ऑनलाइन पढ़ाई करा रहे हैं. बच्चों की पढ़ाई का नुकसान ना हो इसके नाम पर करीब डेढ़ माह से ऑनलाइन क्लास चलाई जा रही है. हर क्लास के ग्रुप बनाकर स्कूल होमवर्क बच्चों तक स्कूल संचालक पहुंचा रहे हैं. मोबाइल पर भेजे जाने वाले होमवर्क को पूरा करने में अब नई समस्या बच्चों के साथ आ रही है. उनकी आंखों और गर्दन में दर्द की शिकायतें मिल रही हैं. अभिभावक 15 दिन 20 दिन की ऑनलाइन क्लास के बाद ग्रुप से लेफ्ट हो रहे हैं. लगातार मोबाइल देखने से बच्चों की आंखों में दर्द होने लगता है. इस पद्धति को लेकर अभिभावकों में भी रोष है. अभिभावक कहते हैं कि स्कूल की ओर से केवल खानापूर्ति हो रही है. मोबाइल पर किताबों के कई पेज वीडियो भेज दिए जाते हैं. इतना ही नहीं कई अभिभावक बाल आयोग से भी शिकायत के मूड में है. हमने इस विषय में नगर के महत्वपूर्ण चिकित्सकों से बात की. जानकर हैरानी होगी कि सभी डॉक्टरों ने मोबाइल को लगातार नहीं देखने की सलाह दी और कंप्यूटर विजन सिंड्रोम की समस्या से बचने की सलाह भी डॉक्टर दे रहे हैं.

क्या कहते हैं डॉक्टर विवेक शर्मा

वरिष्ठ नेत्र विशेषज्ञ डॉक्टर विवेक शर्मा कहते हैं कि लॉक डाउन के दरमियान बच्चे ज्यादा समय मोबाइल लैपटॉप कंप्यूटर के सामने बिता रहे हैं. कई बच्चों के पास इतनी लंबी सीटिंग के हिसाब से अच्छी कुर्सी भी उपलब्ध नहीं होती है. ऐसे में कंप्यूटर विजन सिंड्रोम की समस्या देखने को मिल रही है.

उन्हें आंखों में ड्राइनेस, इचिंग, रेडनेस, आंखों में जलन जैसी समस्याएं होती हैं. विद्यार्थी अगर मोबाइल पर पढ़ाई कर रहे हैं तो एक बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि हर 45 मिनट पर ब्रेक लेना चाहिए. लगातार मोबाइल स्क्रीन नहीं देखनी चाहिए. स्क्रीन आंखों से 15 डिग्री नीचे की तरह होनी चाहिए और दो से 3 फीट आंखों से दूर होनी चाहिए. मोबाइल और लैपटॉप का इस्तेमाल कम रोशनी में करने से बचना चाहिए.

एक ही पोजीशन में न बैठने की सलाह दे रहे हैं डॉक्टर राहुल सिंह

जनपद के वरिष्ठ आर्थोपेडिक डॉ राहुल सिंह सलाह देते हैं और कहते हैं कि एक ही पोजीशन में बैठे रहने से विद्यार्थियों की रीड की हड्डी और गर्दन के हिस्से में परेशानी की समस्या आ रही है.

इसलिए मोबाइल का प्रयोग करते हुए गर्दन को ज्यादा देर नीचे झुका के रखने के कारण सिर का पूरा भार गर्दन पर पड़ता है. मोबाइल के प्रयोग के दौरान एक ही पोजीशन में नहीं बैठना चाहिए अर्थात पोजीशन बदलते रहना चाहिए.

वरिष्ठ चिकित्सक डॉ अमित की राय मोबाइल से इस्तेमाल से बचें

वरिष्ठ चिकित्सक डॉ अमित चौहान कहते हैं कि मोबाइल लैपटॉप कंप्यूटर के ज्यादा इस्तेमाल से बचना चाहिए.

जब फोन चार्जिंग में लगा हो या बैटरी कम चार्ज हो उस दौरान इस इस्तेमाल ना करें. लैपटॉप चार्ज हो रहा हो तो उस दौरान उसे अपने पैरों पर रखकर पढ़ाई न करें.गर्म होते लैपटॉप और मोबाइल को अपने शरीर से दूर रखना चाहिए.

एक सवाल गूगल से जो करता है सबसे ज्यादा परेशान

इन सबके बीच एक सवाल और है जो अक्सर देखने में आता है. गूगल से किसी भी सवाल का जवाब मांगने पर गूगल तकरीबन 1 से 10 जवाब सामने रखता है. उसमें सभी तरह के जवाब होते हैं जो कमोबेश बच्चों के ना देखने वाले और ना पढ़ने वाले भी होते हैं .ऐसे में यह समस्या भी पेरेंट्स को सता रही है.

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Prakash Pandey

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