इंदौर/ मध्यप्रदेश.कोरोनावायरस के काल में पूरा विश्व संकट के दौर से गुजर रहा है. किसी भी तरह का उपचार अब तक निकल कर सामने नहीं आया है. ऐसे में भारत जैसे देश में जहां गरीबी रेखा का स्तर अधिक है, मजदूरी पर दैनिक जीवन चलता है, मन को विचलित कर देने वाली तस्वीरें कोरोना काल में निकलकर सामने आ रही हैं.
सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है वीडियो में एक व्यक्ति बैल के साथ जूतकर राष्ट्रीय राज्य मार्ग पर बैलगाड़ी को खींचते देखा जा रहा है.
गरीबों की दयनीय हालत की गवाही देता यह वीडियो इंदौर बाईपास रोड का है. भीषण गर्मी में एक युवक बैलगाड़ी को खींच रहा है युवक का नाम राहुल है जो मजदूरी करता है.
क्या है वीडियो में
सोशल मीडिया पर वायरल इस वीडियो में इंदौर जिले से होकर गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक तीन आगरा मुंबई राजमार्ग पर एक बैलगाड़ी धीमी चाल से आगे बढ़ रही है जिसमें एक बैल और एक व्यक्ति एक साथ जूते नजर आ रहे हैं. बैलगाड़ी में एक महिला और एक युवक बैठे हैं साथ में गृहस्थी का कुछ सामान है.
वीडियो में अपना नाम बताते हुए युवक राहुल ने बताया कि उसकी उम्र 40 साल है और वह और उसका भाई और भाभी महू से निकले हैं और इंदौर के पास के पत्थर मुंडला गांव के रहने वाले हैं. युवक बता रहा है कि गाड़ी में उसका छोटा भाई और भाभी बैठे हैं. हम गांव देहातों की ओर जा रहे हैं.
मन को विचलित कर देने वाले शब्दों को आगे बढ़ाते हुए राहुल ने बताया “लॉक डाउन के कारण बसें भी नहीं चल रही है अगर बसें चलती तो हम बस से ही सफ़र करते. मेरे पिता, मेरे भाई और मेरी बहन आगे पैदल चले गए हैं. मेरा परिवार गांव-गांव घूमकर बैलों की खरीद-फरोख्त का काम करता है.
निराशा भरे शब्दों में राहुल ने बताया आखिर हम क्या करें? मेरे पास दो बैल थे लेकिन मेरे घर में आटा और खाने पकाने का दूसरा सामान खत्म हो गया था इसके चलते मैंने 15 हज़ार कीमत का एक बैल केवल पांच में 15 दिन पहले ही बेच दिया ताकि अपने घर का खर्च चला सकूं.
प्रशासन ने लिया संज्ञान
लाचारी से भरे इस वीडियो को वायरल होने के बाद एसडीएम प्रतुल सिन्हा ने पीटीआई भाषा से कहा “मैंने महू की जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सीईओ को मामले की पूरी सच्चाई पता लगाने के निर्देश दिए हैं सिन्हा ने बताया कि बैलगाड़ी में जूते दिखाई दिए व्यक्ति की तलाश की जा रही है और संबंधित सरकारी योजना के तहत उसके परिवार की हर संभव मदद की जाएगी.”
लोक डाउन में आई इस तस्वीर ने झकझोर कर रख दिया है. गरीबी और मजबूरी की ऐसी तस्वीरें हिंदुस्तान से निकल कर आएंगे इसकी कल्पना शायद ही किसी ने की होगी और वह भी तब जब भारत के विकसित होने की बातें कहीं जा रही हों और विकास में आगे निकलने की बातें कहीं जा रही हों तो ऐसी तस्वीरें इन सभी मुद्दों पर सवालिया निशान खड़ा करती हैं.









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