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BIG NEWS: सहारनपुर और मुजफ्फरनगर में जल्द लगेगा बायोगैस, कई समस्याओं का समाधानऔर पर्यावरण होगा शुद्ध- अतुल त्यागी

सहारनपुर और मुजफ्फरनगर में जल्द लगेगा बायोगैस प्लांटलॉकडाउन के चलते यह कार्य बीच में रुक गया है,

-देवबंद विधायक  ब्रिजेश सिंह से भी इस बारे में विचार विमर्श हो चुका हैं उक्त प्लांट के जनपद में लगने से पीएम मोदी का स्वच्छ भारत मिशन का सपना हो सकेगा पूरा : कंपनी निदेशक अतुल त्यागी

इसका उददेश्य जानवरों के अपशिष्ट जैसे गोबर, खेती से निकलने वाले ठोस अपशिष्ट, पराली से होने वाली समस्याओं का भी समाधान होगा और वातावरण भी स्वच्छ होगा

देवबंद/सहारनपुर(गौरवसिंघल)। नवीनीकरण उर्जा क्षेत्र की अग्रणी कंपनी एस्ट्रोन सोलर पावर प्राइवेट लिमिटेड हरियाणा के बाद जल्द ही जनपद सहारनपुर व मुजफ्फरनगर में भी एक-एक बायोगैस प्लांट लगाने जा रही है। जिसको लेकर पूरी तैयारी कर ली गई है। कंपनी के निदेशक अतुल त्यागी ने आज जानकारी देते हुए बताया कि लॉकडाउन के चलते कार्य बीच में रुक गया है।

इस संबंध में देवबंद विधायक कुंवर ब्रिजेश सिंह के साथ भी विचार-विमर्श कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि उक्त प्लांट के जनपद में लगने से पीएम मोदी का स्वच्छ भारत मिशन का सपना भी पूरा हो सकेगा। इसका उददेश्य जानवरों के अपशिष्ट जैसे गोबर, खेती से निकलने वाले ठोस अपशिष्ट, पराली से होने वाली समस्याओं का समाधान होगा और वातावरण भी स्वच्छ होगा।

प्लांट में कूडे कचरे, पशुओं के गोबर और जानवरों के अन्य अपशिष्ट का प्रयोग बायोगैस और जैविक खाद बनाने में किया जाएगा। उन्होंने बताया कि बायोगैस प्लांट लगने से क्षेत्र में कूड़े से जनता को मुक्ति मिलेगी।

इस परियोजना को बायोजेस्ट एनर्जी और वासर टेक्नीक जीएमबीएच एवं ऑलिव रेजोल्यूशन ऑस्ट्रिया के सहयोग से हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार में लगाया था जो सफलता के साथ कार्य कर रहा है.

इस पहल पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए बायो जेस्ट एनर्जी के क्रिश्चियन रील ने कहा कि यह एक शानदार पहल है जिसके अंतर्गत विश्वविद्यालय और सरकार ने कचरे को ऊर्जा में परिवर्तित करने में बायोगैस की भूमिका को लेकर प्रोजेक्ट बनाए हैं. ऑलिव रेजोल्यूशन की निदेशक भावना कुलश्रेष्ठ ने बताया कि कचरे को ऊर्जा में परिवर्तित करने कि इस तकनीक से वायु और जल प्रदूषण ना के बराबर होता है और यह पूरी तरह से आर्थिक रूप से व्यावहारिक है. यह भारत और ऑस्ट्रेलिया के व्यापार और तकनीकी सहयोग बढ़ाने की ओर एक महत्वपूर्ण कदम है.

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Prakash Pandey

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