चुनिंदा अफसर और भाजपाई रहे मौजूद
सीएम योगी की मंशा फलीभूत हुई तो लोगों को मिलेगी राहत
सुरेंद्र सिंघल, विशेष संवाददाता.
सहारनपुर। योगी आदित्यनाथ के प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने के बाद शनिवार को सहारनपुर का दौरा राजनीतिक, सामाजिक, प्रशासनिक और स्वास्थ्य कारणों से उल्लेखनीय रहा है। मुख्यमंत्री का सहारनपुर आगमन की सूचना दो दिन पूर्व मिली थी। इसके बावजूद इतने कम समय में दौरे की सफलता बेहद मुश्किल था। लेकिन प्रशासनिक कौशल से यह संभव हो पाया। दरअसल मुख्यमंत्री की मंशा राजधानी लखनऊ से 480 किमी दूर प्रदेश के अंतिम छौर पर स्थित और तीन राज्यों की सीमाओं से सटे सहारनपुर जिले के लोगोें को कोरोना की मार से बचाने के सरकारी प्रयासों को फलीभूत करने की थी। जिले के प्रभारी प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने इस संवाददाता को बातचीत में यह दो टूक जानकारी दी।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लगता है कि सहारनपुर का संदेश दूर तक जाएगा। कोविड-19 की समीक्षा और भाजपा के जनप्रतिनिधियों और संगठन कर्ताओं का नौकरशाही के साथ समन्वय बनाना योगी के दौरे की मुख्य वजह थी। कोविड-19 की समीक्षा तो मंडल स्तरीय रही। लेकिन बैठक को संक्षिप्त करने के कारण जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति एन वक्त पर जनपद सहारनपुर तक ही सीमित कर दी गई। उसमे भी सहारनपुर जिले का सरकार में प्रतिनिधित्व करने वाले राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार डा. धर्म सिंह सैनी और भाजपा सांसद प्रदीप चौधरी को तो शायद इसलिए इस महत्वपूर्ण बैठक से दूर रखा गया क्योंकि उन दोनो को उनके परिवार के अन्य सदस्यों सहित कोरोना संक्रमण हो चुका था। दर्जा प्राप्त मंत्री पिछडा वर्ग आयोग के उपाध्यक्ष जसवंत सैनी भी बैठक में मौजूद नहीं थे। शामली जिले की थानाभवन सीट का प्रतिनिधित्व करने वालेे प्रदेश के गन्ना मंत्री सुरेश राणा बैठक से एक दिन पूर्व ही सहारनपुर में आ गए थे। वह शनिवार की समीक्षा बैठक में शामिल रहे। मुजफ्फरनगर के सभी छह विधायक भाजपा के है। जिनमें एक मुजफ्फरनगर शहर के कपिल देव अग्रवाल योगी सरकार में मंत्री है। मुजफ्फरनगर के सांसद डा. संजीव बालियान मोदी सरकार में मंत्री है। ये सभी भी बैठक में शामिल नहीं हो सके। इस तरह राजनीतिक रूप से बैठक सहारनपुर तक सीमित हो गई। यहां के चार में से तीन विधायक बृजेश रावत (देवबंद) , देवेंद्र निम (रामपुर मनिहारान) , चौधरी किरत सिंह (गंगोह) बैठक में शामिल रहे। पूर्व विधायक मनोज चौधरी, महावीर राणा और राजीव गुंबर भी बैठक में मौजूद रहे। ये तीनो चुनाव हार गए थे। कई पूर्व विधायक भी नहीं बुलाए गए। इनमें से एक रविंद्र मोल्हू चुनाव के बाद बीजेपी में शामिल हुए थे। भाजपा संगठन की ओर से जिलाध्यक्ष डा. महेंद्र सैनी का ही प्रतिनिधित्व रहा। मेयर संजीव वालिया भी मौजूद रहे। इसी तरह मंडल में शामली और मुजफ्फरनगर के अफसरों की संख्या भी कम ही थी। शामली से जिलाधिकारी जसमीत कौर, सीएमओ डा संजय भटनागर और मुजफ्फरनगर से जिलाधिकारी सेल्वा कुमार जे और सीएमओ डा प्रवीण चौपडा को ही बुलाया गया। सहारनपुर से कमिश्नर संजय कुमार, प्रमुख सचिव उद्यान बीएल मीणा, डीआईजी उपेंद्र अग्रवाल, डीएम अखिलेश सिंह, सीएमओ डा. बीएस सोढी, एसएसपी डा. एस चनप्पा और राजकीय मेउिकल कालेज के प्राचार्य डा डीएस मार्तोलिया एवं नगर आयुक्त ज्ञानेंद्र सिंह ही उपस्थित रहे। कुल मिलाकर कोशिश यह थी कि बैठकों में कम से कम और केवल जरूरी लोगों की ही उपस्थिति रहे। संभवतः इसी कारण मीडिया को भी मुख्यमंत्री से पूरी तरह से दूर रखा गया। समीक्षा बैठक की ब्रीफिंग कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने की। जाहिर है कि कोरोना संक्रमण के प्रकोप से बचने को हर सावधानी बरती गई। प्रशासन कोई भी जोखिम लेने को तैयार नहीं था। जनप्रतिनिधियों की बैठक में मुख्यमंत्री ने दो बातो पर फोकस किया। एक जनप्रतिनिधि और पदाधिकारी विकास कार्यो को लेकर प्रशासनिक अफसरों के साथ समन्वय बनाए और जनहितकारी योजनाओं का जनता को कितना लाभ मिल रहा है। इस पर नजर रखे। मुख्यमंत्री ने जिलाध्यक्ष महेंद्र सैनी को यह जिम्मेदारी सौंपी कि अफसरों और जनप्रतिनिधियों के बीच संवादहीनता और दूरी न रहे। कार्यकर्ता योजनाओं से लाभान्वित लोगों से संपर्क कर उनकी राय जाने और पहली बार योजनाओ का लाभ उठाने वालो से यह सवाल अवश्य पूछे कि इससे पहले की सरकारों में वे लाभ से क्यों वंचित रखे गए। मुख्यमंत्री योगी ने सहारनपुर मंडल में तेजी के साथ पैर पसार रहे कोरोना संक्रमण पर अपना सबसे ज्यादा ध्यान केंद्रित रखा। उन्होंने कोविड अस्पतालों की संख्या और उनका स्तर बढाने एवं तमाम जरूरी सुविधाएं देने का निर्देश स्वास्थ्य और प्रशानिक अधिकारियों को दिया। मुख्यमंत्री योगी जाते-जाते राजकीय मेडिकल कालेज का निरीक्षण भी करते गए। वहां उन्होंने प्राचार्य डा. दिनेश सिंह मार्तोलिया से स्थिति की जानकारी ली और व्यवस्था में सुधार के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंडल के अफसरों को बैठक में साफ कर दिया कि उन्हें हर कीमत पर और हर संभव तरीके से कोरोना संक्रमण को नियंत्रित करना है और संक्रमितों को बेहतर से बेहतर उपचार और सुविधाएं मुहैया करानी है। सहारनपुर मंडल में अभी तक करीब 50 लोगो की इस संक्रमण से जाने जा चुकी है और करीब एक दर्जन से ज्यादा लोगों की मंडल से बाहर के अस्पतालों में जान गई है। अनेक लोग सहारनपुर के कोविड अस्पतालों से उपचार के बीच बाहर सुविधा संपन्न अस्पतालों में जाने को मजबूर हुए और अच्छी खासी संख्या में लोगों ने स्थानीय चिकित्सीय व्यवस्था को नजर अंदाज कर बाहर का रूख किया। मुख्यमंत्री ने समीक्षा बैठक में वह हर बात रखी। जिससे लोगों का शासकीय व्यवस्थाओं और चिकित्सीय सुविधाओं में भरोसा बढ सके। यदि स्वास्थ्य अधिकारी और प्रशासनिक अफसर मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप नतीजे दे देते है तो इससे सहारनपुर मंडल के लाखों लोगो को अवश्य लाभ मिलेगा और मुख्यमंत्री के सहारनपुर आने का मकसद भी पूरा हो जाएगा।




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