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अलविदा सुशांत : सुशांत की मौत पर सवाल तो समाज से भी है, क्या जवाब के लिए आप तैयार हैं

मुंबई. दौलत थी, शोहरत थी, इज़्ज़त थी, चेहरे का तेज भी था, जिंदादिल भी था लेकिन ये सब कुछ अब था में बदल चुका है. कल तक गूगल पर सर्च किए जाने के बाद सुशांत सिंह राजपूत लिखने पर भारतीय फिल्म स्टार है लिखा आता था लेकिन अब गूगल ने सुशांत सिंह राजपूत की परिभाषा बदल दी. अब सुशांत सिंह राजपूत फिल्म स्टार थे हो गए. जरूरत की सभी चीजों के होने के बाद भी एक 34 साल का युवा कलाकार मौत को गले लगा लेता है यह अपने आप में न केवल झकझोर देने वाली घटना है बल्कि समाज को सोचने पर विवश करने की एक प्रेरणा है. सुशांत सिंह राजपूत ऐसा नहीं है कि पहले ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने आत्महत्या की. लेकिन सुशांत सिंह राजपूत आत्महत्या ने समाज के सामने बहुत से सवाल खड़े कर दिए. समाज को सोचना होगा कि आखिर सब कुछ होने के बाद भी एक 34 साल के नौजवान ने मौत को गले क्यों लगा लिया? सुशांत सिंह का समाज से यह सवाल जरूर रहेगा कि उनके अकेलेपन में समाज कहां था यानी सब कुछ होने के बाद भी सुशांत समाज में खुद में बहुत अकेले थे. अवसाद से घुट कर एक व्यक्ति ने अंत का रास्ता बना लिया यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. अपने ही फिल्मों में आत्महत्या का खंडन करने वाले सुशांत ने रियल लाइफ में आत्महत्या को ही चुना, यह बेहद चौंकाने वाला है बेहद दुखी करने वाला है.
सुशांत के दुनिया से जाने के बाद लाखों फैंस और सेलिब्रिटीज मित्रों और परिवार ने दुख व्यक्त किया है. करण जौहर ने तो इतना तक कहा कि काश मैं सुशांत से बात कर लेता तो सुशांत आत्महत्या जैसे कदम को ना उठाता.
सवाल यही है कि काश कोई किसी को अकेला ना छोड़ता, काश कोई खुद को भीड़ में अकेला ना पाता, काश समाज सुशांत को उसके साथ होने का एहसास कराता, काश ऐसा कुछ हो पाता जिससे सुशांत को भरोसा हो जाता कि वह समाज में अकेला नहीं है लेकिन ऐसा नहीं हुआ. यह काश काश ही रह गया इस काश पर किसी ने प्रकाश नहीं डाला. यह खोज समाज के मुंह पर कालिख के रूप में पुती रहेगी, जिसने समय रहते अपनी मौजूदगी को दर्ज नही करवाया.
तमाम रिपोर्टर आ रही हैं कि सुशांत की मृत्यु की वजह अवसाद है निश्चित सही है. इस बीच में सुशांत की हत्या की साजिश का भी परिवार आरोप लगा रहा है. हो सकता है की इस मिस्ट्री का कोई ना कोई अलग रुख हो, इससे इनकार नहीं है लेकिन सही मायनों में सुशांत को मारने में सामाजिक कारण भी पीछे नहीं है. ऐसा क्यों होता है कि भरी भीड़ में इंसान को कोई अपना दिखाई नहीं देता. यह केवल सुशांत की बात नहीं है यह समाज के तमाम उन लोगों के साथ हैं जो अंतिम विकल्प के रूप में जीवन त्यागना चुनते हैं. ऐसा क्यों होता है कि इतनी बड़ी दुनिया में किसी को कोई अपना नजर नहीं आता.
ऐसे तमाम सवालों के जवाब इस समाज को ही देना है.
सुशांत सिंह राजपूत ने रविवार को खुदकुशी करके सबको चौंका दिया. रिपोर्ट भी आ गई है और कारण भी लगभग तय है पुलिस ने हैंगिंग यानी फांसी पर लटकना कारण माना है . अस्पताल में ऑटोप्सी रिपोर्ट में सुसाइड की बात की पुष्टि भी हुई है. 20 लोगों की उपस्थिति में सुशांत समाज के आगे बहुत से सवाल छोड़कर पंचतत्व में विलीन हो जाएंगे.
क्या यह जरूरी नहीं कि आप अपने से जुड़े लोगों को अपने जुड़े होने का एहसास समय-समय पर कराते रहें? यदि जाकर नहीं तो फोन से नजदीकी दर्शाते रहें और अंत में एक बेहतरीन नायक को अलविदा…

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Prakash Pandey

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