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अपनी बात: लॉकडाउन का पालन कर परिवार की सेफ्टी का बैरियर बने.. शादाब जफर शादाब

वरिष्ठ पत्रकार व शायर शादाब जफर शादाब ने लोगों को कोरोना वायरस से बचने के लिए लॉकडाउन का पालन करने व घरों में रहने की सलाह दी.उन्होंने कहा की कोरोना वायरस से पूरा विश्व त्राहिमाम कर रहा है, इस समय हम सभी को संयम से काम लेने की जरूरत है. लोगों से अनावश्यक रुप से मौहल्लो,चौराहो नहीं इक्ट्ठा होना चाहिए ,बाहर निकलते वक़्त मास्क पहन कर निकले व स्वच्छता का पूर्ण रूप से ध्यान रखें.अगर बाहर से आप के घर, पास पडोस में कोई आया है, तो प्रशासन या स्थानीय जनप्रतिनिधि को इसकी सूचना दें, ताकि उक्त रहते व्यक्ति की जांच की जा सके. अफवाह पर ध्यान नहीं दें और सुरक्षित रहने के लिए घरों में रहें.
शादाब जफर कहते है कि कोरोना वायरस संक्रमण के खौफ व लॉकडाउन के बीच लोग अपने-अपने घरों में बंद हैं. घरों में रहते-रहते लोग ऊब सा गये हैं. लेकिन इसके कई फायदे भी सामने आ रहे हैं. कोरोना व लॉकडाउन ने परिवार के सदस्यों को एक दूसरे के करीब ला दिया है. एक-दूसरे के प्रति अपनत्व की भावना जागृत हुई है. सृजनधर्मी अपनी साहित्यिक साधना में जुटे हैं तो प्रकृतिपे्रमी पेड़-पौधे लगाने व सिंचाई करने में जुटे हैं. इस लॉकडाउन में बीमार, बूढ़े-बुजुर्ग, शिक्षाविदें, रिटायर शिक्षकों, का बहुत बुरा हाल है वही लॉकडाउन से कुछ ऐसे लाभ मिले हैं.मसलन लॉकडाउन के कारण जहां प्रदूषण का स्तर गिरा वहीं संसार भर में तरल ईंधन खपत में रिकार्ड गिरावट आई. गृहस्थी के सारे घटक हंसने, रोने व बातें करने आदि के लिए इकट्ठा होने को विवश हुए हैं. सड़कों पर होने वाली दुर्घटना में कमी आई है. आवारगी भी घटी है. पान, सिगरेट व पान मसाला जैसी वस्तुओं की खपत कम हुई. इससे जनस्वास्थ्य को बड़ा लाभ हुआ बड़े बूढ़े, दादा दादी लॉक डाउन के दौरान कहानियां, हंसी—मजाक, सफाई का महत्व जैसे टापिक पोते पोती के साथ साझा कर रहे है.

लॉकडाउन में अब संयुक्त परिवार का नजारा दिख रहा है. सबसे अच्छी बात यह कि घर-आंगन, बर्तन बासन, कपड़ा बिछावन इत्यादि को साफ-सुथरा रखने की प्रवृत्तियों में काफी वृद्धि हुई है. इससे स्वच्छता अभियान सफल हुआ है. लॉकडाउन के सकारात्मक परिणाम भी दिख रहें हैं. बाप-दादा-पोता एक साथ साथ रह रहा है. संयुक्त परिवार की झलक दिखती है. करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद सरकार ने जिस हाथ धुलाई कार्यक्रम को पूरी तरह सफल नही कर पाई थी, उसे कोरोना का ख़ौफ़ ने कर दिया. गाड़ियां कम चलने से पर्यावरण संरक्षण को बल मिला है. वे घर में बच्चों को पढ़ने की प्रेरणा देते हैं. जीवन अनमोल है और हमारा पहला कर्तव्य है लॉकडाउन का पालन करना.
उनका कहना है की शहर में कोई भी गरीब भूखा न रहने पाए इस पर उत्तर प्रदेश सरकार, पुलिस और प्रशासनिक संबंधित अधिकारी, शहर के समाज सेवक,समाजिक तंजीमे, चेयरपर्सन,विधायक पूरा ख्याल रखें हैं, क्योंकि वर्तमान समय में पूरी दुनिया कोरोना जैसी महामारी की चपेट में है. इस बीमारी का आज तक कोई उपचार नहीं मिल पाया है. केवल सोशल डिस्टेंसिंग अपना कर स्वयं और अपने परिवार को इस बीमारी से सुरक्षा प्रदान की जा सकती है. इसके अलावा बहुत जरूरी होने पर यदि कोई भी जनमानस घर से एक भी कदम बाहर निकलते हैं तो मास्क का प्रयोग अवश्य करें. जिससे स्वयं स्वस्थ रहकर परिवार को भी स्वस्थ रख सकें.
शादाब जफर शादाब ने ये भी कहा कि जन जन के जीवन को सुरक्षित बनाने के लिए हम सब लॉकडाउन का पालन अवश्य करें। घर के बाहर बिना जरूरत न निकलें. खुद सुरक्षित रहें और परिवार को भी सुरक्षित एवं स्वस्थ रखें। इससे निश्चित ही इस बीमारी से बचाव के लिए सुरक्षा मिलेगी और स्वस्थ समाज की परिकल्पना पूरी होगी. शहर में प्रशासन के आदेशनुसार रोजमर्रा की सामग्रियों की पूर्ति के लिए शहर में रोस्टर के हिसाब से चयनित जनरल स्टोर,मेडीकल,सब्जी,दूध की दुकानें खोली जा रही है. इसके साथ ही प्रशासन की ओर से जनरल स्टोर की कुछ दुकानें ऐसी संचालित है जो अति अवश्यक वस्तुओं को अपने लोगों के माध्यम से घर घर सामग्रियों की सप्लाई दे रहे है. इसके अलावा नगरीय क्षेत्र ठेला व हाथ गाड़ी से फलों एवं सब्जियों की सप्लाई कराई जा रही है. साथ ही दुग्ध विभाग द्वारा दुग्ध वाहनों के माध्यम से दूध की भी सप्लाई की जा रही है. शहर का कोई भी पात्र गरीब भूखा न रहने पाए. इसके लिए सरकार के आदेश पर श्रम विभाग में पंजीकृत अंत्योदय, मनरेगा एवं घुमंतु प्रकृति के लोगों को नि:शुल्क खाद्यान मुहैया कराया गया.

क्योंकि कोरोना पॉजीटिव लोगों की तादाद हरदिन बढ रही है इस लिए लॉकडाउन को हमे गंभीरता से लेना होगा वरना चीन, इटली, अमेरिका जैसे हालात बनने मैं देर नहीं लगेगी. अपने परिवार के लोगों की जिंदगी को सुरक्षित करना चाहते हो तो परिवार के लिए बैरियर बन जाए और परिवार के किसी सदस्य को बाहर ना जाने दे, और परिवार के अन्दर कोरोना को ना आने दे. घरों मैं रहे सुरक्षित रहे.