गोरखपुर. लॉक डाउन के दौरान भी अजब गजब किससे आपको देखने और सुनने में मिल गये. कई तो ऐसे होते थे जो आपको सोचने पर मजबूर कर देते थे. कहीं पैदल चलने की पीड़ा तो कहीं घर न पहुंच पाने का गम. हर तरफ आंखों में आंसू और दिल में गुब्बार लिए मजदूर बस अपने घर के लिए चल रहे थे.
यह किस्सा अब तक पढ़े आप के किस्सों से बिल्कुल अलग है. यहां एक पेंटर की कहानी है जिसने घर पहुंचने के लिए अपने पूरी जिंदगी की कमाई दांव पर लगा दी. दरअसल यह किस्सा है लल्लन पेंटर का. लल्लन पेंटर गाजियाबाद शहर में पेंट का काम करते हैं गोरखपुर के रहने वाले हैं. लाख डाउन में आर्थिक व्यवस्था बिगड़ने के खतरे के बीच अपने घर पहुंचना चाहते थे लेकिन पहले दूसरे और तीसरे चरण में लल्लन के पास कोई भी विकल्प नहीं था. चौथा चरण शुरू हुआ और सरकार ने प्रवासी मजदूरों को उनके घर पहुंचाने के लिए श्रमिक ट्रेनें शुरू कर दी. श्रमिक ट्रेन शुरू होने के बाद से लल्लन को अपने घर जाने की धुन सवार हो गई लेकिन टिकट नहीं मिल पा रहा था. 3 दिन तक लगातार स्टेशन पर टिकट की आस में बैठे लल्लन की उम्मीद ने तब दम तोड़ दिया जब उनको 3 दिन बाद भी टिकट नहीं मिला. ऐसे में लल्लन ने अपने घर पहुंचने का नया तरीका सोचा. चौथे दिन बैंक जाकर अपने जमा किए हुए खाते से एक लाख नब्बे हज़ार रुपये निकाल लिए. पैसे लेकर लल्लन सेकंड हैंड कारों के मार्केट में पहुंचे जहां से उन्होंने डेढ़ लाख में कार खरीदी और अपने पूरे परिवार के साथ गोरखपुर के पीपीगंज के कचोलिया गांव लौट गए. लॉक डाउन के दौरान हुई दिक्कतों के बाद लल्लन ने कसम खाई कि अब वह दोबारा परदेश नहीं जाएंगे.
बमुश्किल अपने घर पहुंचे लल्लन मीडिया से बात करते हुए भावुक हो जाते हैं और कहते हैं कि बस में भीड़ बहुत थी और संक्रमण का खतरा अधिक था ऐसे में ट्रेन में टिकट ना मिलने से कार खरीद ली और परिवार के साथ वापस घर आ गया. उन्होंने परिवार के सकुशल घर पहुंचने पर अपना संतोष जताया और कहा कि परिवार को सुरक्षित लाने के लिए पूरी कमाई झोंक दी.
OMG: ट्रेन में टिकट नहीं मिल पाई तो जिंदगी भर की कमाई लुटाई, फिर जानिए कैसे पहुंचा अपने घर एक परिवार













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