सहारनपुर. निजी शिक्षण संस्थानों की फीस वसूली के खिलाफ गार्जियंस राइट्स ने उच्च न्यायालय प्रयागराज व सर्वोच्च न्यायालय नई दिल्ली में पीआईएल भेज कर फीस माफी के आदेश देने की गुहार लगाई है. गार्जियंस राइट्स के अध्यक्ष संकल्प नेब ने उत्तर प्रदेश उच्च न्यायालय एवं सर्वोच्च न्यायालय को प्रेषित पीआईएल में प्रदेश एवं देश के सभी शिक्षण संस्थानों द्वारा कोविड-19 के कारण बंद पड़ी शिक्षण संस्थाओं द्वारा अवैध रूप से फीस वसूली के दबाव की बात कही है. गार्जियंस राइट्स ने कहा है कि यह अभिभावकों पर दोहरी मार है जिससे मुक्ति दिलाने की जरूरत है. संस्था के संयोजक संकल्प नेब ने अप्रैल मई-जून 3 महीने की फीस माफ करने की अपेक्षा करते हुए अभिभावकों की स्थिति का उल्लेख किया है. उन्होंने अपनी पीआईएल में कहा है कि अभिभावक स्कूल फीस देने में असमर्थ है. व्यवसाय और काम चौपट हो जाने के बाद से स्कूलों द्वारा फीस मांगना अभिभावकों पर दोहरी मार है.
संकल्प नेब ने कहा है कि इंटरमीडिएट तक की निजी शिक्षण संस्थाओं के संचालकों द्वारा वैकल्पिक शिक्षा के रूप में जिस तरह ऑनलाइन शिक्षा की व्यवस्था की गई है, उसका दुष्प्रभाव भी शिक्षा प्राप्त करने वाले शिक्षार्थी बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है. राष्ट्रीय स्तर पर शैक्षिक व्यवस्था के लिए बनाई गई सीबीएसई बोर्ड एवं आईसीएसई बोर्ड की व्यवस्था है तथा उसके व्यवस्थित संचालन हेतु ही भारत सरकार द्वारा निर्धारित एनसीईआरटी द्वारा प्रत्येक बच्चे को सस्ती और गुणवत्ता परक शिक्षा के लिए कक्षा के अनुरूप पाठ्यक्रम निर्धारित है.

पीआईएल में कहा गया है कि सरकार द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम के लिए विषय विशेषज्ञ मान्यता प्राप्त पुस्तक के लेखक भी निर्धारित है. साथ ही साथ सरकार उन पुस्तकों को छपवा कर सस्ती पुस्तकें उपलब्ध कराने की एक निर्धारित व्यवस्था है लेकिन निजी शिक्षण संचालकों द्वारा एक अवैधानिक समानांतर व्यवस्था बनाकर अधिक एवं अनाधिकृत आय के लिए निजी प्रकाशक के आमान्यता प्राप्त लेखकों की निजी पुस्तकों के पाठ्यक्रम संचालित कराए जाने का धंधा चल रहा है. निजी स्कूलों की चक्की में अभिभावक अनाधिकृत नेक्सेस के हाथों पीसने को मजबूर हैं जबकि एनसीईआरटी द्वारा निजी शिक्षण संस्थानों को अतिरिक्त गुणवत्ता युक्त शिक्षा के लिए निर्धारित पाठ्यक्रम से एक या दो अतिरिक्त पुस्तकों के उपयोग की अनुमति है. लेकिन उत्तर प्रदेश में समानांतर शिक्षा व्यवस्था के प्रभावी रूप से लागू होने के कारण अभिभावक दोहरी मार झेलने को मजबूर हैं. पीआईएल में यह भी कहा गया कि उत्तर प्रदेश शासन स्तर से निजी शिक्षण संस्थाओं पर सीधा नियंत्रण नहीं होने के कारण निजी शिक्षण संस्थान मनमर्जी करने और अभिभावकों का शोषण करने में लगे हुए हैं जबकि ऐसे में यदि ऑनलाइन शिक्षा व्यवस्था शिक्षार्थियों के लिए अनुमन्य है तो एनसीईआरटी की ई-पुस्तकें इंटरनेट पर उपलब्ध है जिनके माध्यम से गुणवत्ता युक्त शिक्षा व्यवस्था की जाती सकती है. पीआईएल में कोरोना का जिक्र करते हुए कहा गया कि प्रतिदिन कोरोना संक्रमित रोगियों की संख्या बढ़ रही है और विभिन्न चरणों के लोग डाउन में भी भारत सरकार और राज्य सरकार अभी भी स्कूलों को खोलने में सफल नहीं हो पाई है. करोना के बढ़ने की संभावनाओं के कारण भी न केवल शिक्षण संस्थाएं खुल पा रही हैं बल्कि बोर्ड की परीक्षाओं को भी संपन्न नहीं कराया जा सका है.
गार्जियंस राइट्स ने अभिभावकों और बच्चों के हित में न्यायालय से फीस माफी के साथ-साथ एनसीईआरटी की पुस्तकें लागू कराने के लिए आदेश पारित करने की गुहार लगाई है.








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