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77वें जन्मदिन पर दिग्गज समाजसेवी ठाकुर विक्रम सिंह ने मुख्यमंत्री से ब्रिटिश और मुगलकालीन निशानियों पर की बड़ी मांग

77 के हो गए आर्य समाज के दिग्गज समाजसेवी ठाकुर विक्रम सिंह

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से विक्रम सिंह ने अपील की है कि उत्तर प्रदेश में मुगलकालीन और ब्रिटिश कालीन गुलामी की निशानियों को मिटाएं,

प्रदेश के सभी नगरो और गांवों के नाम मुस्लिम और अंग्रेजी के बजाए भारतीय संस्कृति और हिंदू धर्म के आधार पर रखे जाएं

✍️ सुरेंद्र सिंघल, वरिष्ठ पत्रकार.

सहारनपुर। देश के दिग्गज आर्य समाजी नेता और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रमुख शख्सियत ठाकुर विक्रम सिंह 77 वर्ष के हो गए हैं। ठाकुर विक्रम सिंह जन्मोत्सव समारोह समिति के चेयरमैन प्रख्यात अंतरराष्ट्रीय योगाचार्य डा. वरूणवीर ने आज संवाददाताओं को बताया कि कोरोना संकटकाल के चलते आयोजन समिति ने पहली बार यह तय किया है कि ठाकुर विक्रम सिंह जी का 78वां जन्मदिन बेहद सादगी और कोविड-19 के नियम और सावधानियों का पालन करते हुए मनाया जाएगा। डा. वरूणवीर ने अपने पिताश्री के लिए मिल रही हार्दिक शुभकामनाओं के लिए लोगों का दिल से साधुवाद किया। डा. वरूणवीर ने बताया कि उनके पिताश्री ठाकुर विक्रम सिंह ने आज सहारनपुर मंडल के अपने पैतृक गांव खेड़ी राजपूतान खतौली में अपने बड़ों-बुजुर्गों और साथियों का आशीर्वाद प्राप्त किया और शुभकामनाएं ली। खेड़ी राजपूतान में ही 19 सितंबर-1943 को आर्य समाज के दिग्गज परिवार और प्रगतिशील किसान ठाकुर रणवीर सिंह के यहां विक्रम सिंह ने जन्म लिया था। ठाकुर जी के जीवन पर शुरू से ही आर्य समाज के संस्थापक प्रवर्तक स्वामी दयानंद की शिक्षाओं का गहरा असर था। ठाकुर विक्रम सिंह ने इस संवाददाता को बताया कि अपनी सारी गृहस्थ और कारोबारी जिम्मेदारियों को छोड़कर उन्होंने 20 वर्ष की आयु से 40 वर्ष की आयु तक 20 साल के दौरान पूरे देशभर में भ्रमण कर आर्य समाज के पूर्णकालीक प्रचारक के रूप में स्वामी दयानंद जी के संदेशों का प्रचार-प्रसार किया, लोगों में आर्यसमाज के प्रति चेतना जगाई, जागरूकता लाने का कार्य किया, गुरूकुलों का संवर्धन किया, संरक्षण किया और महिलाओ को शिक्षित करने पर ज्यादा बल दिया। उन्होंने देशभर की गौशालाओं को अपने आर्थिक संसाधनों से भरपूर सहायता प्रदान की और वर्तमान में भी कर रहे हैं। ठाकुर विक्रम सिह ने अपने लंबे आर्य समाजी जीवन के दौरान प्रख्यात आर्य समाजी और पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह, पूर्व प्रधानमंत्री और अपने निकट संबंधी विश्वनाथ प्रताप सिंह, प्रख्यात आर्य समाजी नेता और संसदविद् प्रकाशवीर शास्त्री, अलीगढ़ से 10 साल से लोकसभा सदस्य रहे प्रख्यात आर्य समाजी नेता शिवकुमार शास्त्री, सहारनपुर क्षेत्र के यशस्वी सांसद रहे प्रख्यात आर्य समाजी नेता ठाकुर यशपाल सिंह के साथ काम किया और समाज में बदलाव लाने की लंबी मुहिम चलाई। विक्रम सिंह का एक ही संदेश रहा है कि लोग अच्छाई और सच्चाई के रास्ते पर चलें। सच्चाई और अच्छाई का जीवन ही देश और समाज को ऊंचा ले जा सकता है। उन्होंने कहा कि आज सबसे बड़े दुःख की बात यह है कि जिस देश की जिस सियासत पर भारत को दुनिया में गौरवशाली स्थान हांसिल कराने की महती जिम्मेदारी थी, उसके खुद पथभ्रष्ट हो जाने और राजनीतिज्ञों के अपने सिद्धांत छोड़कर निजी परिवार और कारोबार का पोषण करने की बढ़ती प्रवृति के चलते देश ऊपर चढ़ने के बजाए नीचे गिरता जा रहा है। जो उनके लिए 78 साल की आयु में सबसे ज्यादा कष्टकारक है। ठाकुर विक्रम सिंह मेरठ यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएट हैं। उन्होंने कुछ समय के लिए दिल्ली में गरीबों और आमजन के लिए निःशुल्क चिकित्सा क्लीनिक भी संचालित किया था। विक्रम सिंह जी की दो पत्नियां हैं संतोष और शकुंतला जो उनके आर्यसमाजी जीवनकाल में उनका भरपूर साथ देती हैं। विक्रम सिंह के सबसे छोटे पुत्र वरूणवीर और उनकी पत्नी देश और दुनिया में भारतीय योग एवं संस्कृति ध्यान का निःशुल्क प्रचार-प्रसार करते हुए यह दंपत्ति 25 देशों का दौरा अभी तक कर चुका है। ठाकुर विक्रम सिंह ने बताया कि डा. वरूणवीर दिल्ली के चाणक्यपुरी में भारत का विश्वस्तरीय योग संस्थान खोल रहे हैं। जो भारतीय योग के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि साबित होगा। जहां देश और दुनिया के योग प्रशिक्षु अध्ययन करेंगे और योग सीखेंगे। ठाकुर विक्रम सिंह के बड़े पुत्र प्रज्ञा आर्य, राहुल आर्य, इंद्रवीर सिंह और पुत्री साधना आर्य अपने पिता के 78वें जन्मदिन समारोह को सादगी पूर्वक मनाने के लिए तैयारियां कर रहे हैं। विक्रम सिह ने निर्णय लिया है कि वे अपना 78वां जन्मदिन नई दिल्ली के गुलमोहर पार्क स्थित डी-27 में अपने बच्चों के आवास पर मनाएंगे और देश के ऐसे ढाई सौ आचार्यों, विद्वानों, गुरूकुल संचालकों, प्रचारकों, भजनोपदेशिकों, उपदेशिकावो और गौशाला संचालन करने वाले ढाई सौ महानुभावों को आर्थिक सहायता, सुविधा और सम्मान प्रदान करेंगे। विभिन्न धार्मिक, सामाजिक, राष्ट्रªवादी पुस्तकों के लेखक ठाकुर विक्रम सिंह ने अपने 78वें जन्मदिन के मौके पर “सर्वश्रेष्ठ बनो” शीर्षक नामक से पुस्तक का प्रकाशन भी किया है जिसमें चारों वेदों के सबसे ज्यादा उपयोगी चुनिंदा श्लोकों को भावार्थ के साथ पिरोया है। मनुस्मृति शतकम्, सत्यार्थ प्रकाश शतकम्, स्वाधीनता संग्राम के प्रमुख सूत्रधारों को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की है और उनके उत्कृष्ट बलिदान का उल्लेख किया है। महर्षि दयानंद जी के जीवन के सर्वश्रेष्ठ प्रसंगों को विक्रम सिह ने अपनी पुस्तक में सुंदर स्थान प्रदान किया है। जन्मदिन समारोह समिति के अध्यक्ष डा. वरूणवीर ने कहा कि पिताश्री के जीवन में यह पहला मौका है जब हम उनका जन्मदिन समारोह बहुत बड़े पैमाने और जनता के बीच नहीं मना पा रहे हैं।

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Prakash Pandey

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