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OMG:…और टाइगर जिंदा है! संवेदनहीनता और मानवता के बीच जंग में जीत गया बेजुबान, मानवीय संवेदना से बच गया टाइगर

सहारनपुर. जब सांसे लिखी है ऊपर वाले ने तो जरिया मिल ही जाता है. जब तक जीवन शेष है तब तक जीवन चलता रहेगा. एक बेजुबान की कहानी आपके सामने हैं.

दरअसल एक बहुत छोटा पिल्ला जिसको घुमाने के लिए उसके मालिक दो छोटी बच्चियां लेकर घूम रही थी.अचानक एक पटाखे वाली बाइक की आवाज सुनकर पिल्ला डर गया और सर्किट हाउस गेट के ठीक सामने कवर्ड नहर के अंदर गिर गया. पिल्ला चीख रहा था, पुकार रहा था लेकिन उसको बचाने का कोई विकल्प नहीं था. दोनों बच्चियों का जिनकी उम्र तकरीबन 10 साल और 12 साल थी वह अपने टाइगर को किसी भी तरह बचाने की गुहार सबसे लगाती रही.

नहर के अंदर गिरे टाइगर को बचाने की कोशिश करते हुए काला और उसके सहयोगी

दोनों का रो रो कर बुरा हाल था. मौके पर भारी भीड़ इकट्ठी हो गई लेकिन चाह कर भी कोई उसकी मदद नहीं कर पा रहा था. सर्किट हाउस में मौजूद सिटी सिटी मजिस्ट्रेट साहब जब वहां से निकले तो एक उम्मीद जगी. साहब से भी पिल्ले को बचाने की गुहार की गई. जन भावना को देखते हुए उन्होंने नगर निगम फोन भी मिलाया लेकिन फोन नहीं उठाया गया. थोड़ी देर बाद फोन से बात तो हुई लेकिन शायद मदद के संबंध में कोई विकल्प निकलकर नहीं आया.

क्षेत्र के पार्षद को लगातार फोन मिलाया गया लेकिन उन्होंने फोन उठाना भी ठीक नही समझा. उम्मीद टूटती जा रही थी थोड़ी देर बाद टाइगर चुप हो गया. लेकिन टाइगर के जीवन में अभी बहुत कुछ शेष था. शायद इसी के चलते भगवान ने काला नाम के स्थानीय व्यक्ति को भेज दिया. मिशन सक्सेसफुल रहा.करीब एक घण्टे की मशक्कत के बाद काला नाम के व्यक्ति ने अपने सहयोगी के साथ पिल्ले को कवर्ड नहर से पिल्ले को सकुशल बाहर निकाल लिया. पिल्ले को बाहर निकालने के बाद से वहां उपस्थित हर व्यक्ति ने तालियां बजाकर काला और उसके सहयोगी को बधाई दी. अपने टाइगर को पाकर बच्चियां खुशी से झूम उठी और सभी का धन्यवाद कर अपने घर को गई. काले की इस मेहनत के लिए पूरे क्षेत्र में उसकी तारीफ की.लोगों ने एक स्वर में कहा, “जाको राखे साइयां, मार सके ना कोई. टाइगर का जीवन शेष था और उसी का नतीजा था टाइगर अब जिंदा है. प्रकरण के बीच में एक सवाल उठता है कि प्रशासनिक संवेदनहीनता कितनी क्यों है क्या जानवर को बचाए जाने के लिए प्रयास नहीं किया जाना चाहिए था? बहरहाल जो भी हो लेकिन इसके लिए तमाम क्षेत्रवासी काला और उसके साथी को घर पहुंचकर बधाइयां दे रहे हैं.

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Prakash Pandey

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