शादी विवाह में जीजा और साले सालियों में छेड़छाड़ एक आम बात है. कहीं जीजा भारी पड़ते हैं तो कहीं साले भारी पड़ जाते हैं. अमूमन देखा यही गया है कि बरात लेकर गए जीजा पर ससुराल के साले और सालियां ही भारी पड़ती दिखाई देती हैं. चाहे वह जूता चुराई का रसम हो या द्वार चिकाई का या फिर यूं कहें जो पश्चिमी यूपी में कहा जाता है बार द्वारी का. हर जगह दूल्हा अपने आप को शिकार से ज्यादा कुछ नहीं समझता और ससुराल वाले साले और सालियां अपने से बड़ी तीस मार खान किसी को नहीं समझती. आपने भी आज तक कई शादियों में देखा होगा महसूस किया होगा. लेकिन आज अपनी अवधारणा बदल लीजिए. जरूरी नहीं है कि हर बार छेड़छाड़ साले ही कर पाए कभी-कभी जीजा भी भारी पड़ जाते हैं. और फिर नतीजा जो होता है उसे आप देख लीजिए. हम तो कहना नहीं चाह रहे हैं आप देखिए अंदाजा लगाइए और ठीक लगे तो शेयर भी कीजिए ताकि यह ज्ञान हर साले और सालियों को मिल सके. बाकी एक ठो कहावत जो हमने आदरणीय शैलेश त्रिपाठी जी की उठा ली है कि
दूध मांगेंगे तो खीर देंगे
छेड़ेंगे तो छतिया पटक के चीर देंगे…


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