50 साल तक लिव-इन रिलेशन में रहने के बाद 73 साल के बुजुर्ग ने 67 साल की महिला से रचाई शादी, पूरा गांव हुआ शामिल
कवर्धा/छत्तीसगढ़. प्यार अंधा होता है, प्यार की कोई उम्र नही होती, प्यार के लिए कोई बन्धन नही होता यह तमाम बातें अकसर आपने सुनी होंगी, देखी होंगी, महसूस की होंगी. कब, कौन और कहां कोई अच्छा लगने लगे इसका पता नहीं होता. प्रेम एक एहसास है, संवेदना है, विश्वास है जो किसी भी बंधन से मुक्त होता है. प्रेम को शब्दों में परिभाषित करना मुश्किल है इसलिए हम आपको सीधे इन सभी शब्दों को चरितार्थ करते जोड़े की अजीबोगरीब कहानी से आपका परिचय करवा रहे हैं. जिनकी पहली मुलाकात भी वैसे ही हुई जैसे सबकी होती है यानी बिलकुल सरल, बातचीत से. बातचीत ने सम्बन्ध का रूप लिया और सम्बन्ध ने साथ रहने का मौका दिया. जिसे आप आजकल की भाषा मे लिवइन में रहना कह सकते हैं. लिव इन मे रहते हुए एक पुरूष और एक महिला ने तीन बच्चों का पालन पोषण किया. अब आप सोच रहे होंगे कि इसमें खास क्या है? तो आपको बता दें कि पूरी खबर ही खास है.
दरअसल 50 साल तक एक आदमी और औरत लाइव इन मे रहे और बाद में जीवनसाथी बनने का फैसला किया. उनके इस फैसले में साथ दिया उनके तीन बच्चों और गांव के लोगों ने.
क्या है मामला?
73 साल के सुकाल निषाद ने बेटे की शादी करने की उम्र में अपनी शादी करने का निर्णय लिया, जो किसी आश्चर्य से कम नही था. सुकाल निषाद ने 67 वर्षीय गौतरहिंन विवाह के बधंन में बंध गये और विधिवत रूप से पति पत्नी बन गए. विवाह में सुकाल के बेटे और गौतरहिंन की एक बेटा व बेटी समेत पुरा गांव शामिल हुआ.
कवर्धा जिले के खैरझिटी कला गांव के रहने वाले 73 साल के सुकाल निषाद और 6 7 साल की गौतरहिन 50 सालों से एक दूसरे के साथ लिव इन जैसे रिश्ते में रह रहे थे. उन्होंने अपने इसी रिश्ते के दौरान तीन बच्चों का पालन पोषण भी किया. और 50 साल बाद नवधा रामायण समारोह में भगवान को साक्षी मानते हुए इन दोनों ने सात फेरे लिए और हमेशा के लिए एक-दूसरे के हो गए. अब खुशहाल जीवन व्यतीत कर रहे हैं.
कैसे चढ़ा प्यार परवान
बक़ौल सुकाल निषाद,” किसी परिवारिक कार्यक्रम के लिए ग्राम दाढ़ी के समिप गौतरहिन के गांव गया था.वहां हम दोनों के बीच बातचीत का सिलसिला शुरू हो गया और वक्त के साथ मुलाकातों का ये सिलसिले चाहत में तब्दील हो गया और फिर हमने आगे की जिंदगी एक साथ गुजारने का निश्चय किया. हमने अपने परिवार को अपनी इच्छा के बारे में बताया. और परिवार ने भी साथ दिया. आज साथ हैं सब.”
ग्रामीणों ने निभाई जिम्मेदारी,कराई शादी
दरअसल, सुकाल निषाद गरीब परिवार से आते हैं. एक कच्चे मकान के नीचे दोनों ने सुख-दुख में जीवन यापन करते हुए एक दुसरे के सहारे पुरे 50 साल बिताए.उनके रहन सहन और प्रेम को देखते हुए दोनों के परिवार की बरसों से इच्छा थी कि दोनों की शादी जिले के मंदिर या समारोह कर दी जाए. परिवार की यह इच्छा ग्रामीणों की सहयोग से गांव में चल रहे नवधा रामायण समारोह के बीच ग्रामीणों की उपस्थिति परवान चढ़ी. ग्रमीणों, परिवार के लोगों के बीच दोनों ने ईश्वर को साक्षी मानकर एक दूसरे को अपना जीवनसाथी बना लिया.

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