New Delhi. लॉक डाउन के चौथे चरण में प्रवासी मजदूरों का अपना गृह जनपद जाना जारी है. कहीं प्रवासी मजदूर पैदल जा रहे हैं तो कहीं सरकारें उनको बुलाने के लिए कोशिश कर रही हैं. ऐसे में प्रवासी मजदूरों के सामने रोजी रोटी का संकट रहेगा इसके लिए भारत सरकार ने प्लान तैयार कर लिया है और जल्द ही इसको लेकर सरकार ऐलान भी कर सकती है.
केंद्र कि मोदी सरकार मजदूरों का उपयोग प्राइवेट सेक्टर और देश में चल रही वर्तमान योजनाओं में करेगी. सरकार मजदूरों को ‘जैसा हुनर, वैसा काम’ के आधार पर रोजगार उपलब्ध कराएगी.
एक रिपोर्ट के मुताबिक नेशनल स्किल डेवलपमेंट सेंटर को इस संबंध में तैयारी करने के लिए कहा गया है. माना जा रहा है कि कंपनियों की मांग और स्किल के हिसाब से जल्द ही एक डाटा बेस्ट पोर्टल तैयार किया जाएगा इसके लिए युद्ध स्तर पर कार्य किया जा रहा है. जून के मध्य तक डाटा तैयार हो जाएगा इसके बाद प्रवासी मजदूरों को रोजगार ढूंढने की जरूरत नहीं होगी.
केंद्र सरकार ने सामाजिक एवं अधिकारिता मंत्री थावर चंद्र गहलोत के अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन भी किया है. प्रताप सारंगी, महेंद्र प्रताप पाण्डेय समेत कई मंत्रियों की एक कमेटी सभी राज्यों से संपर्क कर केंद्र सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी.
प्रवासी मजदूरों को क्या काम आता है? कितने सालों से काम कर रहा है? समेत कई सवालों पर राज्य सरकार डाटा इकट्ठा करेगी जो केंद्र सरकार को उपलब्ध कराया जाएगा.
इतना ही नहीं लोगों को किस प्रकार की नौकरी दी जा सकती है इस संबंध में सभी मंत्रालय प्रधानमंत्री कार्यालय को अपना सुझाव देंगे जिस पर फैसला किया जाएगा.
केंद्र सरकार का यह निर्णय अमल में आने के बाद से प्रवासी मजदूरों के लिए अच्छी खबर साबित होगी. जिस मजदूर में जितनी योग्यता होगी वैसा ही उसको रोजगार उपलब्ध हो जाएगा.
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