लखनऊ. उत्तर प्रदेश सरकार ने श्रम कानूनों में बदलाव किया है. उद्योग धंधों की बिगड़ती सेहत को सुधारने के लिए योगी सरकार ने अगले 3 साल तक श्रम कानून में छूट देने का फैसला कर लिया जिसका सीधा प्रभाव नौकरी करने वाले लोगों की आय पर पड़ेगा.
कोरोना संक्रमण के कारण बाजार में वस्तुओं की मांग घटी है ऐसे में फैक्ट्रियों में मज़दूर कामगार की नौकरियों पर संकट गहरा गया है. या तो उनकी नौकरी जा रही है या फिर उनकी सैलरी में कटौती हो रही है. उद्योगों का सेहत बिगड़ने का सबसे बड़ा प्रभाव असंगठित क्षेत्र के मजदूरों पर पड़ा है इसी के चलते प्रदेश सरकार ने श्रम कानूनों में छूट देने का फैसला किया है. श्रम कानूनों का सीधा सीधा प्रभाव नौकरी करने वाले लोगों की सैलरी पर भी पड़ेगा.
सरकार की ओर से जारी बयान के मुताबिक कंपनी एक्ट 1948 के अंतर्गत आने वाले रजिस्ट्री कृत सारे कारखानों की कार्यप्रणाली में धारा 51, 54, 55, 56 और धारा 59 के तहत बदलाव किया गया है.
नए बदलाव के बाद कोई भी कर्मचारी किसी कारखाने में प्रतिदिन 12 घंटे और सप्ताह में 72 घंटे से अधिक काम नहीं करेगा. पूर्व में 8 घंटे और सप्ताह में 48 घंटे की बाध्यता थी. 12 घंटे की शिफ्ट के दौरान 6 घंटे बाद 30 मिनट का ब्रेक होगा. 12 घंटे की शिफ्ट करने वाले कर्मचारी की मजदूरी दरों के अनुपात में होगी यानी कुल मिलाकर कहें अगर किसी मजदूर की 8 घंटे की सैलरी ₹100 है तो 12 घंटे में उसे डेढ़ सौ रुपया दिया जाएगा. यहां यह जान लेना जरूरी है कि पहले ओवरटाइम करने पर प्रति घंटे सैलरी करने के हिसाब से दोगुनी सैलरी मिलती थी.
उत्तर प्रदेश टेंपरेरी एग्जेम्प्शन फ्रॉम सर्टेन लेबर लॉज ऑर्डिनेंस 2020′ के मुताबिक
- संसोधन के बाद यूपी में अब केवल बिल्डिंग एंड अदर कंस्ट्रक्शन वर्कर्स एक्ट 1996 लागू रहेगा।
- उद्योगों को वर्कमैन कंपनसेशन एक्ट 1923 और बंधुवा मजदूर एक्ट 1976 का पालन करना होगा।
- उद्योगों पर अब ‘पेमेंट ऑफ वेजेज एक्ट 1936’ की धारा 5 ही लागू होगी।
- श्रम कानून में बाल मजदूरी व महिला मजदूरों से संबंधित प्रावधानों को बरकरार रखा गया है।
- उपर्युक्त श्रम कानूनों के अलावा शेष सभी कानून अगले 1000 दिन के लिए निष्प्रभावी रहेंगे।
- औद्योगिक विवादों का निपटारा, व्यावसायिक सुरक्षा, श्रमिकों का स्वास्थ्य व काम करने की स्थिति संबंधित कानून समाप्त हो गए।
- ट्रेड यूनियनों को मान्यता देने वाला कानून भी खत्म कर दिया गया है।
- अनुबंध श्रमिकों व प्रवासी मजदूरों से संबंधित कानून भी समाप्त कर दिए गए हैं।
- लेबर कानून में किए गए बदलाव नए और मौजूदा, दोनों तरह के कारोबार व उद्योगों पर लागू होगा।
- उद्योगों को अगले तीन माह तक अपनी सुविधानुसार शिफ्ट में काम कराने की छूट दी गई है।








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