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उत्तर प्रदेश: सरकारी कर्मचारियों के लिए बुरी खबर, सरकार ने लिया बड़ा फैसला, राजनीति हुई तेज़

लखनऊ/ उत्तर प्रदेश. कोरोना वायरस महामारी के प्रभाव के चलते आर्थिक स्थिति को बचाने मे लगी उत्तरप्रदेश सरकार ने बड़ा फैसला किया है. योगी सरकार ने श्रम कानूनों के बाद अब सरकारी कर्मचारियों के भत्तों को बंद करने का फैसला लिया है. इससे सरकार को तकरीबन 15 सौ करोड रुपए प्रति वर्ष बचत होगी.
उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश में 6 तरह के भत्तों को खत्म करने के प्रस्ताव पर अपनी मुहर लगा दी है. जल्दी वित्त विभाग के शासनादेश के बाद यह प्रभाव में आ जाएगा. सरकार के इस फैसले के बाद सरकार को तकरीबन 15 सौ करोड रुपए प्रतिवर्ष की बचत होगी जो सरकार के लिए अहम होगी.

किन पर पड़ेगा प्रभाव?

सरकार के फैसले से राज्य के कर्मचारी, शिक्षक और पुलिस विभाग को मिलने वाला सचिवालय भत्ता, नगर प्रतिकर भत्ता और अभियंताओं का विशेष भत्ता जहां कम हो जाएगा वहीं पुलिस विभाग की अपराध शाखा, सीबीसीआईडी, भ्रष्टाचार निवारण संगठन, आर्थिक अपराध अनुसंधान विभाग, अभिसूचना विभाग, विजिलेंस, सुरक्षा शाखा के अधिकारियों और कर्मचारियों के वेतन में कमी आ जाएगी. इतना ही नहीं लोक निर्माण विभाग में तैनात कर्मचारियों अधिकारियों को मिलने वाला रिसर्च भत्ता, अर्दली भत्ता और डिजाइन भत्ता बंद हो जाएगा. सिंचाई विभाग में तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों को मिलने वाला अर्दली भत्ता और इन्वेस्टिगेशन एंड प्लानिंग बता भी खत्म हो जाएगा.
हालांकि सरकार ने पहले 1 अप्रैल 2020 से 31 मार्च 2021 तक इन भत्तों को स्थगित करने का आदेश जारी किया था लेकिन अब सरकार ने इन भत्तों को खत्म करने का निर्णय ले लिया है. सरकार को आर्थिक सहयोग तो मिलेगा लेकिन विरोध की भी संभावना बनी हुई है.

वेतनमान में आएगी कमी

सरकार के इस फैसले के बाद 16 लाख कर्मचारी व शिक्षकों को मिलने वाली सैलरी कम हो जाएगी. नगर प्रतिकर भत्ता ढाई सौ से लेकर 900 रुपये तय था जो अब नहीं दिया जाएगा. वहीं सचिवालय भत्ते की अधिकतम राशि ढाई हजार रुपए थी जो अब नहीं दी जाएगी. निश्चित तौर पर सरकार को आर्थिक लाभ मिलेगा, बड़ी राशि की बचत होगी.

सरकार के फैसले का राजनीतिक विरोध शुरू

सरकार के इस निर्णय का समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने विरोध किया है. उन्होंने सरकार पर निरंकुश होने का आरोप लगाया है. जबकि पूरे मामले पर वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा है कि छठे वेतन आयोग की संस्तुतियों में जो भत्ते समाप्त करने की सिफारिश की गई थी उन्हीं को खत्म करने का फैसला लिया गया है. राज्य कर्मचारियों को वेतन दिए और एचआरए मिलता रहेगा. सरकार के इस निर्णय के बाद और फैसले के धरातल पर उतरने के बाद परिस्थितियां क्या होंगी यह तो आने वाला समय बताएगा लेकिन आपातकाल में सरकार द्वारा लिए गए निर्णय पर कर्मचारी संगठनों की भूमिका क्या होगी यह देखना महत्वपूर्ण होगा.(साभार)

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Prakash Pandey

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