उत्तर प्रदेश का लखनऊ : उत्तर प्रदेश की योगी सरकार जीवन रक्षक दवा की कालाबाजारी पर सख्त हो गई है. इसी का नतीजा है कि सरकार ने कोविड के इलाज में इस्तेमाल होने वाली रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी करने वाले लोगों पर रासुका (NSA) के तहत केस दर्ज किया है. कानपुर में रेमडेसिविर (Remdesivir) इंजेक्शन की खेप के साथ तीन लोगों के पकड़े जाने के बाद योगी आदित्यनाथ ने दवाओं की जमाखोरी और कालाबाजारी करने वालों पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिये हैं. सीएम कोविड से संक्रमित होने के बावजूद लगातार प्रदेश के हालात पर नज़र बनाये हुए हैं.
दवाओं की कालाबाजारी करने वालों पर एनएसए लगाने वाला उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है. राज्य सरकार ने पुलिस के साथ-साथ सभी एजेंसियों को अलर्ट कर दिया है. कई जगहों पर छापे भी मारे गये हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कोरोना महामारी में दवाओं की कालाबाजारी और जमाखोरी पर कड़ी कार्रवाई की बात कही है.
राज्य के एडीजी लॉ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार ने कहा कि प्रदेश के सभी 75 जिलों में प्रशासन का निगरानी तंत्र पूरी सतर्कता से दवा कंपनियों, दवा व्यापारियों पर पैनी निगाह रखे हुए है. कोविड 19 के उपचार में प्रभावी रेमडेसिविर इंजेक्शन समेत 8 अन्य महत्वपूर्ण दवाओं की कहीं भी कालाबाजारी हुई तो दोषियों को किसी हाल में बख्शा नहीं जायेगा. प्रशासन और पुलिस के सहयोग से पूरी मुस्तैदी के साथ ऐसी कालाबाजारी व जमाखोरी को हर हाल मे रोकने का काम किया जा रहा है.
जान लेना जरूरी है कि कानपुर की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने गुरुवार को 265 रेमडेसिविर इंजेक्शन के साथ तीन लोगों को गिरफ्तार किया था, जो इसकी कालाबाजारी करने में शामिल थे. कोरोना वायरस के उपचार में प्रभावी इन रेमडेसिविर इंजेक्शन की आजकल भारी मांग है, जिसके कारण कुछ लोग इसे ऊंचे दामों पर बेच कर भारी मुनाफा कमाना चाहते हैं.




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