उत्तराखंड का देहरादून. 2019 में गढ़वाल सीट से भाजपा के सांसद बने तीरथ सिंह रावत ने मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने के महज 4 महीने के भीतर ही सत्ता से बाय बाय कर ली. मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के खिलाफ बढ़ रहे असंतोष के बाद भाजपा हाईकमान के निर्देश पर सीएम बनने के फैसले पर अपना राजीनामा दिया था. 10 मार्च 2021 को कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच बेहद चुनौतियों को लेकर तीरथ सिंह रावत ने सीएम पद की शपथ ली थी. 2019 में गढ़वाल सीट से सांसद चुने जाने वाले तीरथ सिंह रावत उत्तराखंड विधानसभा के सदस्य नहीं है. नियम के मुताबिक शपथ ग्रहण के 6 महीने के भीतर यानी 10 सितंबर तक विधायक बनने की चुनौती थी. इससे पहले ही मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड की गवर्नर बेबी रानी मौर्य से मिलकर अपना इस्तीफा सौंप दिया.
2022 में उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव होने हैं. इस बीच तीरथ सिंह रावत के फैसले से कई तरह की अटकलों ने जन्म ले लिया. कई तरह के सवाल मीडिया के मोहल्ले में तैर रहे हैं. शुक्रवार 2 जुलाई की देर रात तीरथ सिंह रावत ने उत्तराखंड की राज्यपाल बेबी रानी मौर्य से मुलाकात की और अपना इस्तीफा सौंप दिया. इससे पहले रावत ने चिट्ठी लिखकर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को इस्तीफे की पेशकश की थी. इसके पीछे रावत ने उत्तराखंड में संवैधानिक संकट पैदा ना होने का कारण मीडिया को बताया था.
मीडिया में तैर रही खबरों के मुताबिक तीरथ सिंह रावत ने भाजपा आलाकमान को चिट्ठी लिखी थी और कहा था कि
आर्टिकल 164 ए के मुताबिक मुख्यमंत्री बनने के बाद मुझे 6 महीने में विधानसभा का सदस्य बनना था लेकिन आर्टिकल 151 कहता है कि यदि विधानसभा चुनाव में 1 साल से कम का वक्त बचता है तो वहां उप चुनाव नहीं कराए जा सकते हैं. इससे उत्तराखंड में संवैधानिक संकट ना खड़ा हो, इसलिए मैं मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा देना चाहता हूं.
मामला यहीं नहीं खत्म हुआ देर शाम तीरथ सिंह रावत मीडिया से मुखातिब हुए और बताया कि कोरोनावायरस में रोजगार पर असर पड़ा है लेकिन उनकी सरकार ने हर क्षेत्र को हुई क्षति की भरपाई की कोशिश की है. सीएम तीरथ सिंह रावत ने अपने कार्यकाल के कई काम गिनवाये लेकिन इस्तीफे के सवाल पर मोन रहे और बिना किसी जवाब के कॉन्फ्रेंस से निकल पड़े.
यह सभी घटना क्रम चल ही रहा था कि इसी बीच उत्तराखंड के मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह ने 3 जुलाई को दोपहर 3:00 बजे भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक की अध्यक्षता में बीजेपी विधायक दल की बैठक पार्टी मुख्यालय पर होने की सूचना दे दी. बैठक के लिए पर्यवेक्षकों के तौर पर केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को देहरादून भेजे जाने की खबर है.
अब जानिए वह नियम जिसका जिसके सीएम तीरथ ने हवाला दिया
जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 151 ए के मुताबिक अगर कोई विधानसभा या लोकसभा सीट खाली हो जाती है तो चुनाव आयोग को उस पर 6 महीने के भीतर उपचुनाव कराने होंगे. लेकिन अगर चुनाव में 1 साल या उससे कम वक्त है तो उपचुनाव नहीं होंगे.
प्रेस इनफॉरमेशन ब्यूरो के मुताबिक
जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 151 ए यह प्रावधान करती है कि निर्वाचन आयोग संसद के दोनों सदनों और राज्यों के विधाई सदनों में सीटों को उनके रिक्त होने की तिथि के 6 माह के भीतर भरने के लिए उपचुनाव करा सकता है. बशर्ते किसी भी खाली हुई सीट से जुड़े सदस्य का शेष कार्यकाल 1 वर्ष अथवा उससे अधिक हो.
अंदेशा पहले था अमल अब हुआ
गौरतलब है कि पिछले दिनों तीरथ सिंह रावत को दिल्ली तलब किया गया था. उस वक्त उन्होंने जेपी नड्डा और गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी. तभी से अंदेशा लगाया जा रहा था कि प्रदेश में मुख्यमंत्री बदला जा सकता है.





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