पिछले ढाई माह से आपके जहन में अपने बच्चों को लेकर सैकड़ों सवाल उछल कूद कर रहे हैं जिनका जवाब जानने के लिए आप परेशान हैं. आपकी परेशानी का कारण केवल स्कूल खुलने की तारीख ही नहीं है बल्कि स्कूल न खुल पाने के कारण आदत में शुमार हो चुके प्रॉपर स्टडी के माहौल को लेकर भी आप परेशान हैं लेकिन अब आपके बच्चे स्कूल कब से जाएंगे इसका पता चल गया है.
दरअसल कोरोना संक्रमण के कारण 15 मार्च के बाद से ही देश के सभी स्कूल कॉलेज बंद है. हालांकि स्कूलों ने ऑनलाइन क्लासेज शुरू कर शिक्षा को पटरी पर लाने की कोशिश की लेकिन यह व्यवस्था अभिभावकों के लिए बिल्कुल नई थी और अभिभावक इस व्यवस्था में अपने आप को सेट नहीं कर पा रहे हैं.
अभिभावकों के दिलो-दिमाग में तैरने वाले सवाल का जवाब आखिरकार मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक ने दे ही दिया. एक मीडिया समूह को दिए अपने साक्षात्कार में डॉ निशंक ने 15 अगस्त के बाद स्कूलों को खोलने की बात कही है. उन्होंने कहा कि 15 अगस्त के बाद सभी शैक्षणिक संस्थान खोल दिए जाएंगे. इस बीच सभी बची हुई परीक्षाओं को स्कूल में ही संपन्न कराकर उनके परिणाम घोषित किए जाएंगे.
यहां यह जान लीजिए कि इसके पीछे के सूत्रधार दिल्ली के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया है. ऐसा माना जा रहा है. मनीष सिसोदिया ने अपने ट्विटर अकाउंट पर डॉक्टर निशंक को भेजे पत्र का जिक्र किया है.
सिसोदिया ने अपने पत्र में लिखा था कि
” समय आ गया है कि कोरोना के अस्तित्व को स्वीकार करते हुए देश में स्कूलों की भूमिका नए सिरे से तय की जाए. यदि स्कूलों को साहसिक भूमिका के लिए तैयार नहीं किया गया तो यह हमारी ऐतिहासिक भूल होगी. स्कूलों की भूमिका पाठ्य पुस्तकों तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि बच्चों को जिम्मेदार जीवन जीने के लिए तैयार करने की होगी.”
इन सबके बीच एक सवाल और निकल कर आता है कि यदि स्कूल खुलेंगे तो उनके संचालन का क्या तरीका होगा? पूरे मामले पर अभिभावकों की भी अपनी राय है. सोशल मीडिया पर अभिभावकों की ओर से मैसेज वायरल हो रहा है कि उनके बच्चे प्रयोग करने की वस्तु नहीं है. ऐसे में सवाल यह जन्मता है कि स्कूल खुल भी गए तो उपस्थिति को लेकर यह सोशल डिस्टेंसिंग को लेकर सरकार किन नियमों का पालन कराएगी?
वर्तमान की व्यवस्था को देखते हुए ऐसा लगता है कि सरकारी स्कूलों के बाहर थर्मल स्कैनर और मास्क, ग्लव्स को अनिवार्य कर सकती है. इसके साथ ही स्कूल को सैनिटाइजर कराने के भी आदेश दे सकती है लेकिन ऐसे में सवाल उठता है कि इन नियमों का पालन क्या स्कूलों में आसानी से कराया जा सकेगा? क्या बच्चों की उपस्थिति को लेकर किसी अलग तरीके को अपनाया जाएगा? ऐसे तमाम सवाल होंगे जिनका जवाब सरकार की ओर से आना बाकी है.


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