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Corona Vaccine: देश के पहले कोरोना वैक्सीन का ह्यूमन ट्रायल में कोई साइड इफेक्ट नहीं, जानिए कब तक

सांकेतिक तस्वीर

नई दिल्ली : वैश्विक महामारी कोरोना पर काबू पाने के लिए दवा निर्माण में समूचे विश्व के वैज्ञानिक, स्वास्थ्य से जुड़े विद्वान लगे हुए हैं लेकिन अब तक कोई संतोषजनक सन्देश विश्व को नहीं मिल पाया है. इसी बीच भारत में देसी कोरोना वैक्सीन ‘कोवाक्सिन’ का ट्रायल शुरू हो गया है. तीन दिन पहले पटना एम्स में इस वैक्सीन का ट्रायल शुरू हुआ. एक महिला सहित कुल नौ लोगों को वैक्सीन की डोज दी गयी है. डोज देने के बाद उन्हें कुछ देर तक विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम की निगरानी में सभी को रखा गया. फिर सबको घर भेज दिया गया. इसी क्रम में शुक्रवार को हरियाणा के रोहतक पीजीआइ में तीन लोगों को वैक्सीन की पहली डोज दी गयी. कुल मिलाकर 12 लोगों पर अब तक ट्रायल हुआ, उन पर किसी पर साइड इफेक्ट नहीं देखने को नहीं मिला है.
सबसे ख़ास बात यह है कि वैक्सीन निष्क्रिय है, इसलिए इसके दुष्प्रभाव की आशंका नहीं के बराबर है. पटना एम्स के नोडल पदाधिकारी डॉ सीएम सिंह ने बताया कि जिन लोगों को वैक्सीन का डोज दिया गया है, उनको दूसरा डोज 14 दिनों के बाद दिया जायेगा. उसके बाद निगरानी में रख कर रिजल्ट देखा जायेगा. पटना एम्स के चिकित्सा अधीक्षक डॉ सीएम सिंह के नेतृत्व में पांच सदस्यीय टीम इस ट्रायल का अध्ययन करेगी. इस अध्ययन को पूरा होने में 194 दिन लगेंगे. इस टीम में हिंदुस्तान बायोटेक के सदस्यों के साथ पटना एम्स के भी डॉक्टर हैं. यह जान लेना महत्वपूर्ण है कि देश में कुल 1,125 लोगों पर स्टडी होनी है, जिसमें से 375 पहले फेज में हैं. दूसरे फेज में 750 लोग हैं. पूरी प्रक्रिया पर आइसीएमआर की नजर है, क्योंकि यहीं पर डेटा का विश्लेषण होगा.

14 शहरों में मिली इंसानों पर ट्रायल को मंजूरी

यह वैक्सीन देशभर में 14 रिसर्च इंस्टीट्यूट में ट्रायल की जाएगी जिनमें पटना, रोहतक के अलावा नयी दिल्ली, हैदराबाद, विशाखापत्तन, कानपुर, गोरखपुर, भुवनेश्वर, चेन्नई और पणजी भी शामिल हैं.

कब तक होगी उपलब्ध

सब कुछ ठीक ठाक रहा तो वैक्सीन के आने में तकरीबन1 वर्ष का समय लग जायेगा. दरअसल, क्लिनिकल ट्रायल के प्रोटोकॉल के अनुसार पहले फेज में एक महीना लगेगा. उससे मिले डेटा को ड्रग कंट्रोलर ऑफ इंडिया के सामने पेश किया जायेगा, फिर अगली स्टेज की इजाजत मिलेगी. फेज एक व दो में कुल मिला कर एक साल और तीन महीने का वक्त लगेगा.

किस तरह होगा प्रयोग

बताया जा रहा है कि शुरुआती डोज कम रहेगी. ट्रायल में यह देखा जायेगा कि वैक्सीन देने से किसी तरह का खतरा तो नहीं है, उसके साइड इफेक्ट क्या हैं. लिवर व फेफड़ों पर पड़नेवाले प्रभाव की भी जांच होगी. इसलिए पहले फेज को ‘सेफ्टी एंड स्क्रीनिंग’ कहा गया है.
यानी कुल मिलाकर कहा जाए तो ह्यूमन ट्रायल के सफलता के बाद भी वैक्सीन के बाज़ार में आने में अभी एक वर्ष से अधिक का समय है. (साभार)

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Prakash Pandey

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