बेंगलुरु : निजी जिंदगी जब सार्वजनिक हो जाये तो उसके बड़े गंभीर परिणाम होते हैं. इसका उदाहरण देखने को मिला बेंगलुरु में. परेशानियां सभी के जीवन मे होती हैं लेकिन जब समस्या का हल करने वाला ही समस्या ग्रस्त हो जाये तो क्या करियेगा.
बेंगलुरु में तलाकशुदा एक आईपीएस दंपत्ति का विवाद सामने आया है. एक पुलिस अधीक्षक अपने बच्चों से मिलने की जिद को लेकर पूर्व पत्नी के निवास पर बाहर ही बैठ गये. मामला यही रुक जाता तब भी ठीक था लेकिन तब और बढ़ गया जब आईपीएस की पूर्व पत्नी ने उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए पुलिस बुला ली.
क्या है मामला?
अरुण रंगराजन कलबुर्गी अंदरूनी सुरक्षा संभाग में पुलिस अधीक्षक के पद पर कार्यरत हैं. शनिवार की देर शाम वह सादे कपड़े में वसंत नगर में अपनी तलाकशुदा पत्नी के घर पहुंच गये और उन पर बच्चों से नहीं मिलने देने का आरोप लगाते हुए वहां धरने पर बैठ गये. एक आईपीएस यानी भारतीय पुलिस सेवा के ऑफिसर के इस तरह धरने पर बैठने की खबर जैसे ही मीडिया को लगी, मीडिया समेत क्षेत्र के अन्य लोग भी मौके पर पहुंच गये. उनके धरने से नाराज़ उनकी पूर्व पत्नी उप महाकमांडेंट (होमगार्ड) इलक्किया करुणागरन ने अरुण रंगराजन पर झगड़ा करने की शिकायत दर्ज करवाकर पुलिस बुलवा ली.
देखते ही देखते मामले ने बड़े विवाद का रूप ले लिया. मौके पर पहुंची पुलिस ने रंगराजन से वहां से जाने का अनुरोध किया जिसपर रंगराजन नही माने और उल्टा पुलिस से सवाल किया कि क्या मैं यहां हंगामा कर रहा हूं? मैं बस यहां बैठा हूं. रंगराजन ने मौके पर पहुंची मीडिया से भी सवाल किया कि आप लोग कुछ देर से यहां पर है क्या आपने मुझे उनसे झगड़ते देखा है? लेकिन उन्होंने यह कहते हुए पुलिस बुला ली कि मैं उनसे झगड़ रहा हूं.
IPS अरुण रंगराजन यहीं नहीं रुके उन्होंने फिर से पुलिस से पूछा कि वह किस नियम के तहत उनसे वहां से चले जाने को कह रही है. उन्होंने कहा कि उन्होंने तो कोई हंगामा किया नहीं है. उन्होंने स्वीकार किया कि हमारा प्रेम विवाह हुआ था और हम नक्सल प्रभावित छत्तीसगढ़ में तैनात थे, जहां हमारी शादी हुई, लेकिन सालभर में मतभेद सामने आने लगे. बाद में उनके कहने पर हमने कर्नाटक कैडर का चुनाव किया, लेकिन यहां आने के बाद हमारा तलाक हो गया.
उन्होंने कहा कि वह अपनी पूर्व पत्नी के घर अपने बच्चों से मिलने गए थे लेकिन उन्हें नही मिलने दिया गया जिसके चलते उन्होंने धरने के मन बनाया. पुलिस के अनुसार बाद में रंगराजन को अपने दो बच्चों से मिलने दिया गया, जिसके बाद वह वहां से चले गये. तब जाकर कहीं पुलिस चैन की सांस ले सकी.

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