लखनऊ/ कानपुर. विकास दुबे की सहायक उसके घर की ईंटे भी थी. विकास दुबे का घर किसी फिल्मी खलनायक के घर से कम नही था. पांचवें दिन पुलिस जांच में बड़ा खुलासा हुआ है. विकास दुबे ने घर में एक वायरलेस कंट्रोल रूम बना रखा था. इस कंट्रोल रूम का उपयोग विकास अपने गुर्गों के संपर्क बनाए रखने के लिए करता था. इतना ही नहीं विकास के घर से कई तरह के पहचान पत्र भी पुलिस को मिले हैं जिसमें किसी की फोटो, किसी का नाम और किसी के पते हैं. ऐसी आशंका जताई जा रही है कि विकास इन दस्तावेजों का उपयोग जमीन खरीदने बेचने में करता था.
गुर्गों के नाम होती थी खरीद फरोख्त
विकास दुबे अपने गुर्गों, रिश्तेदारों और नौकर नौकरानी के नाम पर जमीन खरीदता था. उसके धंधे में सभी साथी शामिल होते थे. आईजी रेंज कानपुर मोहित अग्रवाल ने इन दस्तावेजों को इस्तेमाल धोखाधड़ी और जालसाजी के लिए प्रयोग किया जाना माना है.
आईजी लखनऊ लक्ष्मी सिंह बिल्हौर के सीओ कार्यालय पहुंची
पुलिस मुठभेड़ में बदमाशों की गोली लगने से बिल्हौर देवेंद्र मिश्र की मृत्यु हो गई थी. देवेंद्र मिश्र की 3 माह पुरानी एसएसपी अनंत देव को लिखी चिट्ठी अब वायरल हो रही है जिसके बाद जांच प्रक्रिया तेज कर दी गई. सोमवार को आईजी लखनऊ लक्ष्मी सिंह को जांच के लिए नामित किया गया. मंगलवार की सुबह ही आईजी लक्ष्मी सिंह बिल्हौर के सीओ कार्यालय पहुंची. बंद कमरे में पुलिस कर्मियों से पूछताछ की गई. कंप्यूटर और दस्तावेज खंगाले गए. फॉरेंसिक टीम ने कंप्यूटर कोशिश कर कब्जे में ले लिया है.
विकास दुबे के फाइनेंसर जय वाजपेई को एसटीएफ ले गई लखनऊ
60 मुकदमों के आरोपी गैंगस्टर विकास दुबे के सहयोगी ब्रह्म नगर के रहने वाले जय वाजपेई को एसटीएफ कानपुर से लखनऊ ले आई है. हजार करोड़ रुपए की संपत्ति का मालिक जय बाजपेई विकास दुबे के काले कारोबार को देखता था. इतना ही नहीं दूबे का पैसा रियल स्टेट और शराब के कारोबार में भी लगाता था. जय वाजपेई को दूबे का फाइनेंसर बताया जा रहा है.

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