नए कृषि कानूनों को लेकर किसान आंदोलनरत हैं. चार चरण की वार्ता किसान नेता और केंद्र सरकार के बीच में हो चुकी है. आज पांचवें चरण में फिर से एक बार उलझी गुत्थी को सुलझाने की कोशिश केंद्र सरकार और किसान नेताओं के बीच में हुई लेकिन नतीजा सिफर रहा. बैठक के बाद किसानों का पारा चढ़ा हुआ दिखाई दिया. हालांकि सरकार ने एमएसपी पर लिखित आश्वासन देने और कानूनों में सुधार की बात कही थी लेकिन अब किसानों ने कहा है कि वो कानून की वापसी चाहते हैं और इससे कम पर वह किसी कीमत पर तैयार नहीं हैं. केंद्र सरकार ने वार्ता के लिए फिर से एक नई तारीख दी है 9 दिसंबर सुबह 11:00 बजे. यह वह तारीख होगी जब छठी बार केंद्र और किसान नेता बातचीत के लिए बैठेंगे.
क्या कहा किसान नेताओं ने
किसान नेता राकेश टिकैत ने बैठक के बारे में कहा कि
“सरकार अपनी बात कर रही है लेकिन हमने साफ कर दिया है कि यस और नो. हां या ना. 9 तारीख को फिर सरकार मीटिंग करेगी. हम आएंगे. लेकिन 8 तारीख को होने वाला भारत बंद रद्द नहीं किया जाएगा.”
एक अन्य किसान नेता ने कहा कि
“आज भी सरकार थोड़ा टालमटोल की नियत में थी लेकिन जब किसानों ने अपनी बात थोड़ा जोर से रखी तो सरकार ने कहा कि वह 9 तारीख को जब आएंगे तो प्रपोजल लेकर आएंगे.”
अब जान लीजिए सरकार ने क्या कहा
सरकार की ओर से केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि
सर्दी का मौसम है. कोविड-19 संकट है. इसलिए अगर यूनियन के नेता बच्चों और बूढ़ों को घर भेज देंगे तो अच्छा रहेगा. मैं यह आग्रह करता हूं. पिछले 6 साल में नरेंद्र मोदी के शासन में किसानों की स्थिति बेहतर हुई है. किसान सम्मान निधि के तहत 75000 करोड रुपए हर साल किसानों के पास पहुंचते हैं. मोदी जी की सरकार किसानों के हित के लिए प्रतिबद्ध है और आगे भी रहेगी. जब किसानों से चर्चा होती है तो कई तरह की बातें सामने आती हैं. मैं किसान आंदोलन में शामिल किसानों को हृदय से धन्यवाद देना चाहता हूं कि क्योंकि आंदोलन का अनुशासन बना रहा है. एमएसपी जारी थी, जारी है, और जारी रहेगी. इसमें किसी को भी संशय करने की आवश्यकता नहीं है. मैंने, पीएम ने और सरकार ने एमएसपी को लेकर तमाम बातें साफ कहीं हैं.”
यस और नो के सवाल पर केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि
“मैंने कहा किसानों के प्रति सरकार प्रतिबद्ध है तो जो कुछ होगा किसानों के हित में होगा. किसान यूनियन से फिर आग्रह करता हूं कि स्पष्टता के मुद्दे पर आ जाएंगे तो राह आसान हो जाएगी.”
भारत बंद पर उन्होंने कहा कि
“यूनियन के अपने कार्यक्रम है. मैं यह आग्रह करना चाहता हूं कि आंदोलन का रास्ता छोड़कर चर्चा के रास्ते पर आएं. सरकार चर्चा के लिए तैयार है.”
8 तारीख को किसानों का भारत बंद का आह्वान
इस बीच किसान नेताओं में 8 तारीख को भारत बंद करने का ऐलान किया है. साथ ही साथ कहा है कि बंद को सफल करने के लिए पूरी ताकत लगा दी जाएगी जिससे 9 दिसंबर को सुबह 11:00 बजे जब मीटिंग हो तो सरकार उनकी बातों को गंभीरता से सुनें. किसान संगठनों, किसान नेताओं और सामान्य किसानों का यही कहना है कि वह 8 तारीख में इकट्ठा होंगे और भारत बंद को सफल बनाने में पूरी ताकत झोंक देंगे. भारत बंद के जरिए किसान शक्ति प्रदर्शन के मूड में भी हैं.
पांचवें दौर की मीटिंग में क्या हुआ?
आज किसानों के आंदोलन का दसवां दिन था और सरकार और उनके बीच वार्ता का पांचवा दौर. लेकिन न सरकार झुकी और ना किसान डिगे. सरकार ने किसानों के सामने कानून में संशोधन का प्रस्ताव रखा जिसे किसान नेताओं ने ठुकरा दिया. किसान नेताओं ने ने कृषि कानून को रद्द करने की रट पकड़ ली. आज की बैठक में किसान संगठनों के 40 प्रतिनिधि शामिल रहे.
किसान नेता चर्चा की बजाए लिखित जवाब की मांग पर अड़े थे. बैठक में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल शामिल रहे. बैठक के दौरान यस और नो लिखे कागज लेकर बैठे रहे.उन्होंने अपनी कुर्सियां पीछे की. तकरीबन 1 घंटे तक यही स्थिति बनी रही.
शनिवार 5 दिसंबर को सुबह गृह मंत्री अमित शाह, पीएम मोदी से मिलने पहुंचे. मीटिंग में राजनाथ सिंह नरेंद्र सिंह तोमर और पीयूष गोयल शामिल रहे. आज किसानों ने सरकार का खाना खाने की बजाय अपने साथ लाया खाना खाया. विज्ञान भवन में वार्ता के दौर की शुरुआत होने से किसान अपने लिए खुद ही भोजन की व्यवस्था कर रहे हैं और सरकारी खाना खाने से परहेज कर रहे हैं. अब देशभर की निगाहें 9 दिसंबर की होने वाली वार्ता पर टिकी हुई हैं.

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