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यूपी, दिल्ली, राजस्थान, गुजरात, जैसे राज्यों में कहां से आती हैं नकली दवाएं, पता चल गया है

नकली दवाएं जीवन के लिए संकट होती हैं लेकिन कुछ लोग लालच में मानवीयता को ताक पर रखकर नकली दवाओं का कारोबार करते हैं. उत्तराखंड के रुड़की में ड्रग विभाग और विजिलेंस की टीम ने छापा मारकर समाज में नकली जहर सप्लाई करने वालों को बेनकाब किया है.
दरअसल, विजीलेंस और ड्रग विभाग की टीम ने एक फैक्ट्री में छापा मारकर डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक की कीमत की नकली दवाएं पकड़ी हैं. जो देश के 10 राज्यों में भेजी जाती थीं. हैरान करने वाली बात यह है कि इन्हीं राज्यों से आर्डर मिलने के बाद ये नकली दवाएं तैयार की जा रही थीं. टीम ने फैक्ट्री को सील कर दिया है और 20 से अधिक दवाओं के सैंपल जांच के लिए भेज दिए हैं.
शुक्रवार के दिन, रुड़की के आदर्श नगर में बने एक गोदाम में स्थानीय अफसरों ने छापा मारा. छापे में टीम को नामी कंपनियों की प्रतिबंधित नकली दवाएं मिलीं. इसके बाद टीम ने भगवानपुर में फैक्ट्री में छापा मारा. यहां हाईटैक मशीनें, रैपर और बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित दवाएं बरामद हुईं.

ज्वाइंट मजिस्ट्रेट नमामी बंसल ने बताया कि

“फैक्टरी में बिना लाइसेंस के दवाएं बनाई जा रही थीं. जो दवाएं मिली हैं उन्हें सरकार ने काफी समय पहले ही प्रतिबंधित कर दिया है. इनमें से अधिकतर एंटीबायोटिक है इसलिए बाजार में यह आसानी से खप जा रही थीं। फैक्ट्री काफी बड़ी थी.”

नकली दवा का कारोबार किस स्तर पर था इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां 40 से ज्यादा श्रमिक काम कर रहे थे. फैक्ट्री को सील कर उसके मालिक व मैनेजर समेत छह लोगों को हिरासत में ले लिया गया है.
टीम उस समय आश्चर्य से भर गई जब पूछताछ व जांच पड़ताल में पता चला कि फैक्टरी से 10 राज्यों को दवाएं भेजी जाती थीं. आर्डर आने पर ही करोड़ों की नकली दवाएं तैयार की जाती थीं.

इन राज्यों में होती थी नकली दवाएं सप्लाई

उत्तराखंड के रुड़की और भगवानपुर की नकली दवाई दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश, यूपी, कर्नाटक, पंजाब आदि में सप्लाई की जाती हैं. जानकारी मिलने के बाद ड्रग विभाग इन राज्यों के अधिकारियों से संपर्क साध रहा है.

यूपी के मुरादाबाद से भी कनेक्शन

ड्रग विभाग ने नकली दवा बनाने के गिरोह में जिस सरगना को पकड़ा है वह यूपी के मुरादाबाद जिले का रहने वाला है और पिछले 10 सालों से रुड़की में रह रहा है.

ड्रग इंस्पेक्टर एमएस राणा ने बताया कि

“करीब दो साल पूर्व भी इस फैक्टरी में छापेमारी की गई थी. तब फैक्टरी सोनिवा ड्रग्स फार्मा के नाम से चल रही थी. नकली दवाएं बरामद होने पर फैक्टरी को सील कर दिया गया था. अब यह फैक्टरी फर्जी लाइसेंस पर चल रही थी.”

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Prakash Pandey

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